वॉशिंगटन सुंदर ने कहा कि वह टीम की जरूरत के अनुसार किसी भी स्थान पर बल्लेबाजी करने के लिए हमेशा तैयार रहते हैं और उन्हें अलग भूमिकाएं निभाने में मजा आता है।
भारतीय ऑलराउंडर वॉशिंगटन सुंदर ने पहली बार टेस्ट टीम में लगातार बदलती बैटिंग पोजीशन पर अपनी राय सामने रखी और साफ कहा कि वह टीम की जरूरत के अनुसार जहां भी भेजा जाएगा, वहीं बल्लेबाजी करने के लिए हमेशा खुश रहते हैं। पूरी सीरीज में उनकी पोजीशन बदलती रही, जहां वह पहले टेस्ट में नंबर तीन पर खेले और फिर दूसरे टेस्ट में उन्हें नंबर आठ पर भेजा गया।
इसके बावजूद उन्होंने धैर्य, समझदारी और तकनीक दिखाते हुए दोनों टेस्ट में लंबी पारी खेली और मुश्किल पिचों पर भी संयम बनाए रखा। टीम में यह बदलाव शुभमन गिल की गर्दन की चोट के कारण हुआ, जिसकी वजह से कप्तान बाहर हो गए और भारत को बैटिंग ऑर्डर में नए विकल्प तलाशने पड़े।
पहले टेस्ट में ठहराव, दूसरे टेस्ट में निचले क्रम में संघर्ष
कोलकाता टेस्ट की पहली पारी में उन्होंने 82 गेंदों का सामना किया और दूसरी पारी में 92 गेंदें खेलीं, जिससे पता चलता है कि वह टॉप ऑर्डर में बल्लेबाजी जैसी जिम्मेदारी निभाने में सक्षम हैं।
इसके बाद गुवाहाटी टेस्ट में उन्हें निचले क्रम में भेजा गया, जहां उन्होंने 48 रन बनाए और कुलदीप यादव के साथ 72 रन की अहम साझेदारी की, जिससे भारत ने मैच में वापसी की कोशिश की लेकिन इतने प्रयास से भी मैच की दिशा बदली नहीं जा सकी।
यह बदलाव इसलिए भी अहम था, क्योंकि पिछले सात टेस्ट में सुंदर कभी पांच, कभी सात, कभी नौ और कभी तीन नंबर पर भेजे गए हैं, जो किसी भी बल्लेबाज के लिए चुनौतीपूर्ण हो सकता है, लेकिन उन्होंने कहा कि उन्हें इससे कोई असुविधा नहीं होती और वह हर परिस्थिति में योगदान देने के लिए तैयार रहते हैं।
टीम के लिए भूमिका निभाना ही असली खुशी
सुंदर ने प्रेस कॉन्फ्रेंस में साफ कहा कि उन्हें जहां भी टीम भेजती है, वह वहीं खेलने के लिए तैयार रहते हैं और यही बात उन्हें प्रेरणा देती है। उन्होंने यह भी बताया कि अलग-अलग परिस्थितियों में बल्लेबाजी करना उन्हें रोमांचित करता है, क्योंकि इससे उन्हें कई भूमिकाएं निभाने का मौका मिलता है, जो हर खिलाड़ी को नहीं मिलता।
उन्होंने यह भी कहा कि वह हर मौके को चुनौती की तरह लेते हैं और टीम के लिए सही समय पर सही प्रदर्शन करना ही उनकी प्राथमिकता है, इसलिए वह किसी भी बदलाव से प्रभावित नहीं होते और मानसिक रूप से पूरी तरह तैयार रहते हैं।
पंत की शॉट चयन पर भी दिया संतुलित जवाब
जब उनसे ऋषभ पंत के शॉट और आउट होने के तरीके पर सवाल पूछा गया तो उन्होंने बहुत संयमित जवाब दिया और कहा कि कई बार यही गेंदें बाउंड्री के पार जातीं तो सभी तारीफ करते, इसलिए खिलाड़ियों को अपने स्किल और प्लान पर भरोसा करना चाहिए।
उनका मानना है कि हर परिस्थिति में परफेक्ट नतीजा नहीं मिलता, लेकिन खेल इसी भावना पर चलता है, जहां आत्मविश्वास सबसे बड़ी ताकत बन जाता है।
पिच को लेकर भी दिया स्पष्ट नजरिया
मार्को यांसिन द्वारा असामान्य उछाल मिलने के बाद जब पिच को लेकर सवाल उठे तो सुंदर ने कहा कि विकेट बिल्कुल सामान्य था और इसमें कुछ भी असामान्य नहीं था।
उन्होंने कहा कि यांसिन की ऊंचाई की वजह से बाउंस ज्यादा दिखा, लेकिन भारत ने ऐसे गेंदबाजों का सामना पहले भी किया है और किसी और दिन यही गेंदें बेहतर तरीके से खेली जा सकती थीं।
उनका मानना है कि इस पिच पर समय बिताया जाए तो रन बनाए जा सकते थे और इसे खराब विकेट कहना सही नहीं होगा।
सीरीज स्थिति पर भी दिखाई सकारात्मक सोच
भारत के श्रृंखला हार की कगार पर होने के बावजूद सुंदर ने कहा कि जीवन की तरह क्रिकेट में भी सकारात्मक रहना चाहिए, क्योंकि कब क्या बदल जाए यह कोई नहीं जानता। पूरे संवाद के दौरान वह शांत, धैर्यवान और स्पष्ट सोच के साथ नजर आए, जिससे पता चलता है कि वह टीम के भीतर अपनी भूमिका को लेकर पूरी तरह सहज हैं और आगे और बेहतर प्रदर्शन करने के लिए प्रेरित भी।
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