John Campbell Century Against India in Delhi Test: भारत और वेस्टइंडीज के बीच दिल्ली टेस्ट के चौथे दिन एक ऐसा पल आया, जिसने पूरे क्रिकेट जगत का ध्यान खींच लिया। इस मुकाबले में वेस्टइंडीज के ओपनर जॉन कैंपबेल ने अपने करियर का पहला टेस्ट शतक लगाकर इतिहास रच दिया। यह शतक सिर्फ उनके लिए नहीं, बल्कि वेस्टइंडीज क्रिकेट के लिए भी बेहद खास रहा, क्योंकि यह 23 साल बाद किसी कैरेबियाई ओपनर का भारत में पहला टेस्ट शतक था।
कैंपबेल ने 199 गेंदों में 115 रनों की शानदार पारी खेली, जिसमें 12 चौके और 3 छक्के शामिल थे। उनकी यह पारी धैर्य और आक्रामकता का बेहतरीन मिश्रण थी। उन्होंने भारतीय गेंदबाजों का डटकर सामना किया और हर रन के लिए संघर्ष किया।
कठिन हालात में खेली हिम्मत भरी पारी
भारत ने इस टेस्ट सीरीज़ पर अब तक पूरी तरह से दबदबा बनाए रखा है। लेकिन चौथे दिन कैंपबेल ने अपनी टीम को सम्मान दिलाने का काम किया। जब वेस्टइंडीज को फॉलो-ऑन खेलने के लिए मजबूर होना पड़ा था, उस वक्त पूरी टीम पर दबाव था।
इसी मुश्किल परिस्थिति में जॉन कैंपबेल ने जिम्मेदारी संभाली और टीम को मज़बूत शुरुआत दी। उन्होंने हर बॉलर को समय देकर खेला, खासतौर पर जसप्रीत बुमराह और मोहम्मद सिराज के शुरुआती स्पेल को सावधानी से झेला। धीरे-धीरे आत्मविश्वास बढ़ने के साथ उन्होंने शानदार शॉट्स लगाए और भारतीय गेंदबाजों को परेशान किया।
जडेजा ने तोड़ी साझेदारी, लेकिन कैंपबेल को मिला स्टैंडिंग ओवेशन
जब कैंपबेल 115 रनों पर खेल रहे थे, तब भारतीय स्पिनर रविंद्र जडेजा ने उन्हें एलबीडब्ल्यू कर भारत को महत्वपूर्ण सफलता दिलाई। हालांकि, उनके आउट होते ही ड्रेसिंग रूम से लेकर दर्शक दीर्घा तक सभी ने स्टैंडिंग ओवेशन देकर उनके प्रयास की सराहना की।
कैंपबेल के आउट होने के वक्त वेस्टइंडीज का स्कोर 212/3 था और कप्तान रोस्टन चेज मैदान पर उतरे। इस पारी ने दिखा दिया कि वेस्टइंडीज टीम अभी भी जुझारूपन के साथ मुकाबला करने में सक्षम है।
23 साल का इंतज़ार खत्म, वावेल हाइंड्स के बाद पहला शतक
कैंपबेल का यह शतक ऐतिहासिक इसलिए भी रहा क्योंकि 23 साल बाद किसी वेस्टइंडीज ओपनर ने भारत में टेस्ट शतक जमाया है। इससे पहले यह कारनामा वावेल हाइंड्स ने 2002 में ईडन गार्डन्स, कोलकाता में किया था।
सिर्फ इतना ही नहीं, कैंपबेल 2006 के बाद ऐसे पहले वेस्टइंडीज ओपनर बने जिन्होंने भारत के खिलाफ टेस्ट शतक ठोका। आखिरी बार डैरेन गंगा ने 2006 में बासेटेयर में भारत के खिलाफ 135 रन बनाए थे।
दिल्ली के खास आंकड़ों में दर्ज हुआ कैंपबेल का नाम
दिल्ली का फिरोजशाह कोटला (अब अरुण जेटली स्टेडियम) कई खिलाड़ियों के लिए करियर-डिफाइनिंग ग्राउंड रहा है। अब जॉन कैंपबेल भी उस खास सूची में शामिल हो गए हैं, जहां पर दिग्गज जैसे सर विव रिचर्ड्स और कपिल देव ने भी अपना पहला टेस्ट शतक बनाया था।
दिल्ली के इस मैदान पर अब तक कुल 17 खिलाड़ियों ने अपना पहला टेस्ट शतक बनाया है, जिनमें से 6 वेस्टइंडीज बल्लेबाज रहे हैं। यह आंकड़ा दिखाता है कि यह मैदान विदेशी बल्लेबाजों के लिए हमेशा खास रहा है।
शतक पूरा करने का अंदाज़ भी रहा खास
जॉन कैंपबेल ने अपना शतक छक्के से पूरा किया, और इसी के साथ वे उन वेस्टइंडीज बल्लेबाजों की एलीट सूची में शामिल हो गए जिन्होंने अपने करियर का पहला टेस्ट शतक छक्के से पूरा किया। इस सूची में कोलिन्स किंग, रॉबर्ट सैमुअल्स, रिडले जैकब्स और शेन डॉरिक जैसे नाम पहले से शामिल हैं।
दिलचस्प बात यह भी है कि कैंपबेल को ओपनर के रूप में यह शतक लगाने में 48 पारियां लगीं, जो वेस्टइंडीज के लिए दूसरा सबसे लंबा इंतज़ार है। पहले स्थान पर ट्रेवर गॉडर्ड हैं, जिन्हें शतक लगाने में 58 पारियां लगी थीं।
भारत के खिलाफ वेस्टइंडीज का नया संघर्ष
हालांकि, भारत इस सीरीज़ में मजबूत स्थिति में है, लेकिन वेस्टइंडीज ने इस मैच में दिखा दिया कि वे बिना लड़े हार मानने वाली टीम नहीं हैं। कैंपबेल की पारी ने टीम को आत्मविश्वास दिया है, खासतौर पर युवा खिलाड़ियों को यह भरोसा कि वे दुनिया की सर्वश्रेष्ठ गेंदबाजी के खिलाफ टिक सकते हैं।
ब्रायन लारा ने हाल ही में कहा था कि वेस्टइंडीज क्रिकेट की सबसे बड़ी समस्या है खिलाड़ियों का विदेश लीग्स की ओर झुकाव, जो हमारे खिलाड़ियों को दूर ले जाते हैं। ऐसे में कैंपबेल जैसी पारी वेस्टइंडीज के टेस्ट भविष्य के लिए उम्मीद की नई किरण बनकर आई है।
जॉन कैंपबेल का यह शतक सिर्फ एक व्यक्तिगत उपलब्धि नहीं, बल्कि वेस्टइंडीज क्रिकेट के लिए एक भावनात्मक पल भी है। 23 साल बाद भारत में किसी वेस्टइंडीज ओपनर का शतक लगना इस बात का प्रमाण है कि जुझारूपन और लगन अब भी कैरेबियाई क्रिकेट की पहचान हैं।
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