विश्व के लिए 1800 का दशक फुटबॉल के लिहाज से नया-नया सा था। चूकी इस दौर में हिंदुस्तान में अंग्रेजों का राज था तो इसलिए उन्होंने भारत की राजधानी के रूप में कलकत्ता में अंग्रेज बस्ती और ब्रटिश सेना की बैरकों के कारण यहां इस खेल का केंद्र बन गया। इस दौरान डुरंड कप, ट्रेड्स कप और आईएफए शील्ड जैसी फुटबॉल की लोकप्रिय प्रतियोगिताएं देश में चल रही थी। इसी सोच के तहत कोलकाता फुटबॉल लीग की भी शुरुआत की गई। इस वक्त दो स्तरीय फुटबॉल लीग का आयोजन करवाया जाता था। इसके शुरुआती 15 सीजन में सिर्फ अंग्रेजों ने हिस्सा लिया था। इस दौरान किसी भी भारतीय टीम को लीग में हिस्सा लेने का अधिकार नहीं था।

कलकत्ता फुटबॉल लीग (सीएफएल) सिर्फ भारत की ही नहीं बल्कि पूरे एशिया की सबसे पुरानी फुटबॉल लीग है। अगर विश्व स्तर पर बात करें तो दुनिया की सबसे पुरानी लीग इंग्लिश फुटबॉल लीग को माना जाता है। बता दें, इंग्लिश फुटबॉल लीग, कलकत्ता फुटबॉल लीग से मात्र 10 साल पहले शुरु हुई थी। CFL की शरुआत 1898 में हुई थी।

बाद में 1933 के आसपास सेना की टीम्स ने कलकत्ता एफसी में अपना दबदबा बनाया। ये ही वक्त था जब भारतीय फुटबॉल को लेकर लोगों के बीच माहौल बदलने लगा था। इसके बाद कोलकत्ता एफसी को सीसीएफसी के नाम से जाया गया। इसके बाद भारतीय फुटबॉल के जनक नागेंद्र प्रसाद का आगाज हुआ। नागेंद्र प्रसाद ही वो शक्स थे, जिन्होंने भारत में फुटबॉल क्रांति का आगाज किया।

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साल 2020 से स्पोर्ट्स पत्रकारिता में एक सिपाही के तौर पर कार्यरत हूं। प्रत्येक खेल में उसके सभी पहलुओं के धागे खोलकर आपके सामने रखने की कोशिश करूंगा। विराट व रोहित का बल्ला धोखा दे सकता है, लेकिन आपको यहां खबरों की विश्वसनियता पर कभी धोखा नहीं मिलेगा। बचपन से ही क्रिकेट के साथ-साथ अन्य खेलों में खास दिलचस्पी होने के कारण इसके बारे में लिखना बेहद पसंद है।

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