Sunday, February 15

बीते कुछ सालों से भारतीय महिलाएं खेल के हर क्षेत्र में पुरुषों की बराबरी कर रही हैं। चाहे वह पावर वाला खेल कुश्ती हो या फिर फुर्ती वाला बैडमिंटन हर जगह अब भारत की बेटियां अपना जौहर दिखा रही है। इसी कड़ी में आज हम भारत के युवाओं की प्ररेणास्रोत कही जाने वाले महान बैडमिंटन खिलाड़ी साइना नेहवाल के बारे में चर्चा कर रहे हैं।

भारत में जब महान खिलाड़ियों का नाम लिया जाता है, उनमें से बैडमिंटन खिलाड़ी साइना नेहवाल का नाम जरूर लिया जाता है। साइना नेहवाल भारत में बैडमिंटन की ऐसी महिला खिलाड़ी रही हैं, जिन्होंने विश्व पटल पर अपना लोहा मनवाया है। अभी तक साइना नेहवाल के नाम कुल 24 इंटरनेशनल खिताब हैं। आस के इस लेख में हम आपको साइना नेहवाल के प्रेरणा से भरी कहानी के बारे में बताएंगे। तो आइए जानते हैं साइना नेहवाल के बारे में कुछ महत्वपूर्ण बातें।

साइना का जन्म

भारत की स्टार बैडमिंटन खिलाड़ी साइना नेहवाल का जन्म 17 मार्च 1990 को हरियाणा के हिसार जिले में हुआ था। साइना के पिता काम नाम चौधरी चरण सिंह है और वो हरियाणा के कृषि विश्वविद्दालय में कार्यरत थे। इसके अलावा उनकी मां स्टेट लेवल की बैडमिंटन खिलाड़ी थीं। ये ही कारण है कि बचपन से ही साइना नेहवाल में भी बैडमिंटन के गुण समाए हुए थे। बता दें कि जब साइना नेहवाल के पिता का ट्रांसफर हुआ तो भी अपने परिवार के साथ हैदराबाद में ही शिफ्ट हो गई थीं।

प्रारंभिक जीवन

जब साइना नेहवाल की उम्र 8 साल थी, उसी वक्त से उन्होंने बैडमिंटन खेलना शुरु किया था। कहा जाता है कि भारत की इस स्टार महिला खिलाड़ी ने बचपन से ही अपने ही खेल को महत्व देती थी। ये ही कारण है कि अपने स्कूल के ही दिनों से उन्होंने खेल पर पूरा ध्यान दिया था। अगर बात करें उनके स्कूली शिक्षा की उन्होंने दो जगहों से पढ़ाई की है। जिसमें पहले हरियाणा और बाद में हैदराबाद के कई स्कूलों में साइना ने शिक्षा ग्रहण की। साइना नेहवाल की मां के मूताबिक उनकी बेटी को हैदराबाद की आम भाषा नहीं आती थी। ये ही कारण था कि उन्होंने लोगों से घुलने-मिलने के लिए बैडमिंटन खेलना शुरु किया था।

करियर

साइना नेहवाल ने अपने बैडमिंटन करियर में स्टेट, नेशनल और इंटरनेशनल सभी जगहों पर अपनी पहचान बनाई है। पूरे करियर में उन्होंने 24 अंतरराष्ट्रिय अवॉर्ड अपने नाम किए हैं। साल 2008 में साइना ने विश्व जूनियर बैडमिंटन का खिताब जीता। इसके बाद साल 2009 में इंडोनेशिया ओपन का खिताब भी अपने नाम किया। साल 2010 में भारत की इस स्टार बैडमिंटन खिलाड़ी ने 2010 में भी कॉमनवेल्थ गेम्स में गोल्ड मेडल जीतकर पूरी दुनिया में अपनी अलग पहचान बनाई थी।

ओलंपिक में रचा इतिहास 

साल 2012 के लंदन ओलंपिक में साइना नेहवाल का नाम खूब चर्चा में रहा। इस दौरान उन्होंने देश के खाते में ब्रॉन्ज डालकर पूरे भारत को गौरवांवित करने का काम किया था। इसके साथ ही साइना बैडमिंटन में पदक जीतने वाली पहली भारतीय महिला खिलाड़ी भी बन गई। इसके अलावा साल 2018 में साइना ने एशियन गेम्स में देश को करीब 36 साल के लंबे अंतराल के बाद ब्रॉन्ज मेडल दिलाया था।

पुरस्कार

साइना नेहवाल को उनके बैडमिंटन में कमाल के प्रदर्शन करने और देश का नाम विश्व स्तर पर रोशन करने लिए कई अवॉर्ड्स से भी सम्मानित किया जा चुका है। जिनमें अर्जुन अवॉर्ड, ध्यानचंद खेल रत्न और पद्म भूषण जैसे पुरस्कार शामिल हैं।

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साल 2020 से स्पोर्ट्स पत्रकारिता में एक सिपाही के तौर पर कार्यरत हूं। प्रत्येक खेल में उसके सभी पहलुओं के धागे खोलकर आपके सामने रखने की कोशिश करूंगा। विराट व रोहित का बल्ला धोखा दे सकता है, लेकिन आपको यहां खबरों की विश्वसनियता पर कभी धोखा नहीं मिलेगा। बचपन से ही क्रिकेट के साथ-साथ अन्य खेलों में खास दिलचस्पी होने के कारण इसके बारे में लिखना बेहद पसंद है।

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