Friday, February 20

Historic Milestones and Memories of Women’s Cricket World Cup: महिला क्रिकेट वर्ल्ड कप का 13वां संस्करण 30 सितंबर 2025 से शुरू हो चुका है। यह टूर्नामेंट आज जिस मुकाम पर खड़ा है, वहां तक पहुंचने का सफर बेहद खास रहा है। एक समय था जब इसे इंग्लैंड के वॉल्वरहैम्पटन के एक छोटे से लिविंग रूम में सिर्फ एक विचार के रूप में सोचा गया था।

आज यही विचार करोड़ों दर्शकों का ध्यान खींचने वाला एक ग्लोबल टूर्नामेंट बन चुका है। इस यात्रा के दौरान महिला क्रिकेट ने कई ऐतिहासिक पल देखे हैं। आइए नजर डालते हैं उन 10 अहम उपलब्धियों और यादों पर, जिन्होंने वर्ल्ड कप के इतिहास को खास बनाया।

1. 1973 में पहला महिला वर्ल्ड कप का आयोजन

साल 1973 में पहला महिला क्रिकेट वर्ल्ड कप का आयोजन हुआ, जो पुरुष वर्ल्ड कप से दो साल पहले शुरू किया गया था। यह टूर्नामेंट इंग्लैंड की कप्तान रेचल हेहो फ्लिंट और व्यवसायी जैक हेवर्ड के सहयोग से संभव हो पाया। इसमें सात टीमों ने हिस्सा लिया, जिनमें एक यंग इंग्लैंड और एक इंटरनेशनल इलेवन भी शामिल थी।

इस टूर्नामेंट में सभी मैच 60-60 ओवरों के खेले गए थे और विजेता का फैसला अंक तालिका से हुआ था। अंतिम राउंड-रॉबिन मैच में इंग्लैंड की एनिड बेकवेल की 118 रनों की शानदार पारी ने टीम को ऑस्ट्रेलिया पर जीत दिलाई थी और इंग्लैंड महिला टीम ने पहला खिताब जीता था।

2. 1978 में भारत की एंट्री

साल 1978 में महिला क्रिकेट वर्ल्ड कप 2025 में भारतीय महिला टीम की एंट्री हुई। इस बार मेजबान भारत पहली बार वर्ल्ड कप में उतरा था। हैदराबाद के स्टेडियम में हजारों दर्शकों ने महिला क्रिकेट का रोमांच देखा। इस टूर्नामेंट के फाइनल मुकाबले में ऑस्ट्रेलिया ने इंग्लैंड को हराकर खिताब जीता था।

हालांकि, भले ही इस टूर्नामेंट में सिर्फ चार टीमें ऑस्ट्रेलिया, इंग्लैंड, न्यूजीलैंड और भारत खेल रही थीं, लेकिन इस आयोजन ने साबित कर दिया कि महिला क्रिकेट एशिया में भी पॉपुलैरिटी हासिल कर सकता है।

3. 1982 में पहली बार शुरू हुआ नॉकआउट और फाइनल

1982 में पहली बार वर्ल्ड कप में नॉकआउट फाइनल का फॉर्मेट अपनाया गया। मेजबान न्यूजीलैंड में खेले गए इस संस्करण में पांच टीमें शामिल हुईं। फाइनल में ऑस्ट्रेलिया और इंग्लैंड आमने-सामने थे। रोमांचक मुकाबले में ऑस्ट्रेलिया ने तीन विकेट से जीत दर्ज की और लगातार दूसरी बार ट्रॉफी अपने नाम की। इसी के साथ यह तय हो गया कि आगे से वर्ल्ड कप का नतीजा सीधे फाइनल से ही तय होगा।

4. ऑस्ट्रेलिया की बादशाहत और इंग्लैंड की वापसी (1988 और 1993)

1988 में ऑस्ट्रेलिया ने इंग्लैंड को हराकर लगातार तीसरा खिताब जीता, लेकिन 1993 में कहानी बदल गई। इंग्लैंड में हुए इस टूर्नामेंट में आठ टीमों ने भाग लिया। डेनमार्क और वेस्टइंडीज ने पहली बार हिस्सा लिया, जबकि नीदरलैंड और आयरलैंड भी शामिल हुए। फाइनल में इंग्लैंड ने लॉर्ड्स पर ऑस्ट्रेलिया को हराकर खिताब जीता और यह दिखाया कि वर्ल्ड कप में अब संतुलन आ रहा है।

