Thursday, March 5

‘Karthi Anna’ Karthikeyan Murali Story Behind R Vaishali’s Grand Swiss 2025 Glory: भारतीय चेस जगत में जब भी प्रेरणा की बात होती है, तो खिलाड़ी अपनी मेहनत और संघर्ष की कहानियों से लोगों को प्रेरित करते हैं। लेकिन कभी-कभी कहानी का असली नायक पर्दे के पीछे होता है।

महिला ग्रैंडमास्टर आर वैशाली की हालिया ग्रैंड स्विस जीत के पीछे भी एक ऐसा ही चेहरा है ग्रैंडमास्टर कार्तिकेयन मुरली, जिन्हें वैशाली प्यार से “कार्थी अन्ना” कहती हैं।

तमिल में “अन्ना” का अर्थ “बड़ा भाई” होता है। यानी एक ऐसा साथी जो हमेशा आपके साथ खड़ा रहता है। ठीक वैसा ही किरदार कार्तिकेयन ने निभाया, जब वैशाली अपने करियर के सबसे कठिन दौर से गुजर रही थीं।

वैशाली का मुश्किल समय, जब हार के बाद टूटी उम्मीदें

चेन्नई ग्रैंड मास्टर्स टूर्नामेंट में वैशाली का प्रदर्शन बेहद निराशाजनक रहा था। उन्होंने केवल एक अंक हासिल किया और लगातार सात मुकाबले गंवा दिए थे। उस हार ने उनका आत्मविश्वास तोड़ दिया था। उनके मन में यह विचार भी घर कर गया था कि अब उन्हें आने वाले Women’s Grand Swiss में हिस्सा नहीं लेना चाहिए, जबकि उन्होंने इसी टूर्नामेंट का पिछला संस्करण जीता था।

उन्होंने ChessBase से बातचीत में कहा था, “चेन्नई के बाद मैंने तय कर लिया था कि मैं ग्रैंड स्विस नहीं खेलूंगी। सात मैच लगातार हारने के बाद खुद को संभालना बहुत मुश्किल था।”

‘कार्थी अन्ना’ की एंट्री ने जगाई वैशाली में हौसले की नई किरण

जब वैशाली पूरी तरह निराश थीं, तब उनके बचपन के कोच आरबी रमेश ने महसूस किया कि उन्हें किसी ऐसे व्यक्ति की जरूरत है जो उन्हें उनकी वास्तविक क्षमता की याद दिला सके। यहीं से इस कहानी में “कार्थी अन्ना” की एंट्री होती है।

रमेश ने कार्तिकेयन मुरली से संपर्क किया और उन्हें वैशाली से बात करने के लिए कहा। इसके बाद लंबी फोन कॉल्स हुईं, जिसमें कार्थी ने कोई लेक्चर और कोई तकनीकी सलाह नहीं दी, बल्कि बस सच्ची हिम्मत और भावनात्मक समर्थन दिया।

कार्तिकेयन ने उन्हें यह भरोसा दिलाया कि हार के बाद भी उनकी क्षमता बरकरार है और उन्हें दोबारा खुद पर विश्वास करना चाहिए।

वैशाली ने बाद में कहा, “कार्थी अन्ना (Karthikeyan Murali) की वजह से मैंने अपना मन बदला। हमने लंबी बातचीत की, और उन्होंने मुझे ग्रैंड स्विस खेलने के लिए मनाया। मैं उनकी बहुत आभारी हूं।”

वैशाली की शानदार वापसी और ऐतिहासिक जीत

जब वैशाली ने ग्रैंड स्विस में खेलने का फैसला किया, तो किसी ने नहीं सोचा था कि वह अपने पिछले साल के खिताब की रक्षा कर पाएंगी।
लेकिन उन्होंने सबको गलत साबित कर दिया। आत्मविश्वास और संयम के साथ उन्होंने न केवल शानदार प्रदर्शन किया बल्कि Women’s Candidates 2026 में अपनी जगह पक्की कर ली।

