Monday, February 2

हॉकी भारत का राष्ट्रीय खेल होने के साथ-साथ दुनिया के प्राचीनतम खेलों में से एक है। भारत में भी हॉकी के इतिहास को काफी पुराना माना जाता है। कहा जाता है कि आजादी से पहले इस खेल को ब्रटिश खेलते थे और उन्हें देखकर हिंदुस्तानियों ने भी हॉकी खेलना सीखा। जानकारी के लिए बता दें कि उस वक्त भारतीय युवाओं का एक बड़ा समूह ब्रटिश शासन के अधीन काम करता था। ये ही कारण रहा कि वहीं से हिंदुस्तानियों की भी इस खेल के प्रति रूची जाग्रत हुई।

4 हजार साल पुराना है हॉकी

अगर बात करें हॉकी के शुरुआत की तो इसका अभी तक किसी ने सही अनुमान नहीं लगाया है। लेकिन इतिहासकारों की मानें तो इसकी आज से करीब 4 हजार साल पहले यूनान, अरब, इथोपिया और रोम जैसे देशों में इसको खेला जाता था और वहीं से हॉकी की शुरुआत हुई। हालांकि इसकी शुद्ध रुप से 19वीं शताब्दी के दौरान शुरुआत हुई। हॉकी को और ज्यादा सफल और आधुनिक बनाने का काम इंग्लैंड ने किया और इनको ही इस खेल के प्रचार-प्रसार का श्रेय दिया जाता है। 

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भारत का हॉकी इतिहास

ओलंपिक में भारतीय हॉकी टीम पहली बार साल 1928 में शामिल हुई थी और अपने पहले ही साल में भारतीय टीम ने गोल्ड मेडल से शानदार आगाज किया था। इसके बाद साल 1932,1936,1948, 1952 और 1956 में भी भारतीय टीम ने लगातार 5 गोल्ड अपने नाम कर इतिहास रच दिया। यही कारण है कि भारतीय टीम को ओलंपिक में सबसे सफल टीमों में से एक माना जाता है। बता दें कि दूसरे विश्व युद्ध के कारण 1940 और 1944 की ओलंपिक आयोजित नहीं हो पाया था। 1956 के बाद भारतीय टीम 1960 में रोम में हुए ओलंपिक में सिल्वर जीतने में कामयाब रही और इसके बाद 1968 व 1972 में ब्रॉज मेडल को भी अपने नाम किया।

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1970 के बाद भारतीय हॉकी के बुरे दिन

1970 के बाद भारतीय हॉकी अपने सबसे निचले स्तर पर जा रही थी, या यूं कहें कि भारतीय हॉकी का पतन हो रहा था। ये वो वक्त था जब भारत हॉकी में नीचे और यूरोप उपर जा रहा था। साल 1976 में चीजें इतनी बदल गई कि मांट्रियाल ओलंपिक में भारत 7वें स्थान पर खिसक गया। यह पहली बार था कि जब भारतीय टीम का हॉकी में इतना निराशाजनक प्रदर्शन रहा हो। भारतीय टीम का 2008 तक निराशाजनक प्रदर्शन जारी रहा और इसी वर्ष को हॉकी के दृष्टिकोण से सबसे बुरा साल माना जाता है। हांलाकि 2010 में भारतीय टीम कुछ हद तक वापसी होते हुए दिखाई दी जब उसने एशियन गेम्स में कांस्य पदक को अपने नाम किया।

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साल 2020 से स्पोर्ट्स पत्रकारिता में एक सिपाही के तौर पर कार्यरत हूं। प्रत्येक खेल में उसके सभी पहलुओं के धागे खोलकर आपके सामने रखने की कोशिश करूंगा। विराट व रोहित का बल्ला धोखा दे सकता है, लेकिन आपको यहां खबरों की विश्वसनियता पर कभी धोखा नहीं मिलेगा। बचपन से ही क्रिकेट के साथ-साथ अन्य खेलों में खास दिलचस्पी होने के कारण इसके बारे में लिखना बेहद पसंद है।

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