Cricket Kenya Ex Chairman Manoj Patel and Treasurer Kennedy Obuya Summoned By DCI: क्रिकेट केन्या का प्रशासनिक विवाद अब एक अलग ही मोड़ पर पहुंच गया है। शुक्रवार को केन्या की जांच एजेंसी डायरेक्टरेट ऑफ क्रिमिनल इन्वेस्टिगंस (DCI) ने बोर्ड के पूर्व अध्यक्ष मनोज पटेल और हाल ही में अविश्वास प्रस्ताव के जरिए एक्टिंग ट्रेजरर के पद से हटाए गए कैनेडी ओबुया को आधिकारिक तौर पर समन भेजा है। उन्हें यह समन साल 2024 में कुछ वित्तीय गड़बड़ियों के चलते भेजा गया है, जिसमें एजेंसी को मनी लॉन्ड्रिंग का भी शक है।
बता दें कि, यह मामला सिर्फ पैसों की निकासी या वित्तीय गड़बड़ियों तक ही सीमित नहीं है, बल्कि क्रिकेट केन्या की प्रशासनिक विश्वसनीयता, गवर्नेंस और इंटरनेशनल क्रिकेट काउंसिल (ICC) के भरोसे से भी जुड़ा हुआ है। इस समन के पीछे की कहानी पिछले कुछ महीनों में हुई घटनाओं से भी जुड़ी हुई है।
DCI ने भेजा यह समन
क्रिकेट केन्या में लंबे समय से चले आ रहे विवाद आखिरकार अब कानूनी स्तर तक पहुंच गए हैं। केन्या की जांच एजेंसी आपराधिक जांच निदेशालय (Directorate of Criminal Investigations) ने बोर्ड के पूर्व अध्यक्ष मनोज पटेल और ट्रेजरर कैनेडी ओबुया को औपचारिक समन भेजा है।
दरअसल, DCI ने शुक्रवार को राष्ट्रीय पुलिस सेवा अधिनियम संख्या 11ए, 2011 की धारा 52(1) के तहत एक समन जारी किया है, जो क्रिकेट केन्या की वित्तीय वर्ष 2024 की संपत्ति से जुड़े लगभग 26,758,114 केन्याई शिलोंग (1,83,88,149 भारतीय रुपये) की अवैध निकासी और उपयोग से संबंधित चोरी (दंड संहिता धारा 283) और मनी लॉन्ड्रिंग के आरोपों की जांच के लिए है।
इस समन में पूर्व अध्यक्ष मनोज पटेल को 3 अक्टूबर 2025 को सुबह 10:00 बजे और ट्रेजरर कैनेडी ओबुया को 2 अक्टूबर 2025 को सुबह 10:00 बजे किम्बू रोड स्थित DCI मुख्यालय में उपस्थित होने का आदेश दिया गया है। इसमें साफ चेतावनी भी दी गई है कि, इस समन की अवहेलना करने पर राष्ट्रीय पुलिस सेवा अधिनियम की धारा 52(2) के तहत कानूनी कार्रवाई की जाएगी। बता दें कि, यह जांच गंभीर अपराध इकाई के प्रभारी हिलेरी मुताई, SSP, DCI मुख्यालय द्वारा की जा रही है।
पहले से ही विवादों में घिरी है क्रिकेट केन्या
हालाँकि, यह कोई नई बात नहीं है, जब क्रिकेट केन्या या उसके अधिकारी किसी विवादों में घिरे हैं। इससे पहले पिछले कई महीनों से कई बड़े विवाद सामने आए हैं, जिसको लेकर अन्तर्राष्ट्रीय स्तर पर उनकी काफी आलोचना भी की जा रही है। लीग के नाम पर धन उगाही, बोर्ड में उथल-पुथल, आपसी टकराव और पैसे की धोखाधड़ी जैसे कई मामलों ने पहले ही बोर्ड की छवि ख़राब कर दी है।
