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जितनी हमारे देश की आबादी है और जिस तरह की प्रतिभा यहां पर मौजूद है, उसके हिसाब से ओलंपिक में हमारा प्रदर्शन नहीं होता है। इस बात का जवाब किसी के पास नहीं है कि आखिर दुनिया की सबसे ज्यादा आबादी वाले देश की झोली में ओलंपिक जैसे अहम इवेंट में पदक उस हिसाब क्यों नहीं आ पाते जितने आने चाहिए। 

Pro Hockey League: एफआईएच प्रो हॉकी लीग में भारतीय पुरुष हॉकी टीम ने अर्जेंटीना को शूटआउट में 5-4 से हरा दिया है। जबकि भारतीय महिला हॉकी टीम को अर्जेंटीना के हाथों 0-5 से करारी हार का सामना करना पड़ा।

Indian men’s hockey junior team : भारतीय पुरुष जूनियर हॉकी टीम ने बेल्जियम को पेनल्टी शूट आउट के जरिये हराकर यूरोप दौरे का शानदार विजयी आगाज किया | भारतीय उप – कप्तान शारदानंद तिवारी के दो गोल की मदद से भारतीय टीम जीतने में कामयाब रही |

हम सभी लोगों को शुरू से ही स्कूल और कॉलेज में यही बताया जाता है कि भारत का राष्ट्रीय खेल हॉकी है। लेकिन आएदिनों कुछ विवादों के बीच कई लोगों के मन में हॉकी बनाम राष्ट्रीय खेल को लेकर संशय बना हुआ है।

जब भी इस खेल का आयोजन होता है तो फैंस काफी बड़ी संख्या में मैच देखने के लिए पहुंचते हैं। ओलंपिक में हॉकी ने 1908 में कदम रखा था और तब से लगातार कई देश इसके आयोजन में बढ़-चढ़कर हिस्सा लेते आए हैं।

भारत का राष्ट्रीय खेल हॉकी को ही मन जाता है। क्यूंकि एक समय में भारत का हॉकी में काफी दबदवा हुआ करता था। आइये जानते है इस समय कौन से भारतीय हॉकी खिलाडी है जो बचा सकते है भारत की गरिमा।

अगर बात करें हॉकी के शुरुआत की तो इसका अभी तक किसी ने सही अनुमान नहीं लगाया है। लेकिन इतिहासकारों की मानें तो इसकी आज से करीब 4 हजार साल पहले यूनान, अरब, इथोपिया और रोम जैसे देशों में इसको खेला जाता था और वहीं से हॉकी की शुरुआत हुई।

बता दें, इस साल पेरिस में होने वाले ओलंपिक खेलों के लिए भारतीय महिला टीम के क्वालीफाई नहीं करने के बाद से शोपमैन को लगातार आलोचनाओं का सामना करना पड़ रहा था।

महज 16 साल की उम्र में ध्यानचंद भारतीय सेना में शामिल हो गए थे। इसके बाद ही उन्होंने हॉकी खेलना शुरु किया। मेजर ध्यानचंद ने जैसे ही हॉकी की दुनिया में कदम रखा वैसे ही एक के बाद एक रिकॉर्ड बनाते गए।