Asian Games: एशियाई खेल पहले ही अब भारतीय तीरंदाजों के लिए विदेशी कोच का अनुबंध मुसीबत बनता जा रहा है। क्यूंकि कुछ समय पहले तक यह तय था कि इटली के जाने-माने कोच सर्गियो पागिनी भारतीय कंपाउंड तीरंदाजों को कोचिंग देंगे।
लेकिन अब उन्होंने ऐसा करने से साफ मना कर दिया है। इसके अलावा अब सूत्र बताते हैं कि साल 1999 के विश्व चैंपियन और 2003 के उपविजेता कजिंस भारतीय कंपाउंड टीम के कोच के लिए इंटरव्यू भी दे चुके हैं। लेकिन अभी उनके इस अनुबंध पर फैसला नहीं हो पाया है।
तीरंदाजी कोच पागिनी ने दिया भारत को धोखा :-
एशियाई खेल इसी साल होने वाले हैं। लेकिन अब एशियाई खेल पहले ही भारतीय तीरंदाजों के लिए विदेशी कोच का अनुबंध मुसीबत बनता जा रहा है। क्यूंकि कुछ समय पहले तक यह तय था कि इटली के जाने-माने कोच सर्गियो पागिनी भारतीय कंपाउंड तीरंदाजों को कोचिंग देंगे। इस बीच उनका यह अनुबंध सिरे चढ़ने जा रहा था। लेकिन भारतीय टीम के पूर्व कोच रहे पागिनी को अब तीरंदाजी खेल के मजबूत देश कोरिया से भारत के मुकाबले अधिक वेतन का प्रस्ताव मिल गया है।

इसके चलते हुए अब इटली के जाने-माने कोच सर्गियो पागिनी ने भारतीय तीरंदाजों को दरकिनार कर कोरियाई टीम का दामन थाम लिया है। इसके चलते हुए अब साल 2028 के लॉस एंजिलिस ओलंपिक में शामिल की गई कंपाउंड तीरंदाजी टीम के लिए पूर्व विश्व चैंपियन अमेरिकी तीरंदाज डेव कजिंस पर दांव लगाया गया है। वहीं अब पूर्व अमेरिकी चैंपियन तीरंदाज डेव कजिंस को अच्छे वेतन पर रखने की तैयारी कर ली गई है। लेकिन उनके अनुबंध पर तीरंदाजी के कुछ लोगों में अभी भी रोष है।
कजिंस के कोचिंग अनुभव पर है संदेह :-
इस बीच अब सूत्र बताते हैं कि साल 1999 के विश्व चैंपियन और 2003 के उपविजेता कजिंस भारतीय कंपाउंड टीम के कोच के लिए इंटरव्यू भी दे चुके हैं। लेकिन अभी उनके अनुबंध पर अंतिम फैसला होना बाकी है। इसके अलावा अगर सब कुछ ठीक-ठाक रहा तो कजिंस जल्द कंपाउंड तीरंदाजी टीम के कोच बन जाएंगे।

इस बीच कुछ सूत्र बताते हैं कि कजिंस एक अच्छे कंपाउंड तीरंदाज तो रहे हैं लेकिन उनके पास कोचिंग का बड़ा अनुभव नहीं है। जबकि भारतीय कंपाउंड तीरंदाज इस वक्त दुनिया के शीर्ष तीरंदाजों में शामिल हैं। इसके अलावा कजिंस फीटा राउंड का विश्व रिकॉर्ड भी बना चुके हैं।
अभी तक भारत का रिकर्व कोच भी नहीं आया :-
इसके अलावा इस मौजूदा समय में दिक्कत केवल भारत के कंपाउंड विदेशी कोच की ही नहीं है बल्कि रिकर्व कोच की भी है। क्यूंकि बीते वर्ष अप्रैल में कोरियाई मूल के अमेरिकी कोच की सिकली को 20 हजार अमेरिकी डॉलर के भारी-भरकम वेतन पर अनुबंधित करने की तैयारी की गई थी। इसके चलते हुए उनको इस वर्ष जनवरी में अनुबंध भी दिया गया था।

लेकिन वह शर्तों से खुश नजर नहीं हुए। इसके चलते हुए अभी तक भी उनका अनुबंध नहीं हो पाया है। इसके अलावा इस मौजूदा समय में भारतीय तीरंदाज विश्वकप में खेल रहे हैं। लेकिन रिकर्व और कंपाउंड दोनों टीमों का अभी तक चीफ कोच भी नियुक्त नहीं हो पाया है।
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