Simon Doull: IPL में युवा टैलेंट्स की कोई कमी नहीं है लेकिन क्या हर टैलेंट को बराबर मौका और सम्मान मिलता है? ये सवाल अब धीरे-धीरे ज़ोर पकड़ता जा रहा है और इसकी वजह बना है LSG का यंग स्टार स्पिनर दिग्वेश राठी। इस सीज़न में ना सिर्फ उन्होंने विकेट चटकाए हैं, बल्कि हर विकेट के साथ उनका सिग्नेचर “नोटबुक” सेलिब्रेशन भी चर्चा में रहा है। लेकिन शायद यही स्टाइल उन्हें भारी पड़ रहा है।
BCCI ने अब तक दो बार उन पर जुर्माना लगाया है और कुल रकम 5.6 लाख रुपये पार कर चुकी है और अब इसी बात को लेकर न्यूजीलैंड के पूर्व क्रिकेटर और जाने-माने कमेंटेटर साइमन डूल ने BCCI को कटघरे में खड़ा कर दिया है। आइए जानते हैं उन्होंने क्या कहा है।
क्या सिर्फ कमजोर खिलाड़ियों को ही टारगेट किया जाता है?

साइमन डूल का साफ कहना है कि, “मैंने विराट कोहली, हार्दिक पंड्या जैसे कई सीनियर खिलाड़ियों को इससे भी ज्यादा एग्रेसिव सेलिब्रेशन करते देखा है लेकिन उन पर कोई ऐक्शन नहीं होता, तो फिर राठी पर क्यों? क्या सिर्फ इसलिए क्योंकि वो नया नाम, कम जाना-पहचाना चेहरा है।”
डूल की ये बात सिर्फ एक एक्सपर्ट की राय नहीं, बल्कि IPL में बराबरी और निष्पक्षता को लेकर उठता एक गंभीर सवाल है।
नोटबुक सेलिब्रेशन की असली कहानी

राठी ने जब पंजाब किंग्स के बल्लेबाज़ प्रियांश आर्या को आउट किया था, तब पहली बार उनका ‘नोटबुक’ सेलिब्रेशन देखा गया। बाद में खुलासा हुआ कि प्रियांश और राठी अच्छे दोस्त हैं, और ये सिर्फ दोस्ताना मस्ती थी। लेकिन BCCI ने इसे “अनुचित व्यवहार” मानते हुए 25% मैच फीस का जुर्माना और एक डिमेरिट पॉइंट दे डाला।
इसके बाद जब उन्होंने मुंबई इंडियंस के नमन धीर को आउट किया और फिर वही सेलिब्रेशन दोहराया, तो इस बार 50% फीस और 2 डिमेरिट पॉइंट मिल गए। यानि अब राठी पर लेवल 1 का दूसरा उल्लंघन दर्ज हो चुका है।
राठी ने सीखा सबक, लेकिन सवाल वहीं का वहीं
KKR के खिलाफ मैच में राठी ने समझदारी दिखाई, उन्होंने सेलिब्रेशन तो किया लेकिन बिना किसी खिलाड़ी की ओर इशारा किए। यानि नियम का पालन भी किया और अपनी पहचान भी बनाए रखी। लेकिन सवाल ये है कि क्या हर युवा खिलाड़ी पर इतना ही दबाव बनाना ज़रूरी है।
क्या BCCI को अपने रवैये पर दोबारा सोचना चाहिए?
जब विराट कोहली मैदान में ज़ोर से चिल्लाते हैं, हार्दिक पंड्या अग्रेसिव पॉज़ देते हैं, तब लोग कहते हैं, “फायर है” लेकिन जब कोई नया खिलाड़ी थोड़ा हटकर करता है तो उसे जुर्माना और चेतावनी क्यों दिया जाता है।
क्रिकेट सिर्फ नियमों से नहीं चलता, ये जुनून, जज़्बात और उस अंदाज़ से भी बनता है जिससे खिलाड़ी पहचान बनाते हैं और अगर हर नए चेहरे को ‘उदाहरण’ बनाकर दबा दिया जाएगा, तो फिर IPL का असली मकसद टैलेंट को मंच देना कहां जाएगा। अन यह देखना दिलचस्प रहेगा कि आने वाले मुकाबलों में ये युवा खिलाड़ी अपने सेलिब्रेशन स्टाइल को बदलता है या फिर कुछ और भी देखने को मिलता है।
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