पाकिस्तान के पूर्व क्रिकेटर शाहिद अफरीदी एक बार फिर विवादों में घिर गए हैं। हाल ही में एक पाकिस्तानी टीवी शो के दौरान अफरीदी ने दावा किया कि उन्होंने अपनी बेटी को टीवी पर ‘आरती’ करते देखा, जिससे नाराज होकर उन्होंने गुस्से में टीवी ही तोड़ दिया। इस बयान के सामने आने के बाद सोशल मीडिया पर जमकर विरोध हो रहा है। भारत में बड़ी संख्या में लोग इसे हिंदू धर्म का अपमान मान रहे हैं।
भारतीय सेना को लेकर दिया भड़काऊ बयान

यह पहला मौका नहीं है जब अफरीदी ने विवादित बयान दिया हो। इससे पहले उन्होंने भारतीय सेना को “निकम्मा और नालायक” कहकर अपमानित किया था। उनका आरोप था कि भारत खुद ही अपने लोगों को मरवाकर पाकिस्तान पर दोष डालता है। इस बयान ने देशभक्त भारतीयों में गुस्सा भर दिया।
पीएम मोदी पर साधा निशाना

शाहिद अफरीदी ने भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के खिलाफ भी आपत्तिजनक टिप्पणी की थी। उन्होंने कहा था कि, मोदी से पाकिस्तान को किसी भी भलाई की उम्मीद नहीं की जा सकती। इस तरह के बयान भारत-पाक रिश्तों में और भी तल्खी ला रहे हैं।
आतंकवादी यासीन मलिक के पक्ष में की अपील
अफरीदी ने एक कदम और आगे बढ़ते हुए संयुक्त राष्ट्र से कश्मीरी अलगाववादी यासीन मलिक की रिहाई की मांग की थी। जबकि यासीन मलिक ने खुद अदालत में अपने अपराध स्वीकार किए हैं। एक अंतरराष्ट्रीय क्रिकेटर द्वारा आतंकियों के समर्थन में बोलना न सिर्फ शर्मनाक है, बल्कि अंतरराष्ट्रीय छवि को भी नुकसान पहुंचाने वाला है।
भारत विरोधी मार्च में ली भागीदारी
अफरीदी इससे पहले भारत के खिलाफ निकाले गए एक मार्च में भी शामिल हो चुके हैं, जहां उन्होंने भारत के खिलाफ जमकर भड़काऊ भाषण दिए। ऐसे में सवाल उठता है कि क्या एक खिलाड़ी का काम नफरत फैलाना है या लोगों को जोड़ना?
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