Sunday, February 8

क्रिकेट को शुरू हुए लगभग 150 साल होने वाले हैं और मॉडर्न डे में बहुत सी राइवलरी जन्म ले चुकी हैं। लेकिन, इस खेल की सबसे पुरानी और मशहूर प्रतिस्पर्धा इंग्लैंड और ऑस्ट्रेलिया के बीच है। इंग्लैंड ने कई सालों तक ऑस्ट्रेलिया पर राज किया। लेकिन यह कहानी है कि कैसे इसने सबसे प्रतिस्पर्धी राइवलरी को जन्म दिया। तो इस आर्टिकल में हम एशेज के जन्म के बारे में जानेंगे।

1877 में हुए पहले टेस्ट मैच में भी इंग्लैंड को मिली थी हार

England Cricket Team
England Cricket Team

दरअसल, इंग्लैंड और ऑस्ट्रेलिया के बीच पहला टेस्ट मैच 1877 में मेलबर्न क्रिकेट ग्राउंड पर खेला गया था। इस टेस्ट मैच में ऑस्ट्रेलिया ने इंग्लैंड को हराकर सभी को आश्चर्यचकित कर दिया था। लेकिन यह कहानी शुरू होती है इसके 5 सालों के बाद, जब ऑस्ट्रेलियाई टीम इंग्लैंड के दौरे पर थी। इंग्लिश टीम लगातार अच्छा प्रदर्शन कर रही थी।

उनके खिलाड़ी शानदार फॉर्म में थे, जबकि ऑस्ट्रेलिया के प्लेयर्स की फॉर्म अच्छी नहीं थी। लेकिन वो कहते हैं न कि क्रिकेट अनिश्चितताओं से भरा खेल है और इसमें कभी भी कुछ भी हो सकता है। दोनों टीमों के बीच यह मैच इंग्लैंड के द ओवल क्रिकेट ग्राउंड पर खेला जाना था, जिसमें इंग्लिश टीम ने टॉस जीतकर पहले गेंदबाजी करने का फैसला किया।

पहली पारी में ऑस्ट्रेलिया सस्ते में सिमटी

पिच गेंदबाजों के मुफ़ीद थी, जिसका फायदा इंग्लिश गेंदबाजों ने उठाया और डिक बार्लो के पंजे के चलते ऑस्ट्रेलिया को पहली पारी में मात्र 63 रनों पर आउट कर दिया। पहली पारी के बाद इंग्लैंड की जीत तय मानी जा रही थी, लेकिन ऑस्ट्रेलियाई तेज गेंदबाज फेड्रिक स्पोफोर्थ कहाँ हार मानने वाले थे। उन्होंने अपनी धारदार गेंदबाजी का जलवा दिखाते हुए इंग्लैंड की टीम को पहली पारी में ज़्यादा लंबी बढ़त नहीं लेने दी। उनके 7 विकेटों के चलते अंग्रेज़ टीम 101 रनों पर ढेर हो गई।

ऑस्ट्रेलिया की टीम ने दूसरी पारी में अच्छी शुरुआत की। एक समय टीम का स्कोर 66 रन पर शून्य विकेट था, लेकिन टेड पीट के 4 विकेटों के चलते देखते-देखते वो मात्र 122 रनों पर ऑलआउट हो गई। इंग्लैंड की टीम को जीत के लिए मात्र 85 रनों की ज़रूरत थी। एक तरफ इंग्लिश दिग्गज बल्लेबाज डब्ल्यू. सी. ग्रेस खेल रहे थे और जीत लगभग तय मानी जा रही थी। पहली पारी की तरह इस पारी में भी फेड्रिक ने अपनी टीम को स्पष्ट संदेश दिया कि अभी भी मैच जीता जा सकता है।

इंग्लैंड की हार.. क्रिकेट की मौत और अख़बार में छपा शोक सन्देश

English Newspaper After England Team Defeat
English Newspaper After England Team Defeat

ग्रेस का विकेट गिरते देर नहीं कि फेड्रिक ने अपना कहर बरपाना शुरू कर दिया। इंग्लिश टीम को जीत के लिए 10 रनों की जरुरत थी और उनके 2 विकेट बचे हुए थे लेकिन हैरी बॉयल ने अंतिम दो विकेट लेकर ऑस्ट्रेलिया को जीत दिला दी। इस हार से इंग्लैंड के लोग बहुत दुखी हुए। वहाँ के एक अखबार ने मजाक उड़ाते हुए लिखा “इंग्लिश क्रिकेट की मौत हो गई है। 29 अगस्त 1882 को ओवल मैदान पर। अब इसकी राख ऑस्ट्रेलिया ले जाई जाएगी।” यहीं से “एशेज” (Ashes) शब्द जुड़ गया।

रीगेन द एशेज में कामयाब हुई इंग्लिश टीम

फिर 1883 में जब इंग्लैंड की टीम ऑस्ट्रेलिया दौरे पर गई, तो वहां की मीडिया और लोग कहने लगे कि अब इंग्लैंड अपनी “राख” वापस लेने जा रहा है। इस सीरीज में इंग्लैंड ने 2-1 से जीत हासिल की। सीरीज के बाद, कप्तान ब्लाई को राख के प्रतीक के रूप में एक छोटा टेराकोटा कलश भेंट किया गया, जिसे ऑस्ट्रेलियाई क्रिकेट की राख बताया गया। स्टंप्स में लगने वाली बेल्स को जलाकर उसकी राख एक छोटे से बर्तन (Urn) में रखी और मजाक में इंग्लैंड के कप्तान को दे दी। यही छोटा सा बर्तन बाद में एशेज ट्रॉफी बन गया।

आज भी यही परंपरा चल रही है। असली एशेज ट्रॉफी बहुत छोटी है और लॉर्ड्स क्रिकेट म्यूज़ियम (लंदन) में रखी जाती है। जो भी टीम एशेज सीरीज जीतती है, उसे उसकी एक बड़ी कॉपी (duplicate trophy) दी जाती है।

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