गौरतलब हो कि, अगस्त 2024 में क्रिकेट केन्या ने एसए इवेंट वर्क्स (SA Event Worx) के साथ मिलकर केन्या ब्लास्टर लीग (KBL) शुरू करने का ऐलान किया था। इस फ्रेंचाइजी आधारित टी20 लीग को भारत में होने वाले IPL की तर्ज पर बनाया जा रहा था।
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SA Event Worx के CEO हेमंत शर्मा और केन्या क्रिकेट के उस समय के चेयरमैन मनोज पटेल ने मिलकर इसे लॉन्च किया था। उन्होंने मई-जून 2025 के आसपास के समय में केन्या ब्लास्टर लीग शुरू करने की योजना भी बनाई थी। लेकिन कुछ ही हफ्तों बाद क्रिकेट केन्या ने पलटी मार दी और कहा कि उसने इस लीग को कभी मंजूरी ही नहीं दी थी।
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इसके चलते SA Event Worx को भारी वित्तीय और साख का नुकसान हुआ और यह मामला कानूनी लड़ाई तक भी पहुंच गया। उसी समय जब एसए इवेंट वर्क्स ने आईसीसी में इसकी शिकायत की और कई मंचों पर खुलकर इसकी आलोचना करने लगे, तो तत्कालीन अध्यक्ष मनोज पटेल ने भारत और दुबई आधारित इवेंट कम्पनी एरीना ऑफ स्पोर्ट्स (AOS) के साथ कॉन्ट्रैक्ट साइन कर लिया और CKT20 के नाम से एक एक लीग की घोषणा कर दी।
इसके बाद, एसए इवेंट वर्क्स ने जब कानूनी सहारा लिया, तो बोर्ड ने तत्कालीन अध्यक्ष मनोज पटेल को भी उनके पद से हटा दिया गया और खुद अपना पल्ला झाड़ लिया। हालाँकि, SA इवेंट वर्क्स के साथ केन्या ब्लास्टर लीग (KBL) के लिए पहले से हुई साझेदारी और शिकायत की वजह से CKT20 लीग को ICC की मजूरी नहीं मिल सकी।
CKT20 को ICC से मंजूरी ना मिलने पर, सितंबर 2025 के दूसरे हफ्ते में क्रिकेट केन्या बोर्ड ने आधिकारिक रूप से AOS के साथ करार खत्म करने का ऐलान भी कर दिया। इस दौरान CEO रोनाल्ड बुकुसी ने साफ किया था कि बोर्ड ने यह फैसला बहुमत से लिया है और कंपनी द्वारा दी गई 25,000 यूएस डॉलर की शुरुआती राशि भी वापस नहीं की जाएगी। यानी केन्या ब्लास्टर लीग के बाद केन्या क्रिकेट ने एरीना ऑफ स्पोर्ट्स के साथ भी धोखेबाजी कर दी।
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SA इवेंट वर्क्स के CEO हेमंत शर्मा ने क्रिकेट केन्या को बताया ‘पलटीमार’
केन्या ब्लास्टर लीग के लिए क्रिकेट केन्या के साथ कॉन्ट्रैक्ट कर चुकी कम्पनी SA इवेंट वर्क्स के CEO हेमंत शर्मा ने बोर्ड को ‘पलटीमार’ बताया। इसके साथ ही साथ, उन्होंने तत्कालीन अध्यक्ष मनोज पटेल पर लीग की मंजूरी के बदले पैसे मांगने का भी आरोप लगाया।
उन्होंने कहा, “हमने क्रिकेट केन्या के साथ 3,60,000 डॉलर की पक्की डील की थी। कॉन्ट्रैक्ट में साफ लिखा था कि स्पॉन्सरशिप, टिकट बेचने और मर्चेंडाइज़ (जर्सी-टीशर्ट आदि) से जो कमाई होगी, उसमें हमारी हिस्सेदारी होगी। सब कुछ कागज़ पर था, लेकिन कॉन्ट्रैक्ट साइन करने के बाद क्रिकेट केन्या पलट गया और ऐसे दिखाने लगा जैसे कोई समझौता हुआ ही नहीं था।
