हम सभी लोगों को शुरू से ही स्कूल और कॉलेज में यही बताया जाता है कि भारत का राष्ट्रीय खेल हॉकी है। लेकिन आएदिनों कुछ विवादों के बीच कई लोगों के मन में हॉकी बनाम राष्ट्रीय खेल को लेकर संशय बना हुआ है।
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जब भी इस खेल का आयोजन होता है तो फैंस काफी बड़ी संख्या में मैच देखने के लिए पहुंचते हैं। ओलंपिक में हॉकी ने 1908 में कदम रखा था और तब से लगातार कई देश इसके आयोजन में बढ़-चढ़कर हिस्सा लेते आए हैं।
भारत का राष्ट्रीय खेल हॉकी को ही मन जाता है। क्यूंकि एक समय में भारत का हॉकी में काफी दबदवा हुआ करता था। आइये जानते है इस समय कौन से भारतीय हॉकी खिलाडी है जो बचा सकते है भारत की गरिमा।
अगर बात करें हॉकी के शुरुआत की तो इसका अभी तक किसी ने सही अनुमान नहीं लगाया है। लेकिन इतिहासकारों की मानें तो इसकी आज से करीब 4 हजार साल पहले यूनान, अरब, इथोपिया और रोम जैसे देशों में इसको खेला जाता था और वहीं से हॉकी की शुरुआत हुई।
बता दें, इस साल पेरिस में होने वाले ओलंपिक खेलों के लिए भारतीय महिला टीम के क्वालीफाई नहीं करने के बाद से शोपमैन को लगातार आलोचनाओं का सामना करना पड़ रहा था।
महज 16 साल की उम्र में ध्यानचंद भारतीय सेना में शामिल हो गए थे। इसके बाद ही उन्होंने हॉकी खेलना शुरु किया। मेजर ध्यानचंद ने जैसे ही हॉकी की दुनिया में कदम रखा वैसे ही एक के बाद एक रिकॉर्ड बनाते गए।
उन्होंने 42 साल तक हॉकी खेला और इस दौरान नए-नए किर्तीमान स्थापित किए। ‘हॉकी के जादूगर’ के नाम से प्रसिद्ध मेजर ध्यानचंद का जन्म 29 अगस्त 1905 को इलाहबाद में हुआ था
अपने कमाल के खेल कौशल के द्वारा विश्व स्तर पर भारत का नाम रोशन करने वाले मेजर ध्यानचंद को साल 1956 में पद्मभूषण से सम्मानित किया गया था। जानकारी के लिए बता दें कि मेजर ध्यानचंद के जन्मदिन पर खेल दिवस मनाया जाता है।
मेजर ध्यानचंद के हॉकी कौशल का अंदाजा आप इसी बात से लगा सकते हैं कि जब भी वो मैदान पर उतरते थे। ऐसे में विरोधी टीम से सचमुच होश ठिकाने नहीं रहते थे।
ज्ञानभारती पुलिस के मुताबिक वरुण कुमार और पीड़ित लड़की एक-दूसरे को सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म इंस्टाग्राम के माध्यम से एक दूसरे को जानते थे। जब पीड़िता महज 17 साल की थी, उस समय वरुण उसको SAI में प्रशिक्षण दे रहे थे।
