Sunday, February 15

आईपीएल में ग्लेन मैक्सवेल की कहानी एक पहेली जैसी है। जैसे ही उन पर से नज़र हटती है, वो कुछ ऐसा कर जाते हैं जो सभी को चौंका देता है। लेकिन जब उनसे उम्मीदें जुड़ जाती हैं, तो प्रदर्शन न के बराबर रह जाता है। यह विरोधाभास ही उनकी पहचान बन चुकी है, जिसे एक बार फिर 2025 के सीज़न ने सामने ला दिया है।

कोहली की सोच और पहली कामयाबी

जब विराट कोहली ने 2021 में RCB के लिए मैक्सवेल को टीम में शामिल किया, तो उनकी सोच साफ़ थी। उन्हें बिना किसी अतिरिक्त दबाव के मिडिल ऑर्डर में मज़बूती देनी थी। कोहली को उम्मीद थी कि अगर मैक्सवेल पर ध्यान कम रहा, तो वो खुलकर खेल सकेंगे, जैसा उन्होंने 2014 में पंजाब किंग्स के लिए किया था। उस सीज़न में मैक्सवेल ने 500 से ज़्यादा रन बनाए थे और स्ट्राइक रेट 188 के आसपास रहा था।

2021 में RCB के लिए खेलते हुए मैक्सवेल ने 513 रन बनाए थे और अपनी टीम के लिए सबसे ज्यादा रन बनाने वाले बल्लेबाज थे। छह अर्धशतक उनके आत्मविश्वास और स्वतंत्रता का प्रमाण थे। तब कोहली और एबी डिविलियर्स के कारण सारा ध्यान उन पर नहीं था और मैक्सवेल खुलकर खेल पाए।

IPL 2024 में मैक्सवेल की हालत हुई खस्ता

आईपीएल 2024 में मैक्सवेल के लिए हालात बिल्कुल पलट गए। वर्ल्ड कप 2023 में डच टीम के खिलाफ सबसे तेज़ शतक और अफगानिस्तान के खिलाफ ऐतिहासिक दोहरा शतक जैसे कारनामों के बाद सभी को उम्मीद थी कि मैक्सवेल आईपीएल में धमाल मचाएंगे। लेकिन वह दस मैचों में सिर्फ़ 52 रन ही बना सके।

इसके अलावा, उनके अंदर आत्मविश्वास की ऐसी कमी दिखी कि उन्होंने खुद टीम मैनेजमेंट से कहा कि उन्हें ड्रॉप कर दिया जाए। इसके बाद उन्हें 12 दिनों का ब्रेक भी लेना पड़ा, ताकि वो मानसिक और शारीरिक रूप से रिकवर कर सकें।

2025 में भी उम्मीदें टूटीं

2025 में पंजाब किंग्स ने उन्हें फिर से मौका दिया, हालांकि इस बार उनकी कीमत सबसे कम रही। उनकी सैलरी में 60% से अधिक कट हुई। लेकिन अभी तक का सीज़न फिर से निराशाजनक ही रहा है। शुरुआती छह पारियों में सिर्फ़ 48 रन, जिसमें से 30 एक ही पारी में आए।

इस सीजन उन्होंने लगभग 47% गेंदें डॉट की हैं और हर आठवीं गेंद पर वो आउट हो जा रहे हैं। वह छह में से पांच बार स्पिन के खिलाफ आउट हुए हैं। उन्हें कभी वरुण चक्रवर्ती की गुगली, तो कभी आर अश्विन की कैरम बॉल ने परेशान किया है।

कोच पोंटिंग की चुनौती

रिकी पोंटिंग इसी दुविधा में हैं कि एक बड़े खिलाड़ी के फॉर्म के लिए कितने लंबे समय तक इंतजार करें? आँकड़े कह रहे हैं कि आगे बढ़ जाओ, दिल कह रहा है कि एक बार और मौका दो। पोंटिंग को ये उलझन 2018 में भी थी और अब 2025 में भी वही सवाल सामने है।

जब हटती है नजर तब ही चमकते हैं मैक्सवेल

मैक्सवेल का इतिहास बताता है कि जब आप उन्हें नजरअंदाज़ करते हैं, तब वो चमकते हैं। जब उन पर सबकी निगाहें होती हैं, तब वो खो जाते हैं। कोहली को यह बात समझ आई थी, शायद अब पोंटिंग को भी समझनी होगी।

पंजाब और चेन्नई के मैच से दो दिन पहले प्रैक्टिस के दौरान मैक्सवेल एक कोने में खड़े थे। वह ना तो मैदान में, ना ही पूरी तरह बाहर थे। जैसे वो खुद भी तय नहीं कर पा रहे हों कि आगे क्या करें। अंत में, वो चुपचाप वापस ड्रेसिंग रूम में चले गए-उस जगह जहां शायद वो फिर से खुद को खोज सकें।

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Neetish Kumar Mishra Sports Digest Hindi में Editor के रूप में कार्यरत हैं और खेल पत्रकारिता में गहरा अनुभव रखते हैं। क्रिकेट, टेनिस, फुटबॉल और अन्य खेलों की बारीकियों पर उनकी पकड़ बेहद मजबूत है। नीतिश कुमार मिश्र अपने पेशेवर लेखन के जरिए पाठकों को न सिर्फ सटीक खबरें, बल्कि गहन विश्लेषण के माध्यम से खेलों को और करीब से समझने का मौका भी देते हैं।

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