Thursday, March 5

Top 10 Indian Cricketers Who Played Only One Test Match And Faded Away: भारतीय क्रिकेट का इतिहास अनगिनत सितारों से भरा हुआ है। सचिन तेंदुलकर, राहुल द्रविड़, कपिल देव जैसे महान खिलाड़ियों ने सालों तक टीम की सेवा की। लेकिन इस सफर में कुछ ऐसे नाम भी हैं, जिन्हें सिर्फ एक बार टेस्ट कैप पहनने का मौका मिला। उन्होंने उस एक मौके में अपनी पूरी कोशिश की, पर फिर कभी चयनकर्ताओं की नजर में नहीं आए।

इन खिलाड़ियों की कहानियां बताती हैं कि क्रिकेट सिर्फ हुनर का नहीं, बल्कि किस्मत और समय का खेल भी है। आइए जानते हैं ऐसे 10 भारतीय खिलाड़ियों के बारे में, जो अपने करियर में सिर्फ एक टेस्ट मैच खेल सके और उन्हें दूसरा टेस्ट खेलने का मौका नहीं मिला।

ये 10 भारतीय खिलाड़ी जो सिर्फ एक टेस्ट मैच खेलकर गायब हो गए

1. रॉबिन सिंह (1998)

टेस्ट करियर: 1 मैच, 27 रन, औसत 13.50

भारत के ऑलराउंडर रॉबिन सिंह वनडे क्रिकेट में एक भरोसेमंद खिलाड़ी रहे। उन्होंने 136 वनडे खेले और टीम को कई बार संतुलन दिया। लेकिन टेस्ट में उन्हें सिर्फ एक मौका मिला, जो 1998 में जिम्बाब्वे के खिलाफ हरारे में था।

रॉबिन ने अपने डेब्यू टेस्ट मैच की दो पारियों में 27 रन बनाए और कुछ ओवर गेंदबाजी भी की। भारत को उस मैच में हार मिली और रॉबिन का टेस्ट करियर वहीं खत्म हो गया। हालांकि, उनकी फील्डिंग और वनडे क्रिकेट के प्रदर्शन ने उन्हें भारतीय क्रिकेट का स्थायी चेहरा बना दिया।

2. अजय शर्मा (1988)

टेस्ट करियर: 1 मैच, 30 रन, औसत 15.00

दिल्ली के बल्लेबाज अजय शर्मा घरेलू क्रिकेट में रन मशीन थे। उन्होंने रणजी ट्रॉफी में 10,000 से अधिक रन बनाए। 1988 में वेस्टइंडीज के खिलाफ उन्हें डेब्यू का मौका मिला, लेकिन सिर्फ 30 रन बना सके।

उस समय टीम में मोहम्मद अज़हरुद्दीन, रवि शास्त्री और तेंदुलकर जैसे स्टार थे, इसलिए उन्हें दोबारा मौका नहीं मिला। बाद में फिक्सिंग विवादों में उनका नाम आने से उनका करियर हमेशा के लिए खत्म हो गया।

3. अमोल मजूमदार (2000)

टेस्ट करियर: 1 मैच, 12 रन

अमोल मजूमदार भारतीय घरेलू क्रिकेट के सबसे सम्मानित नामों में से एक हैं। उन्होंने फर्स्ट क्लास क्रिकेट में 11,000 से ज्यादा रन बनाए, लेकिन अंतरराष्ट्रीय स्तर पर उन्हें सिर्फ एक टेस्ट में ही मौका मिला, जो साल 2000 में न्यूजीलैंड के खिलाफ था।

वह मैच उनका सपना और आखिरी मौका दोनों साबित हुआ। हालांकि, वह बाद में कोच बने और आज भी भारतीय क्रिकेट में मार्गदर्शक की भूमिका निभा रहे हैं।

4. भरत रेड्डी (1979)

टेस्ट करियर: 1 मैच, 19 रन

विकेटकीपर भरत रेड्डी को 1979 में इंग्लैंड दौरे पर भारत की टीम में शामिल किया गया। उन्होंने एक टेस्ट खेला, लेकिन कुछ खास प्रदर्शन नहीं कर पाए। उनके समय में सैयद किरमानी जैसी मजबूत मौजूदगी थी, जिससे उन्हें दोबारा मौका नहीं मिला। फिर भी उन्होंने घरेलू स्तर पर अच्छा प्रदर्शन जारी रखा।

5. विवेक राजदान (1989)

