FIFA World Cup 2026: फुटबॉल विश्व कप 2026 के भारत में ब्रॉडकास्ट राइट्स अभी तक नहीं बिके हैं। इसकी वजह ऊंची कीमत, कम विज्ञापन रिटर्न और मैचों की असुविधाजनक टाइमिंग को बताया गया है। क्यूंकि इस समय जियोस्टार और सोनी जैसे बड़े ब्रॉडकास्टर्स फिलहाल इंतजार की रणनीति को अपना रहे हैं। लेकिन फिर अब पूरी उम्मीद है कि इस टूर्नामेंट से पहले कोई न कोई डील जरूर हो जाएगी।
फीफा विश्व कप 2026 को शुरू होने में अब 49 दिन का ही समय शेष रह गया है। लेकिन अब इस बड़े टूर्नामेंट के करीब आते ही दुनिया भर के फुटबॉल फैंस की उत्सुकता बढ़ती जा रही है। वहीं भारत में इस खेल को लेकर एक बड़ा सवाल अभी तक भी नहीं सुलझा है। क्यूंकि अब मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक इस मेगा इवेंट के ब्रॉडकास्ट राइट्स यानी प्रसारण अधिकार आखिर अब तक क्यों नहीं बिक पाए हैं।

इसके अलावा इतने बड़े टूर्नामेंट के लिए सभी टीवी और डिजिटल अधिकारों को लेकर कड़ी प्रतिस्पर्धा देखने को मिलती है। लेकिन इस बार हालात इससे थोड़े अलग नजर आ रहे हैं। वहीं इस बार फीफा विश्व कप का आगाज 11 जून से होने जा रहा है। जबकि इस फुटबॉल टूर्नामेंट के इतिहास में अबकी बार सबसे ज्यादा 48 टीमें हिस्सा ले रही हैं और यह अमेरिका, कनाडा और मैक्सिको की मेजबानी में खेला जाने वाला है। इसके अलावा इस टूर्नामेंट का फाइनल मैच 19 जुलाई को खेला जाएगा।
भारतीय फैंस के लिए है काफी चिंता की बात :-
इसके अलावा भारत देश में फुटबॉल की लोकप्रियता पिछले कुछ वर्षों में काफी तेजी से बढ़ी हैं। क्यूंकि इस बीच यूरोपीय लीग्स से लेकर वर्ल्ड कप तक यहां पर दर्शकों की संख्या लगातार बढ़ी है। वहीं ऐसे में जब फीफा वर्ल्ड कप जैसे प्रतिष्ठित टूर्नामेंट के प्रसारण को लेकर अनिश्चितता बनी हुई है तो यह भारतीय फुटबॉल समुदाय के लिए चिंता का विषय बन गया है।

अब इस मौजूदा स्थिति ने उस दौर की याद भी दिला दी है जब इंडियन सुपर लीग के आयोजन को लेकर भी असमंजस पैदा हो गया था। इसके चलते हुए अब भारत में फुटबॉल कल्चर को बड़ा झटका लगा था। लेकिन अगर इस बार भी ब्रॉडकास्ट डील समय पर नहीं होती है तो यह खेल के प्रचार-प्रसार पर असर डाल सकता है।
आइए जानें आखिर क्यों अटकी हुई है डील :-
इसके अलावा इस पूरे मामले की जड़ में सबसे बड़ा कारण है ब्रॉडकास्टिंग राइट्स की ऊंची कीमत का होना। वहीं इन रिपोर्ट्स के मुताबिक फीफा ने भारत के लिए जो कीमत तय की है, वह स्थानीय ब्रॉडकास्टर्स की अपेक्षाओं से काफी ज्यादा है। लेकिन अब फीफा ने ब्रॉडकास्टिंग राइट्स की कीमत में भारी कटौती करते हुए लगभग 100 मिलियन डॉलर से घटाकर करीब 35-40 मिलियन डॉलर कर दिया है।

