बांग्लादेश क्रिकेट टीम के सलामी बल्लेबाज़ लिटन दास को हाल ही में टी20 टीम की कप्तानी सौंपी गई है। यह फैसला उस समय लिया गया जब नजमुल हुसैन शंटो ने वर्कलोड मैनेजमेंट के चलते टी20 कप्तानी छोड़ दी। हालांकि, लिटन का हालिया प्रदर्शन और कुछ विवादों को देखते हुए इस फैसले पर कई सवाल खड़े हो रहे हैं। लेकिन टीम के सीनियर असिस्टेंट कोच मोहम्मद सलाहउद्दीन का मानना है कि लिटन को न केवल समर्थन बल्कि समय भी मिलना चाहिए ताकि वे एक बेहतर लीडर बन सकें।
खराब फॉर्म के बावजूद कप्तानी की जिम्मेदारी
लिटन दास ने पिछले एक साल में टी20 फॉर्मेट में 16 मैचों में केवल 242 रन बनाए हैं और सिर्फ एक अर्धशतक लगाया है। वेस्टइंडीज के खिलाफ दिसंबर में हुई टी20 सीरीज़ में भी वे 0, 3 और 14 के स्कोर पर आउट हुए, हालांकि बांग्लादेश ने वह सीरीज़ जीत ली थी। इसके अलावा, पिछले वर्ल्ड कप के दौरान मैदान से बाहर के विवाद और चैंपियंस ट्रॉफी की टीम से बाहर होना भी उनके खिलाफ माहौल बना गया।
“बाहर से कप्तानी आसान लगती है” – सलाहउद्दीन
इन तमाम आलोचनाओं के बीच कोच सलाहउद्दीन ने जोर देकर कहा कि कप्तानी करना आसान नहीं होता, खासकर बांग्लादेश जैसी टीम का।
ढाका के शेर-ए-बांग्ला नेशनल स्टेडियम में मीडिया से बात करते हुए उन्होंने कहा, “आपको कुछ चेहरे पसंद न हों या आप गुस्से में हों, लेकिन कप्तानी करना बाहर से जितना आसान दिखता है, उतना होता नहीं है। यह बहुत कठिन काम है और इसके लिए सबका समर्थन ज़रूरी है।”
लिटन में है रणनीति और नेतृत्व की समझ
सलाहउद्दीन ने कहा कि लिटन में नेतृत्व की स्वाभाविक क्षमता है और वह रणनीतिक फैसले लेने में भी सक्षम हैं।
उन्होंने कहा, “लिटन में वो गुण हैं जो किसी टीम को प्रेरित करने और रणनीतिक दिशा देने के लिए चाहिए। वह इसमें अच्छा है।”
कोच ने आगे यह भी कहा कि किसी को कप्तान बनाते ही उससे तत्काल सफलता की उम्मीद करना गलत है। उन्होंने कहा, “लीडर बनने में समय लगता है। यह एक स्वाभाविक प्रक्रिया है। अगर हम कप्तान को अपनी योजना के अनुसार काम ही नहीं करने देंगे, तो फिर उसे कप्तान बनाने का क्या मतलब?”
आलोचना के बीच संतुलन और समर्थन की ज़रूरत
लिटन पर अक्सर यह आरोप लगता है कि वे टीम या मीडिया से ज़्यादा संवाद नहीं करते। इस पर सलाहउद्दीन ने शाकिब अल हसन का उदाहरण देते हुए कहा, “हम लिटन को हमेशा थोड़ा अलग नजरिए से देखते हैं, शायद इसलिए कि वो आपसे (मीडिया) ज्यादा बातचीत नहीं करता। लेकिन हर इंसान को बेहतर बनने का मौका मिलना चाहिए, चाहे वो कप्तान हो, बल्लेबाज़ हो या एक व्यक्ति के तौर पर।”
सलाहउद्दीन ने अंत में कहा कि कप्तानी सिर्फ शोहरत का नाम नहीं, बल्कि इसके साथ आलोचना भी आती है। उन्होंने कहा, “जब मैं इस कुर्सी पर बैठता हूँ, तो नाम और शोहरत तो साथ आता ही है, लेकिन आलोचना भी उसी पैकेज का हिस्सा होती है।”
UAE के खिलाफ सीरीज़ से होगी लिटन की असली परीक्षा
लिटन दास की कप्तानी की शुरुआत UAE के खिलाफ दो मैचों की टी20 सीरीज़ से होगी। यह देखना दिलचस्प होगा कि टीम और फैंस उन्हें कितना समर्थन देते हैं और क्या वह कप्तानी की इस नई भूमिका में खुद को साबित कर पाएंगे।
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