टेस्ट करियर: 1 मैच, 4 विकेट, 19 रन

दिल्ली के तेज गेंदबाज विवेक राजदान 1989 में पाकिस्तान के खिलाफ कराची टेस्ट में टीम का हिस्सा बने। उन्होंने उस मैच में 4 विकेट झटके और उम्मीदें जगाईं, लेकिन बाद में चोटों और प्रतिस्पर्धा के चलते टीम से बाहर हो गए। उनका डेब्यू सचिन तेंदुलकर के डेब्यू टेस्ट के साथ हुआ था, लेकिन करियर का रास्ता बिल्कुल अलग निकला।

6. सूरज येल्लाप्पा (1933)

टेस्ट करियर: 1 मैच, 10 रन

भारत के शुरुआती टेस्ट खिलाड़ियों में से एक सूरज येल्लाप्पा को 1933 में इंग्लैंड के खिलाफ देश के पहले घरेलू टेस्ट सीज़न में मौका मिला था। हालांकि, वह उस मैच में सिर्फ 10 रन बना सके और टीम से बाहर हो गए। भारत में उस समय टेस्ट क्रिकेट अपने शुरुआती दौर में था और चयन के अवसर बहुत सीमित थे।

7. गगन खोड़ा (1998)

टेस्ट करियर: 1 मैच, 28 रन

राजस्थान के बल्लेबाज गगन खोड़ा को 1998 में वेस्टइंडीज के खिलाफ टेस्ट डेब्यू का मौका मिला। उन्होंने 28 रन बनाए, लेकिन टीम में जगह पक्की नहीं कर सके। उन्होंने घरेलू क्रिकेट में शानदार प्रदर्शन किया था और चयनकर्ताओं की नजर में थे, पर लगातार मौके न मिलने से करियर रुक गया।

8. पी. कृष्णमूर्ति (1971)

टेस्ट करियर: 1 मैच, 13 रन

पी. कृष्णमूर्ति को 1971 में वेस्टइंडीज के खिलाफ भारत की ऐतिहासिक सीरीज के दौरान एक टेस्ट खेलने का मौका मिला। उन्होंने निचले क्रम में बल्लेबाजी करते हुए 13 रन बनाए। उनके बाद टीम में इरापल्ली प्रसन्ना और चंद्रशेखर जैसे दिग्गज स्पिनर स्थायी सदस्य बन गए, जिससे उनका रास्ता बंद हो गया।

9. संदीप पाटिल जूनियर (1996)

टेस्ट करियर: 1 मैच, 8 रन

संदीप पाटिल जूनियर, दिग्गज बल्लेबाज संदीप पाटिल के बेटे, को 1996 में इंग्लैंड के खिलाफ एकमात्र टेस्ट में मौका मिला। उन्होंने उस मैच में 8 रन बनाए और फिर टीम से बाहर हो गए। उनके पिता भारतीय क्रिकेट में बड़ा नाम थे, लेकिन बेटे को उसी तरह की सफलता नहीं मिल सकी।

10. अबे कुरुविला (1997)

टेस्ट करियर: 1 मैच, 5 विकेट, 10 रन

मुम्बई के तेज गेंदबाज अबे कुरुविला ने 1997 में वेस्टइंडीज के खिलाफ एक टेस्ट में शानदार गेंदबाजी की और 5 विकेट झटके। इसके बावजूद उन्हें दोबारा नहीं खिलाया गया। उनकी ऊँचाई और स्विंग गेंदबाजी में दम था, लेकिन उस दौर में जवागल श्रीनाथ और वेंकटेश प्रसाद जैसे मजबूत विकल्प मौजूद थे। बाद में वे चयन समिति से जुड़कर भारतीय क्रिकेट में योगदान देते रहे।

इन दसों भारतीय खिलाड़ियों की कहानियां इस बात का सबूत हैं कि क्रिकेट सिर्फ स्कोरकार्ड का खेल नहीं, बल्कि संभावनाओं और परिस्थितियों का संगम है। कई बार एक गलत समय, एक चोट या टीम में पहले से मौजूद दिग्गजों की वजह से किसी का पूरा करियर ठहर जाता है। फिर भी, ये खिलाड़ी हमेशा भारत की टेस्ट कैप पहनने वाले क्रिकेटर के रूप में याद किए जाएंगे।

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Neetish Kumar Mishra Sports Digest Hindi में Editor के रूप में कार्यरत हैं और खेल पत्रकारिता में गहरा अनुभव रखते हैं। क्रिकेट, टेनिस, फुटबॉल और अन्य खेलों की बारीकियों पर उनकी पकड़ बेहद मजबूत है।

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