Tuesday, June 16

1987 में जब भारत में विश्व कप खेला जा रहा था, उस वक्त तेंदुलकर उम्र मात्र 14 साल थी। इस वक्त सचिन का चयन मुंबई की रणजी टीम के लिए नहीं हुआ था, लेकिन वे क्रिकेट में बहुत मेहनत कर रहे थे। वर्ल्ड कप के दौरान वानखेड़े स्टेडियम में होने वाले मैचों में तेंदुलकर को ‘बॉल बॉय’ बनने का मौका दिया। इसलिए सचिन के बहुत से किस्सों में ये किस्सा भी महत्वपूर्ण हैं।

सचिन तेंदुलकर को बॉल बॉय बनाने का मौका कब और कैसे मिला

Sachin Tendulkar's journey from being a ball boy to becoming a great batsman?
Sachin Tendulkar

मुंबई क्रिकेट एसोसिएशन सचिन को वानखेड़े स्टेडियम में होने वाले मैचों में बॉल बॉय बनने का मौका दिया। उस दौरान भारत और इंग्लैंड के बीच सेमीफाइनल मैच हुआ था। सचिन और उनके जैसे कई युवा खिलाड़ी ग्राउंड के चारों ओर बाउंड्री के पास बैठे रहते और जब गेंद बाउंड्री पार कर जाती, तो दौड़कर गेंद उठाकर वापस फील्ड में फेकने का काम बॉल बॉय का होता था।

सचिन तेंदुलकर ने एक इंटरव्यू में कहा था, “मुझे याद है 1987 में, मैं एक बॉल बॉय था। दुनिया के सभी दिग्गज़ खिलाड़ियों के साथ कमरे में मौजूद होना एक अविश्वसनीय अनुभव था। मैंने किसी से ज़्यादा बात नहीं की। लेकिन उन्हें करीब से देखना बहुत ख़ास पल था।

सचिन तेंदुलकर ने बॉल बॉय रहते हुए सीखा दिग्गज खिलाड़ियों से दबाव में प्रदर्शन करने का हुनर

सचिन ने बॉल बॉय के किस्से को याद करते हुए कहा कि गावस्कर, कपिल देव और अन्य खिलाड़ियों को नज़दीक से देखने का अनुभव कभी नहीं भूल पाए। उनके लिए उनके खेलने के तरीके से उन्हें बहुत कुछ सिखने को मिला। ‘बॉल बॉय’ के रूप में काम करते हुए वो सोचते थे कि वो एक खुद भारत के लिए विश्व कप खेलेंगे और उनके मेहनत और संघर्ष के बदौलत ठीक ऐसा ही हुआ। 4 साल बाद (1989) वे भारतीय टीम के लिए इंटरनेशनल क्रिकेट खेलने लगे, और 2011 में उन्होंने वर्ल्ड कप जीतकर अपना बचपन का सपना पूरा किया। सचिन कितनी बार ये कहते हुए सुना गया है कि “बॉल बॉय रहते हुए मैंने मैदान पर खिलाड़ियों का जुनून और दबाव बहुत करीब से देखा।

बॉल बॉय से दुनिया के महान क्रिकेटर बनाने तक सफ़र 

Sachin Tendulkar's journey from being a ball boy to becoming a great batsman?
Sachin Tendulkar

सचिन तेंदुलकर वह क्रिकेटर है जिसका नाम भारत के हर लोगो के जुबान पर है जिसने क्रिकेट में हजारों कीर्तिमान बनाए है। लेकिन उनकी महानता इस बात में नहीं है कि वे सर्वश्रेष्ठ हैं एक अच्छा खिलाड़ी न केवल अपने खेल में उत्कृष्टता हासिल करता है, बल्कि वह अन्य खिलाड़ियों को भी प्रेरित करता है और अपने खेल को आगे बढ़ाने में योगदान देता है। बहुत से खिलाड़ियों के रोलमॉडल हैं तेंदुलकर ।

सचिन तेंदुलकर ने भारतीय टीम के लिए 463 वनडे मैच, 200 टेस्ट मैच और एक टी20 मैच खेलते हुए 34,357 रन रन बना चुके हैं जिसमे 100 शतक और 164 अर्धशतक शामिल हैं इन तीनो फॉर्मेट में इनका सर्वश्रेष्ट व्यक्तिगत स्कोर नाबाद 248 हैं। लेकिन उनकी असली उपलब्धि यह है कि उन्होंने भारतीय क्रिकेट को नई ऊँचाइयों पर पहुँचाया। तेंदुलकर को ‘मास्टर ब्लास्टर’ के नाम से भी जानते जानते हैं

सचिन तेंदुलकर को कौन कौन से अवॉर्ड मिले है जानते हैं उनके नाम 

Sachin Tendulkar's journey from being a ball boy to becoming a great batsman
Sachin Tendulkar

सचिन को 1994 में अर्जुन पुरस्कार, 1997 में खेल रत्न, 1998 में पद्म श्री और पद्म विभूषण (2008) सम्मान से सम्मानित किया गया है। वह 2013 में भारत रत्न से सम्मानित होने वाले एकमात्र खिलाड़ी हैं। क्रिकेट से संन्यास लेने के बाद से, उन्होंने अपनी आत्मकथा ‘प्लेइंग इट माई वे’ नाम से प्रकाशित कराई है, जो युवावों को क्रिकेट के तकनीक और शॉट सिलेक्शन को सीखने में मदद करेगा।

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मैं हिंदी कंटेंट राइटर, SEO एक्सपर्ट और डिजिटल मीडिया स्पेशलिस्ट हूं। मुझे फीचर राइटिंग और सोशल मीडिया कंटेंट प्रोडक्शन में काफी दिलचस्पी है। मैंने सेंट्रल यूनिवर्सिटी ऑफ हिमाचल प्रदेश से एम.ए. इन जर्नलिज्म एंड न्यू मीडिया की पढ़ाई की है। अपने करियर की शुरुआत सिद्धिविनायक टाइम्स में जूनियर हिंदी कंटेंट राइटर के रूप में की और वर्तमान में ABC वर्ल्ड मीडिया में स्पोर्ट्स और गेमिंग कंटेंट राइटर के पद पर कार्यरत हूं।

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