टूर्नामेंट के दौरान कार्तिकेयन भी उसी स्थान पर प्रतिस्पर्धा कर रहे थे। वैशाली की जीत के बाद वे मुस्कुराते हुए बोले, “मुझे पहले से महसूस हो रहा था कि वह ट्रॉफी दोबारा उठाएगी।”

"I knew Vaishali will be Champion!" | How Karthikeyan motivated Vaishali to play Women's Grand Swiss

 पिता की सर्जरी से शतरंज की बिसात तक, कार्तिकेयन मुरली का सफर

26 वर्षीय कार्तिकेयन मुरली की कहानी भी उतनी ही प्रेरणादायक है। उन्होंने बताया कि जब वह केवल 9 या 10 साल के थे, तब उनके पिता की सर्जरी हुई थी और उन्हें कुछ दिनों के लिए बिस्तर पर रहना पड़ा।

कार्तिकेयन ने TimesofIndia.com से बातचीत में कहा, “उन दिनों हम घर पर कैरम, चेकर्स और चेस खेलते थे। धीरे-धीरे मुझे शतरंज से प्यार हो गया, और वहीं से मेरा सफर शुरू हुआ।”

ग्रैंडमास्टर कार्तिकेयन के संघर्ष के दिन

कार्तिकेयन का शुरुआती दौर आसान नहीं था। प्रतिभा तो थी, लेकिन आर्थिक सीमाएं बड़ी चुनौती बन गईं।

उन्होंने कहा, “कठिनाई शतरंज खेलने में नहीं थी, बल्कि उसमें आगे बढ़ने के लिए जरूरी संसाधन जुटाने में थी। परिवार को हर टूर्नामेंट और यात्रा का खर्च खुद उठाना पड़ता था। 2017 में नौकरी मिलने के बाद जाकर सब कुछ थोड़ा आसान हुआ।”

छोटे अवसर, बड़ा असर

कार्तिकेयन का मानना है कि चाहे संसाधन कितने भी कम हों, उनका सही उपयोग ही सफलता की कुंजी है।

उन्होंने कहा, “जब मैं छोटा था, तब मुझे Karsten Müller के एंडगेम DVDs मिली थीं। कुल पांच वॉल्यूम थे। उस समय ऐसा मैटीरियल मिलना बहुत मुश्किल था। मैंने उन पाठों को बार-बार देखा और समझा। कभी-कभी छोटी चीजें ही बड़ा फर्क लाती हैं।”

वैशाली के लिए कार्थी बने सच्चे “अन्ना”

वैशाली की ग्रैंड स्विस जीत सिर्फ उनकी नहीं थी। वह उस भरोसे और समर्थन की जीत भी थी जो कार्थिकेयन ने दिया। उन्होंने किसी कोच की तरह नहीं, बल्कि एक सच्चे “अन्ना” की तरह काम किया, जो तब साथ देता है जब बाकी सब पीछे हट जाते हैं।

आज कार्तिकेयन खुद एक सफल ग्रैंडमास्टर हैं, लेकिन उनके लिए सबसे बड़ी उपलब्धि यह है कि उन्होंने किसी और को दोबारा सपने देखने की ताकत दी।

‘कार्थी अन्ना’ की सादगी में छिपी महानता

कहानी का आरंभ एक पिता की सर्जरी से हुआ था और अंत एक विश्वस्तरीय जीत पर हुआ। कार्तिकेयन मुरली ने यह साबित कर दिया कि हर सफलता के पीछे केवल प्रतिभा नहीं, बल्कि संवेदना, समर्थन और सकारात्मकता की ताकत भी होती है।

उनकी शांत भूमिका ने वैशाली के करियर को नई दिशा दी और भारतीय शतरंज को एक और यादगार अध्याय दे दिया। वास्तव में, यही तो असली “अन्ना” होता है, जो अपने शब्दों से किसी को फिर से जीतना सिखा दे।

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Neetish Kumar Mishra Sports Digest Hindi में Editor के रूप में कार्यरत हैं और खेल पत्रकारिता में गहरा अनुभव रखते हैं। क्रिकेट, टेनिस, फुटबॉल और अन्य खेलों की बारीकियों पर उनकी पकड़ बेहद मजबूत है।

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