टी20 वर्ल्ड कप 2026 के जश्न के दौरान विवाद के बाद नेशनल ऑनर एक्ट 1971 चर्चा में है, जानिए इस कानून के मुख्य प्रावधान क्या हैं।
टी20 वर्ल्ड कप 2026 जीत के बाद भारतीय टीम के जश्न के बीच एक विवाद भी सामने आया है। टीम के स्टार ऑलराउंडर हार्दिक पांड्या (Hardik Pandya) के खिलाफ राष्ट्रीय तिरंगे झंडे के कथित अपमान को लेकर शिकायत दर्ज कराई गई है।
इस शिकायत में कहा गया है कि सेलिब्रेशन के दौरान राष्ट्रीय झंडे के साथ किया गया व्यवहार नेशनल ऑनर एक्ट 1971 का उल्लंघन हो सकता है। इसके बाद यह कानून एक बार फिर चर्चा में आ गया है।
क्या है नेशनल ऑनर एक्ट 1971
नेशनल ऑनर एक्ट 1971 का पूरा नाम प्रिवेंशन ऑफ इंसल्ट्स टू नेशनल ऑनर एक्ट 1971 है, जिसे भारत गणराज्य के बाईसवें साल में संसद द्वारा बनाया गया था। यह कानून भारत के राष्ट्रीय प्रतीकों जैसे राष्ट्रीय झंडा, संविधान और राष्ट्रगान के सम्मान की रक्षा के लिए बनाया गया था। इस कानून के तहत यदि कोई व्यक्ति राष्ट्रीय झंडे या अन्य राष्ट्रीय प्रतीकों का अपमान करता है तो उसके खिलाफ कानूनी कार्रवाई की जा सकती है।
क्लॉज 2 में है भारतीय राष्ट्रीय झंडे और संविधान का अपमान रोकने के लिए नियम
अगर कोई व्यक्ति किसी सार्वजनिक जगह पर या ऐसी जगह पर जहां लोग देख सकते हों, भारतीय राष्ट्रीय झंडे या भारत के संविधान की प्रति को जलाता है, फाड़ता है, खराब करता है, गंदा करता है, बिगाड़ता है, नष्ट करता है, पैरों से रौंदता है या किसी भी तरह से उसका अपमान करता है, तो यह अपराध माना जाएगा। यह अपमान बोलकर, लिखकर या किसी काम के जरिए भी किया जा सकता है।
स्पष्टीकरण 1
अगर कोई व्यक्ति संविधान या राष्ट्रीय झंडे के बारे में आलोचना करता है या असहमति जताता है और उसका उद्देश्य कानून के अनुसार संविधान में बदलाव या राष्ट्रीय झंडे में बदलाव लाने का हो, तो यह अपराध नहीं माना जाएगा।
स्पष्टीकरण 2
“भारतीय राष्ट्रीय ध्वज” में झंडे की तस्वीर, पेंटिंग, चित्र, फोटो या किसी भी रूप में बना हुआ ध्वज शामिल है, चाहे वह किसी भी चीज पर बना या दिखाया गया हो।
स्पष्टीकरण 3
“सार्वजनिक स्थान” का मतलब है ऐसी जगह जहां आम लोग जा सकते हों या जिसका इस्तेमाल कर सकते हों। इसमें सार्वजनिक वाहन भी शामिल होते हैं।
स्पष्टीकरण 4
राष्ट्रीय झंडे का अपमान किन बातों को माना जाएगा
(a) राष्ट्रीय झंडे का गंभीर अपमान करना।
(b) किसी व्यक्ति या वस्तु को सलामी देने के लिए ध्वज को झुकाना।
(c) सरकार के निर्देशों के अलावा किसी भी समय ध्वज को आधा झुकाकर फहराना।
(d) राज्य अंतिम संस्कार या सेना/अर्धसैनिक बलों के अंतिम संस्कार को छोड़कर किसी भी रूप में ध्वज को कपड़े या पर्दे की तरह इस्तेमाल करना।
(e) राष्ट्रीय झंडे का उपयोग-
- (i) कमर के नीचे पहने जाने वाले कपड़े, यूनिफॉर्म या किसी भी वस्तु के रूप में करना।
- (ii) तकिए, रूमाल, नैपकिन, अंतःवस्त्र या कपड़े पर इसे कढ़ाई या प्रिंट के रूप में इस्तेमाल करना।
- (f) राष्ट्रीय झंडे पर किसी भी तरह का लिखना या निशान लगाना।
- (g) ध्वज को किसी चीज को रखने, देने या ले जाने के लिए इस्तेमाल करना, सिवाय उन मौकों के जब गणतंत्र दिवस या स्वतंत्रता दिवस जैसे समारोहों में ध्वज फहराने से पहले फूलों की पंखुड़ियां रखी जाती हैं।
- (h) किसी मूर्ति, स्मारक, मंच या भाषण देने की जगह को ढकने के लिए ध्वज का इस्तेमाल करना।
- (i) जानबूझकर ध्वज को जमीन, फर्श या पानी में छूने देना।
- (j) वाहन, ट्रेन, नाव, विमान या किसी अन्य चीज के ऊपर या पीछे ध्वज लपेटना।
- (k) किसी इमारत को ढकने के लिए ध्वज का इस्तेमाल करना।
- (l) ध्वज को जानबूझकर केसरिया रंग नीचे की तरफ करके दिखाना।
राष्ट्रीय झंडे के अपमान पर क्या हो सकती है सजा?
नेशनल ऑनर एक्ट 1971 के तहत यदि कोई व्यक्ति भारतीय राष्ट्रीय झंडे या भारत के संविधान का अपमान करता है, तो उसके खिलाफ कानूनी कार्रवाई की जा सकती है। इस कानून के अनुसार दोषी पाए जाने पर तीन साल तक की जेल, जुर्माना या दोनों सजा दी जा सकती है।
यह कानून राष्ट्रीय प्रतीकों की गरिमा बनाए रखने के लिए बनाया गया है, इसलिए किसी भी सार्वजनिक स्थान पर राष्ट्रीय झंडे या संविधान के अपमान को गंभीर अपराध माना जाता है।
क्यों चर्चा में आया यह कानून?
हाल ही में टी20 वर्ल्ड कप 2026 जीत के बाद हुए जश्न के दौरान हार्दिक पांड्या को लेकर एक शिकायत दर्ज कराई गई। शिकायतकर्ता का आरोप है कि सेलिब्रेशन के दौरान राष्ट्रीय झंडे के साथ किया गया व्यवहार इस कानून के प्रावधानों का उल्लंघन हो सकता है।
हालांकि, इस मामले में पुलिस ने केवल शिकायत मिलने की पुष्टि की है और आगे की कार्रवाई को लेकर अभी कोई आधिकारिक जानकारी सामने नहीं आई है।
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