भारत और पाकिस्तान दो पड़ोसी देश हैं। जिसमें काफी समानताएं तो हैं लेकिन दोनों के रास्ते बिल्कुल अलग हैं। जिसके चलते आज दोनों देशों के बीच बहुत अंतर देखने को मिलता है।
हालाँकि क्रिकेट आज भी ऐसी चीज है जिसमें भारतीय टीम अपने पड़ोसी मुल्क से बहुत आगे है। दोनों देशों की मेंटलिटी में काफी फर्क है। फिर भी क्रिकेट में काफी कॉम्पीटीशन देखने को मिलता है और कप्तान बनना तो बहुत ही मुश्किल होता है। हालाँकि एक खिलाड़ी ऐसा भी है जिसने भारत और पाकिस्तान की कप्तानी संभाली है।
अब्दुल कारदार ने भारत-पाकिस्तान के लिए टेस्ट खेला

भारत और पाकिस्तान के बीच क्रिकेट मुकाबलों का इतिहास बहुत पुराना और रोमांच से भरा हुआ है। दोनों देशों के बीच पहला टेस्ट मैच 1952 में दिल्ली में खेला गया था, जिसने एक नई क्रिकेट राइवलरी की नींव रखी थी। इस ऐतिहासिक मैच में पाकिस्तान की कप्तानी अब्दुल हफीज़ कारदार ने की थी, जो क्रिकेट इतिहास की एक बेहद दिलचस्प शख्सियत माने जाते हैं।
बता दें कि ये पाकिस्तान का अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट में पहला मैच था आपको जानकर हैरानी होगी कि अब्दुल हफीज़ कारदार केवल पाकिस्तान ही नहीं, बल्कि भारत की राष्ट्रीय टीम का भी हिस्सा रह चुके थे। बंटवारे से पहले वे भारतीय टीम के लिए टेस्ट क्रिकेट खेल चुके थे।
भारत के लिए भी खेल चुके थे कारदार
17 जनवरी 1925 को जन्मे अब्दुल हफीज़ कारदार ने 1946 में इंग्लैंड दौरे पर भारत की ओर से तीन टेस्ट मैच खेले थे। इसके बाद 1947 में जब भारत और पाकिस्तान के बीच बंटवारा हुआ, तो वे पाकिस्तान में बस गए और वहीं से अपने क्रिकेट करियर को आगे बढ़ाया।
पाकिस्तान टीम के पहले टेस्ट कप्तान
बंटवारे के बाद कारदार को पाकिस्तान की टेस्ट टीम का कप्तान नियुक्त किया गया। उन्होंने पाकिस्तान के लिए कुल 23 टेस्ट मैचों में हिस्सा लिया और 1958 में वेस्टइंडीज के खिलाफ अपना अंतिम अंतरराष्ट्रीय मुकाबला खेला।
अपने कुल 26 टेस्ट मैचों के करियर में कारदार ने 23.76 की औसत से 927 रन बनाए और गेंदबाजी में भी 21 विकेट अपने नाम किए। भारत की ओर से खेलते हुए उन्होंने 80 रन बनाए थे, जबकि पाकिस्तान के लिए उन्होंने 847 रन बनाए, जिसमें 5 अर्धशतक शामिल थे। गेंदबाजी में उन्होंने सभी 21 विकेट पाकिस्तान की टीम के लिए लिए थे।
अफ्रीका को छोड़कर सभी देशों के खिलाफ जीते मुकाबले
अब्दुल हफीज़ कारदार काफी सफल कप्तान थे। उन्होंने भले ही 23 टेस्ट मैचों में कप्तानी की हो लेकिन उस दौरान उनकी कप्तानी में टीम ने टेस्ट खेलने वाले लगभग सभी देशों के खिलाफ जीत दर्ज की थी। हालाँकि साउथ अफ्रीका के खिलाफ जीत नहीं मिल पाई थी।
क्रिकेट से लेकर राजनीति तक का सफर
क्रिकेट से संन्यास लेने के बाद भी अब्दुल हफीज़ कारदार का खेल से जुड़ाव बना रहा। उसके बाद वे पाकिस्तान टीम के चीफ सेलेक्टर बने और फिर 1972 से 1977 तक पाकिस्तान क्रिकेट बोर्ड (PCB) के अध्यक्ष भी बने।
क्रिकेट के अलावा कारदार ने राजनीति में भी सक्रिय भागीदारी निभाई। वे 1970 में पाकिस्तान पीपुल्स पार्टी (PPP) के टिकट पर पंजाब की प्रांतीय विधानसभा के सदस्य चुने गए थे। यहीं नहीं, आखिरी बार उन्हें स्विट्ज़रलैंड में पाकिस्तान का एम्बेस्डर बनाकर भेजा गया था। उन्होंने पाकिस्तान क्रिकेट टीम को आगे ले जाने में काफी अहम भूमिका निभाई थी।