बातचीत के दौरान उस समय के अध्यक्ष मनोज पटेल ने हमसे केन्या ब्लास्टर लीग को मंजूरी देने के बदले अपने लिए पैसे मांगे। इस पर हमने साफ मना कर दिया, क्योंकि हमारा मकसद रिश्वत देना नहीं बल्कि खेल को आगे बढ़ाना था। बस यहीं से टकराव शुरू हुआ। बाद में बोर्ड ने सारा दोष कभी [मनोज] पटेल पर, तो कभी अपने ही स्टाफ पर डालना शुरू कर दिया।
शर्मा ने क्रिकेट केन्या पर तीखी टिप्पणी करते हुए कहा, “सच्चाई ये है कि क्रिकेट केन्या की पार्टनर्स और निवेशकों को धोखा देने की आदत बन गई है। वह पहले बड़े-बड़े वादे करते हैं, कॉन्ट्रैक्ट साइन करते हैं और फिर पलट जाते हैं। आखिर में बाकी सबको ही आर्थिक और सामाजिक नुकसान उठाना पड़ता है। मेरा मानना है कि, क्रिकेट केन्या एक ‘पलटीमार’ क्रिकेट बोर्ड है, जहाँ लगभग हर व्यक्ति भ्रष्टाचार में लिप्त है।”
Sports Digest की खबरें वायरल होने के बाद केन्या की मीडिया ने भी ली सुध
Sports Digest पिछले कई महीनों से क्रिकेट केन्या की खामियों और भ्रष्टाचार को उजागर करने का प्रयास कर रहा है। शुरू में केन्या की स्थानीय मीडिया ने इन खबरों को तरजीह नहीं दी, लेकिन जब हमारी वेब आउटलेट ने इन खबरों को प्रमुखता से छापा और बोर्ड के भ्रष्टाचार की कहानी देश के लोगों के सामने पहुँची, तो फिर मजबूरन वहाँ की मीडिया ने भी इस खबर पर थोड़े-बहुत अपडेट देने शुरू किए।
लगातार खबरों का सिलसिला चलने के बाद धीरे-धीरे सभी जानकारी लोगों के सामने आई, जिसके बाद केन्या की जांच एजेंसी DCI ने भी अब पूर्व अध्यक्ष मनोज पटेल और ट्रेजरर केनेडी ओबुया को एक साल पहले किए गए एक ट्रांजैक्शन के मामले में समन भेजा है। माना जा रहा है कि, एजेंसी आगे कुछ अन्य मामलों में भी उनसे पूछताछ कर सकती है और क्रिकेट केन्या को भी अन्तर्राष्ट्रीय स्तर पर कई कठिनाइयों का सामना करना पड़ सकता है।
समन के मायने और आगे की राह
क्रिकेट केन्या में पिछले कुछ महीनों से चल रही उथल-पुथल अब कानूनी जांच तक पहुंच गई है। मनोज पटेल और कैनेडी ओबुया को मिला समन यह साफ करता है कि गवर्नेंस संकट केवल आंतरिक विवाद नहीं, बल्कि राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर गंभीर चिंता का विषय है।
अब यह देखना होगा कि मनोज और ओबुया से जांच एजेंसी कौन-कौन से सवाल करती है और वह इन चुनौतियों से कैसे बाहर निकलते हैं। बीते कुछ महीनों से क्रिकेट केन्या बोर्ड में चल रही उथल-पुथल ने पहले से ही क्रिकेट फैंस को सोचने पर मजबूर कर दिया है और ऐसे में एक पूर्व अध्यक्ष और ट्रेजरर पर मनी लॉन्ड्रिंग का आरोप लगना अपने आप में एक सोचनीय विषय है।
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