Saturday, June 20

हॉकी के जादूगर कहे जाने वाले मेजर ध्यानचंद का नाम भारत में बड़े ही सम्मान के साथ लिया जाता है। मेजर ध्यानचंद उन चंद लोगों में शुमार हैं जिन्होंने अपने क्षेत्र में अपार सफलता हासिल की। उन्होंने अपने जीवनकाल में हॉकी की दुनिया में ऐसे-ऐसे कारनामें किए जिसके बाद उनका नाम इतिहास के पन्नों में शुमार हो गया। मेजर ध्यानचंद के हॉकी कौशल का अंदाजा आप इसी बात से लगा सकते हैं कि जब भी वो मैदान पर उतरते थे। ऐसे में विरोधी टीम से सचमुच होश ठिकाने नहीं रहते थे। एक बार तो बात इस हद तक बढ़ गई कि नीदरलैंड में एक टूर्नामेंट के दौरान मेजर ध्याचंद की हॉकी स्टिक को तोड़ कर जांचा गया कि कहीं इसमें चुंबक तो नहीं लगी है।

अपने अगल अंदाज की हॉकी खेलने से भारतवासियों का दिल जीतने वाले मेजर ध्यानचंद का जन्म 29 अगस्त 1905 को इलाहाबाद में हुआ था। इसके बाद 16 साल की उम्र में वो सिपाही में भर्ती हो गए थे और यही वो वक्त था जब देश के लिए एक शानदार हॉकी का खिलाड़ी तैयार हो रहा था। बताया जाता है कि रेजीमेंट के सूबेदार मेजर तिवारी ने ही ध्याचंद को हॉकी खेलने के लिए प्रोतसाहित किया था। इसके बाद मेजर ध्यानचंद ने पीछे मुड़ कर नहीं देखा और देखते ही देखते वो भारत के लिए नहीं बल्कि पूरी दुनिया में हॉकी के सर्वश्रेष्ठ खिलाड़ी बन गए।

हॉकी में मेजर ध्यानचंद ने दिया अहम योगदान

भारतीय टीम ने पहली बार एम्सटर्डम ओलंपिक में हिस्सा लिया था और इस ओलंपक में भारतीय टीम मेजर ध्यानचंद के योगदान को कभी भुला नहीं सकती। एम्सटर्डम ओलंपिक के फाइनल में मेजर ध्यानचंद ने हॉलैंड के खिलाफ अंतिम तीन में दो गोल करके भारत को ऐतिहासिक गोल्ड मेडल देकर इतिहास रच दिया था। ठीक ऐसे ही लॉस एंजल्स ओलंपिक में भारत ने अमेरिका को 24-1 के भारी अतंर से हराया था। साल 1936 में मेजर ध्यानचंद ने भारतीय टीम की कमान संभाली थी। अपने शानदार खेल के दम पर इस बार भी भारतीय टीम ने जीत दर्ज की और भारतीय टीम ने हॉकी में मेडल की हेट्रिक लगा दी।

अपने कमाल के खेल कौशल के द्वारा विश्व स्तर पर भारत का नाम रोशन करने वाले मेजर ध्यानचंद को साल 1956 में पद्मभूषण से सम्मानित किया गया। जानकारी के लिए बता दें कि मेजर ध्यानचंद के जन्मदिन पर खेल दिवस मनाया जाता है।

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साल 2020 से स्पोर्ट्स पत्रकारिता में एक सिपाही के तौर पर कार्यरत हूं। प्रत्येक खेल में उसके सभी पहलुओं के धागे खोलकर आपके सामने रखने की कोशिश करूंगा। विराट व रोहित का बल्ला धोखा दे सकता है, लेकिन आपको यहां खबरों की विश्वसनियता पर कभी धोखा नहीं मिलेगा। बचपन से ही क्रिकेट के साथ-साथ अन्य खेलों में खास दिलचस्पी होने के कारण इसके बारे में लिखना बेहद पसंद है।

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