Priyansh Arya’s Journey IPL Rejection to Record Century: दिल्ली के अशोक विहार में पले-बढ़े बाएं हाथ के सलामी बल्लेबाज प्रियांश आर्य का नाम अब IPL के इतिहास में दर्ज हो चुका है। IPL 2025 में चेन्नई सुपर किंग्स (CSK) के खिलाफ केवल 39 गेंदों में शतक जड़कर उन्होंने न सिर्फ पंजाब किंग्स (PBKS) को जीत दिलाई, बल्कि IPL इतिहास का चौथा सबसे तेज शतक भी अपने नाम किया।
हालांकि, यह सफलता अचानक नहीं आई। IPL में जगह बनाने से पहले आर्य को रिजेक्शन, असमंजस और आत्म-संदेह जैसी चुनौतियों से जूझना पड़ा।
ब्रेंडन मैकुलम से मिली प्रेरणा, अब उन्हीं जैसा प्रदर्शन
प्रियांश ने IPL से पहले IANS को बताया था कि, ब्रेंडन मैकुलम की 2008 में खेली गई 158 रनों की नाबाद पारी ने उन्हें इस टूर्नामेंट में खुद को साबित करने की प्रेरणा दी थी। अब उन्होंने खुद भी उस तरह की विस्फोटक बल्लेबाजी से सबका ध्यान खींचा है।
उनकी 103 रनों की पारी में सात चौके और नौ छक्के शामिल थे, जो दर्शकों को IPL की शुरुआत के दिन की याद दिला गई।
दिल्ली प्रीमियर लीग से मिली पहचान
प्रियांश की कहानी में अहम मोड़ तब आया जब उन्होंने दिल्ली प्रीमियर लीग (DPL) 2024 के पहले सीजन में लगातार छह छक्के जड़े और टूर्नामेंट के टॉप रन-स्कोरर बने। इसी प्रदर्शन के चलते उन्हें IPL ट्रायल्स के कॉल आए और अंततः 3.8 करोड़ रुपये की बड़ी रकम में पंजाब किंग्स ने उन्हें अपनी टीम में शामिल किया।
पहले गोल्डन डक, दूसरे में इतिहास
IPL 2025 के एक मैच में राजस्थान रॉयल्स के खिलाफ आर्य पहली ही गेंद पर जोफ्रा आर्चर के हाथों क्लीन बोल्ड हो गए थे। लेकिन इस असफलता को उन्होंने अपने आत्मविश्वास पर हावी नहीं होने दिया।
कोच रिकी पोंटिंग और कप्तान श्रेयस अय्यर से हुई बातचीत ने उन्हें आत्मबल दिया। पोंटिंग ने कहा, “अगर अगली बार वही गेंद मिले, तो उसे स्टेडियम से बाहर मार देना।” अय्यर ने भी उन्हें अपनी इंस्टिंक्ट पर खेलने की सलाह दी।
शांति और आत्म-नियंत्रण बनी सफलता की कुंजी
आर्य मानते हैं कि IPL जैसे बड़े मंच पर सफलता पाने के लिए सबसे जरूरी चीज है मानसिक संतुलन। उन्होंने कहा, “जो सबसे मुश्किल है, वो है अपने दिमाग को नियंत्रित करना। जितना शांत रहोगे, उतना बेहतर प्रदर्शन कर पाओगे।”
IPL से पहले की अनदेखी और संघर्ष
हालांकि प्रियांश ने 2021 में दिल्ली की सीनियर टीम से डेब्यू किया था और 2019 में उन्हें दिल्ली U19 टीम में चुना गया था, लेकिन इसके बावजूद उन्हें व्यापक पहचान नहीं मिल पाई।
IPL ट्रायल्स में पहले सेलेक्शन न होने पर उन्होंने अपने आप पर सवाल उठाना शुरू कर दिया था। लेकिन DPL के प्रदर्शन के बाद उनके करियर की दिशा ही बदल गई।
कोच संजय भारद्वाज की सीख और निरंतरता की ताकत
प्रियांश ने अपने कोच संजय भारद्वाज को अपनी सफलता का श्रेय देते हुए कहा, “मेरे सर हमेशा कहते थे कि क्रीज पर जितनी देर टिके रहोगे, उतने ज्यादा मौके मिलेंगे।”
उन्होंने सीखा कि समय और परिपक्वता के साथ आपको अपने खेल में बदलाव लाने ही पड़ते हैं, खासकर तब जब विपक्षी खिलाड़ी आपके खेल को अच्छे से समझने लगते हैं।
प्रियांश आर्य की यह यात्रा हमें बताती है कि रिजेक्शन कभी भी अंत नहीं होता, बल्कि वह एक ऐसा पड़ाव है जो अगर सही सोच और मेहनत से पार किया जाए, तो मंजिल के और करीब ले जाता है।
IPL में उनकी यह सफलता न सिर्फ उनके लिए, बल्कि उन सभी युवाओं के लिए प्रेरणा है जो सपनों के पीछे भागते हैं, चाहे राह कितनी भी मुश्किल क्यों न हो।
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