इसके अलावा अब फिर कोई भी ब्रॉडकास्टर डील के लिए आगे नहीं आया है। जबकि सोनी स्पोर्ट्स नेटवर्क और जियोस्टार जैसे बड़े खिलाड़ी इस रेस में जरूर हैं लेकिन वे सभी फिलहाल चुप्पी साधे हुए हैं। तभी तो इससे साफ है कि कम रिटर्न ऑन इन्वेस्टमेंट, क्रिकेट पर भारी निवेश, जैसी समस्याएं बड़ी बाधा बनी हुई हैं।
क्रिकेट की तुलना में विज्ञापन भी है काफी कम :-
इसके अलावा इस फुटबॉल के टूर्नामेंट में विज्ञापन के मौके क्रिकेट की तुलना में भी काफी सीमित होते हैं। क्योंकि यह एक लगातार चलने वाला खेल है। इसमें ब्रेक कम होते हैं। इसके अलावा इस समय भारतीय टीम की अनुपस्थिति भी विज्ञापन देने वालों को ज्यादा पैसा लगाने से रोकती है। तभी तो ऐसे में ब्रॉडकास्टर्स को अब यह सौदा उतना फायदे का नहीं लग रहा है।
टूर्नामेंट की टाइमिंग भी बनी बड़ी समस्या :-
इस बार साल 2026 फुटबॉल वर्ल्ड कप अमेरिका महाद्वीप में खेला जाएगा। इसके चलते हुए इन मैचों का समय भारतीय दर्शकों के लिए काफी चुनौतीपूर्ण हो जाता है। तभी तो ये सभी मैच भारतीय समयानुसार आधी रात से सुबह तक खेले जाएंगे। वहीं कट्टर फुटबॉल फैंस किसी भी समय मैच देखने को तैयार रहते हों लेकिन नौकरीपेशा लोगों और आम दर्शकों के लिए यह समय सुविधाजनक नहीं है। तभी तो अब इसका सीधा असर व्यूअरशिप पर पड़ सकता है। इसके अलावा अब कम दर्शकों का मतलब है विज्ञापन से कम कमाई। यही कारण है कि इस समय ब्रॉडकास्टर्स महंगे राइट्स खरीदने में हिचकिचा रहे हैं।

इसके अलावा इस पूरे मामले में एक दिलचस्प संभावना यह भी है कि ब्रॉडकास्टर्स आखिरी समय तक इंतजार करें। साल 2022 वर्ल्ड कप के दौरान भी ऐसा ही हुआ था। तब जियोस्टार ने देर से राइट्स खरीदे और मैचों को मुफ्त में स्ट्रीम किया था। इसके चलते हुए ही तब इस रणनीति से उन्हें कम कीमत पर अधिकार मिल गए और उनके प्लेटफॉर्म पर यूजर्स की संख्या में जबरदस्त बढ़ोतरी हुई थी। तभी तो इस बार भी वैसी ही रणनीति अपनाई जा सकती है, जहां अंतिम समय में डील फाइनल हो।
क्या भारतीय सरकार कर सकती है दखल :-
इसके अलावा भारत में स्पोर्ट्स ब्रॉडकास्टिंग सिग्नल्स एक्ट के तहत राष्ट्रीय महत्व के खेल आयोजनों को सार्वजनिक प्रसारक के साथ साझा करना जरूरी होता है। लेकिन यह नियम आमतौर पर भारत से जुड़े मैचों पर लागू होता है। इसके अलावा अब अगर कोई निजी ब्रॉडकास्टर राइट्स नहीं खरीदता है तो सरकार दूरदर्शन के जरिए प्रसारण सुनिश्चित करने की कोशिश कर सकती है। इसकी अलावा कुछ मीडिया रिपोर्ट्स में भी यह कहा गया है कि प्रसार भारती इन राइट्स को हासिल करने के विकल्प के रूप में उभरकर सामने आया है।
क्या भारतीय फैंस को मिलेगा इसका समाधान :-
इसके अलावा भारत में फिलहाल स्थिति यह है कि साल 2026 वर्ल्ड कप देखने के लिए कोई आधिकारिक टीवी चैनल या स्ट्रीमिंग प्लेटफॉर्म तय नहीं हुआ है। इसके चलते हुए सभी भारतीय फैंस के बीच चिंता बनी हुई है। लेकिन इतने बड़े टूर्नामेंट के बिना ब्रॉडकास्ट डील के रहने की संभावना बेहद कम है। वहीं आमतौर पर ऐसे मामलों में अंततः दोनों पक्ष, यानी फीफा और ब्रॉडकास्टर्स आपसी बातचीत से किसी समझौते पर पहुंच ही जाते हैं। इसके अलावा अब सभी भारतीय फैंस को उम्मीद है कि जल्द ही कोई ठोस फैसला सामने आएगा और उन्हें इस प्रतिष्ठित टूर्नामेंट का पूरा आनंद लेने का मौका मिलेगा। तभी तो अब सभी की नजरें इस बात पर टिकी हैं कि आखिर यह डील कब और किसके साथ फाइनल होती है।
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