भारत और ऑस्ट्रेलिया टेस्ट सीरीज सिर्फ बेहतरीन क्रिकेट के लिए नहीं, बल्कि दोनों टीम के खिलाड़ियों के बीच आपसी टकराव के लिए भी खूब मशहूर हैं। ऐसा ही एक किस्सा हरभजन सिंह और ऑस्ट्रेलियाई खिलाड़ी एंड्रू सायमंड्स के बीच 2007-08 बॉर्डर गावस्कर ट्रॉफी के दौरान हुआ था।
इस घटना की शुरुवात सिडनी में हो रहे भारत और ऑस्ट्रेलिया के बीच दूसरे टेस्ट मैच के दौरान हुई थी। 2008 में भारत के ऑस्ट्रेलिया दौरे का हिस्सा था। मेलबर्न क्रिकेट ग्राउंड में पहले टेस्ट में 337 रनों से करारी हार झेलने के बाद, अनिल कुंबले की कप्तानी में भारतीय टीम बेहतरीन प्रदर्शन की उम्मीद में मैदान पर खेलने उतरी थी। मैच के दौरान भारतीय स्पिनर हरभजन सिंह पर ऑस्ट्रेलियाई क्रिकेटर एंड्रयू साइमंड्स की झड़प हो गयी। इस दौरान भज्जी के ऊपर नस्लीय कमेन्ट का करने का आरोप लगा था।
हरभजन सिंह और एंड्रयू सायमंड्स के बीच कैसे हुई विवाद की शुरुवात

2008 में ऑस्ट्रेलिया टीम के कप्तान रिकी पोंटिंग की अगुआई में चल रहे मेलबर्न के पहले टेस्ट में 337 रन की बड़ी जीत से सीरीज में 1-0 से आगे थी और अब उनकी नज़र सिडनी क्रिकेट ग्राउंड में खेले जा रहे मैच पर थी। दूसरे मैच के तीसरे दिन भारत ने 216-3 रन के बाद से उस दिन खेलना शुरू किया पर सौरव गांगुली के 78 गेंद पर 67 पर आउट होने के बाद पारी लड़खड़ाने लगी थी।
तेंदुलकर के साथ आखिर में हरभजन सिंह टिके और 8वें विकेट की पार्टनरशिप में 100 से ज्यादा रन जोड़े। हरभजन को आउट न कर पाने की बौखलाहट में ऑस्ट्रेलिया के खिलाड़ी उनका ध्यान भटकाने के लिए ख़ास तौर पर एंड्रू सायमंड्स, स्लेजिंग करने लगे। जिसमे हरभजन ने गुस्से में सायमंड्स को ‘मंकी’ कह दिया ऐसा उनका आरोप था। भज्जी के ऊपर नस्लीय दुर्व्यवहार करने का आरोप लगा। मिश्रित नस्ल के साइमंड्स ने आरोप लगाया कि मैदान पर हुई तीखी बहस के दौरान हरभजन ने उन्हें “बंदर” कहा था। जिसके बाद दोनों के बीच में आपसी रंजिश काफी बढ़ गयी थी।
विवाद के बाद की क्या था मैच रेफरी का फैसला

अंपायर बेन्सन और बकनर ने हरभजन सिंह के बारे में मैच रेफरी माइक प्रॉक्टर से शिकायत कर दी थी। हरभजन के द्वारा ‘मंकी’ कहने से इनकार करने पर और कप्तान अनिल कुंबले के सपोर्ट के बावजूद उनके ऊपर तीन टेस्ट मैच का बैन लगा दिया था। इस पर भारतीय टीम ने विरोध किया और टूर बीच में छोड़ने की धमकी दी।
बैन के खिलाफ़ अपील के नतीजे के आने तक टूर में टीम इंडिया ने अगले मैच को रोक दिया था। भारतीय टीम अगला मैच खेलने कैनबरा नहीं गयी और टूरबस में ही कई घंटे इंतजार करते रहे। मामला बिगड़ता देख आईसीसी को बीच में आना पड़ा।
आईसीसी सीईओ मैल्कम स्पीड ने कहा कि अपील सुनने के लिए एक कमिश्नर नियुक्त करेंगे। जब अगले टेस्ट तक अपील पर सुनवाई नहीं की जा सकी तो आईसीसी ने हरभजन को हाल फिलहाल खेलने की इजाजत दे दी। उधर आईसीसी ने अपील के लिए हाई कोर्ट के जज जॉन हैनसेन को अपॉइंट कर दिया। सुनवाई एडिलेड में चौथे टेस्ट के बाद 29 और 30 जनवरी को तय हुई।
28 जनवरी को, एडिलेड में जॉन हैनसेन ने सुनवाई के बाद कहा कि हरभजन सिंह पर नस्लवाद का आरोप सिद्ध नहीं होता और इस फैसले के बाद 3 मैच का बैन उनके ऊपर से हटा दिया गया । एडिलेड में चौथे टेस्ट के लिए टीम में उनकी वापसी हो गयी थी।
‘मंकीगेट’ घटना के बाद भारत और ऑस्ट्रेलिया के संबंधों पर क्या प्रभाव पड़ा
इस विवाद ने भारतीय और ऑस्ट्रेलियाई क्रिकेट टीमों के बीच के संबंधों को काफी तनावपूर्ण बना दिया और क्रिकेट में नस्लवाद को लेकर एक व्यापक बहस को जन्म दिया। ऐसी घटनाओं से निपटने के लिए बेहतर प्रोटोकॉल की आवश्यकता और खेल भावना को बनाए रखने में अंपायर और मैच रेफरी की भूमिका पर भी चर्चा को जन्म दिया। आज के समय में जब भी ये दोनों टीम आमने- सामने आती हैं तो दोनों के टीमों के प्लेयर्स एक दूसरे को स्लेजिंग करते हुए देखे जाते हैं ।