5. 1997 में पहली बार 11 टीमों ने लिया हिस्सा

1997 का वर्ल्ड कप महिला क्रिकेट के इतिहास में एक बड़ा मोड़ था। इस बार 11 टीमों ने हिस्सा लिया, जिनमें पाकिस्तान, श्रीलंका और दक्षिण अफ्रीका पहली बार शामिल हुए। टूर्नामेंट में क्वार्टरफाइनल और सेमीफाइनल का फॉर्मेट अपनाया गया। फाइनल में ऑस्ट्रेलिया ने न्यूजीलैंड को हराकर खिताब जीता।

हालांकि, इस संस्करण की असली उपलब्धि टूर्नामेंट का इतना बड़ा विस्तार था, जिसने महिला क्रिकेट को सच्चे मायनों में वैश्विक मंच पर ला खड़ा किया।

6. 2000 में मेजबान न्यूजीलैंड को मिली जीत

2000 में न्यूजीलैंड ने आखिरकार अपना सपना पूरा किया। ऑकलैंड में हुए फाइनल में उन्होंने ऑस्ट्रेलिया को सिर्फ चार रन से हराकर पहली और अब तक की एकमात्र ट्रॉफी जीती। इसी टूर्नामेंट से महिला वर्ल्ड कप में 50 ओवर का फॉर्मेट अपनाया गया, जिससे यह पुरुष वर्ल्ड कप की तरह हो गया।

7. भारत की चमक और ऑस्ट्रेलिया की बादशाहत (2005 से 2013)

2005 में टूर्नामेंट पहली बार अफ्रीका पहुंचा। दक्षिण अफ्रीका में हुए इस संस्करण में भारत ने पहली बार फाइनल खेला, लेकिन करेन रोल्टन की नाबाद 107 रनों की पारी ने भारत को 98 रनों से हराकर तीसरी बार ऑस्ट्रेलिया को चैंपियन बना दिया। 2009 में इंग्लैंड ने अपने घरेलू मैदान पर ऑस्ट्रेलिया को हराकर खिताब जीता, जबकि 2013 में ऑस्ट्रेलिया ने मुंबई में वेस्टइंडीज को मात देकर एक बार फिर अपनी बादशाहत कायम कर ली।

8. 2017 में भारत और इंग्लैंड का क्लासिक फाइनल

2017 का लॉर्ड्स फाइनल शायद वर्ल्ड कप इतिहास का सबसे रोमांचक मुकाबला रहा। इस मुकाबले में इंग्लैंड और भारत आमने-सामने थे। भारत 229 रनों के लक्ष्य का पीछा करते हुए जीत के करीब था, लेकिन दबाव में टीम बिखर गई। इंग्लैंड की अन्या श्रब्सोल ने 46 रन देकर 6 विकेट लिए और भारत को हार का सामना करना पड़ा। यह मुकाबला दुनिया भर में 18 करोड़ से ज्यादा लोगों ने देखा और इसने महिला क्रिकेट को नई पहचान दिलाई।

9. 2022 में ऑस्ट्रेलिया का सातवां खिताब

2022 तक महिला वर्ल्ड कप पूरी तरह से ग्लोबल हो चुका था। इस बार बांग्लादेश ने पहली बार हिस्सा लिया था। इस टूर्नामेंट के फाइनल में ऑस्ट्रेलिया ने इंग्लैंड को हराया था। इस मुकाबले की सबसे बड़ी स्टार बनीं एलिसा हीली, जिन्होंने 170 रनों की ऐतिहासिक पारी खेली और महिला या पुरुष किसी भी वर्ल्ड कप फाइनल का सबसे बड़ा व्यक्तिगत स्कोर बनाया। इसी जीत के साथ ऑस्ट्रेलिया ने अपना सातवां खिताब हासिल किया।

10. भारत और श्रीलंका कर रहे हैं महिला क्रिकेट वर्ल्ड कप 2025 की संयुक्त मेजबानी

2025 का वर्ल्ड कप भारत और श्रीलंका में हो रहा है। यह पहली बार है जब दोनों देश मिलकर टूर्नामेंट की मेजबानी कर रहे हैं। इस टूर्नामेंट में ऑस्ट्रेलिया अपने खिताब का बचाव कर रहा है, जबकि भारत घरेलू परिस्थितियों में पहली बार वर्ल्ड कप जीतने की कोशिश करेगा। इंग्लैंड अपनी टीम को नए सिरे से तैयार कर रहा है और दक्षिण अफ्रीका भी दमदार लय में है। ऐसे में इस बार का टूर्नामेंट बेहद रोमांचक और अनिश्चित नतीजों वाला साबित हो सकता है।

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Neetish Kumar Mishra Sports Digest Hindi में Editor के रूप में कार्यरत हैं और खेल पत्रकारिता में गहरा अनुभव रखते हैं। क्रिकेट, टेनिस, फुटबॉल और अन्य खेलों की बारीकियों पर उनकी पकड़ बेहद मजबूत है।

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