सुप्रीम कोर्ट ने स्पष्ट किया है कि अनुराग ठाकुर पर लगा BCCI प्रतिबंध आजीवन नहीं था और अब वह बोर्ड में भूमिका निभा सकते हैं।
भारतीय क्रिकेट प्रशासन से जुड़ी एक अहम खबर सामने आई है। सुप्रीम कोर्ट ने पूर्व BCCI अध्यक्ष अनुराग ठाकुर पर साल 2017 में लगाया गया प्रतिबंध हटा दिया है। इस फैसले के बाद अब उनके लिए दोबारा BCCI में किसी भी पद को संभालने का रास्ता खुल गया है।
करीब नौ साल बाद आया यह फैसला ऐसे समय में आया है, जब भारत टी20 वर्ल्ड कप 2026 की मेजबानी की तैयारी कर रहा है। ऐसे में यह निर्णय क्रिकेट प्रशासन के लिहाज से भी काफी अहम माना जा रहा है।
सुप्रीम कोर्ट ने क्या कहा
सुप्रीम कोर्ट ने अपने फैसले में साफ कहा कि अनुराग ठाकुर पर लगाया गया प्रतिबंध आजीवन नहीं हो सकता। अदालत ने आनुपातिकता के सिद्धांत को लागू करते हुए माना कि इतनी लंबी सजा उचित नहीं है।
कोर्ट ने यह भी स्पष्ट किया कि अनुराग ठाकुर अब BCCI के नियमों और संविधान के अनुसार बोर्ड की गतिविधियों में हिस्सा ले सकते हैं। इससे पहले उन्होंने बिना किसी शर्त के अदालत से माफी भी मांगी थी।
2017 में क्यों हटाए गए थे अनुराग ठाकुर
जनवरी 2017 में अनुराग ठाकुर को BCCI अध्यक्ष पद से हटा दिया गया था। उस समय वह भारत के 33वें BCCI अध्यक्ष थे। उनके साथ तत्कालीन BCCI सचिव अजय शिर्के को भी पद से हटाया गया था।
यह कार्रवाई लोढ़ा कमेटी की सिफारिशों को लागू न करने के कारण की गई थी। सुप्रीम कोर्ट ने जुलाई 2016 में BCCI को इन सुधारों को लागू करने का आदेश दिया था, लेकिन पालन न होने पर कोर्ट ने दोनों अधिकारियों को तुरंत सभी कार्यों से अलग करने का निर्देश दिया।
लोढ़ा कमेटी ने की थी ये प्रमुख सिफारिशें
लोढ़ा कमेटी ने जनवरी 2015 में BCCI में सुधार के लिए कई अहम सिफारिशें दी थीं। इनमें सबसे प्रमुख यह था कि कोई भी पदाधिकारी 70 वर्ष से अधिक उम्र का नहीं होना चाहिए और वह किसी सरकारी पद या मंत्री पद पर नहीं होना चाहिए।
इसके अलावा, किसी भी अधिकारी के लिए लगातार केवल दो कार्यकाल तय किए गए। हर राज्य को एक वोट देने की नीति, IPL के लिए स्वतंत्र संचालन निकाय और BCCI अधिकारियों द्वारा संपत्ति का खुलासा भी इन सुधारों का हिस्सा था। इन नियमों के उल्लंघन के चलते ही अनुराग ठाकुर को क्रिकेट प्रशासन से बाहर रहना पड़ा।
क्रिकेट प्रशासन में अनुराग ठाकुर का सफर
राजनीति में पूरी तरह सक्रिय होने से पहले अनुराग ठाकुर का क्रिकेट प्रशासन से गहरा जुड़ाव रहा है। साल 2000 में वह हिमाचल प्रदेश क्रिकेट एसोसिएशन के अध्यक्ष बने। उनके कार्यकाल में राज्य में पांच क्रिकेट स्टेडियम विकसित किए गए, जिनमें धर्मशाला स्टेडियम सबसे प्रसिद्ध है।
HPCA में चार लगातार कार्यकाल पूरे करने के बाद वह 2011 में BCCI में जॉइंट सेक्रेटरी बने। 2015 में उन्हें बोर्ड का सचिव बनाया गया और 2016 में वह 41 साल की उम्र में BCCI अध्यक्ष बने।
खिलाड़ी के रूप में भी रहा अनुभव
प्रशासक बनने से पहले अनुराग ठाकुर एक सक्रिय क्रिकेटर भी रहे हैं। उन्होंने साल 2000 में हिमाचल प्रदेश के लिए घरेलू क्रिकेट में डेब्यू किया था। जम्मू कश्मीर के खिलाफ अपने पहले मैच में उन्होंने गेंदबाजी में दो विकेट भी लिए थे। हालांकि, उनका क्रिकेट करियर लंबा नहीं रहा, लेकिन खेल की समझ ने उनके प्रशासनिक फैसलों में अहम भूमिका निभाई।
राजनीति और सरकार में भूमिका
BCCI से हटने के बाद अनुराग ठाकुर ने राजनीति में अपनी भूमिका मजबूत की। वह मई 2019 से जुलाई 2021 तक वित्त मंत्रालय में राज्य मंत्री रहे। इसके बाद जुलाई 2021 से जून 2024 तक उन्होंने केंद्रीय युवा और खेल मंत्री का पद संभाला। इसके बाद वह 2024 के लोकसभा चुनाव में वह एक बार फिर हमीरपुर सीट से सांसद चुने गए।
BCCI नेतृत्व और आगे की तस्वीर
अनुराग ठाकुर के बाद सौरव गांगुली और फिर रोजर बिन्नी ने BCCI की कमान संभाली और वर्तमान समय में मिथुन मन्हास इसके अध्यक्ष हैं। इस दौरान सचिव के रूप में जय शाह ने लंबा कार्यकाल निभाया और बाद में वह ICC चेयरमैन बने।
अब सुप्रीम कोर्ट के इस फैसले के बाद यह देखना दिलचस्प होगा कि अनुराग ठाकुर किस भूमिका में भारतीय क्रिकेट प्रशासन में दोबारा एंट्री करते हैं।
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