Friday, March 20

भारतीय क्रिकेट टीम की जर्सी पर किसी भी कंपनी का ब्रांड नाम नजर आना और टीम को स्पॉन्सर करना गर्व की बात होती है। मगर देखा गया है कि 21वीं सदी में जिन भी कंपनियों ने टीम इंडिया की जर्सी की मुख्य स्पॉन्सरशिप हासिल की, वे किसी न किसी कानूनी या वित्तीय विवाद में फंस गईं और उनका क्रेडिबिलिटी लेवल भी गिर गया। ठीक ऐसा ही हाल ड्रीम11 के साथ भी हुआ है।

हाल ही में राज्यसभा और लोकसभा से ऑनलाइन गेमिंग बिल के पारित होने के बाद ड्रीम11 भी बंद होने के कगार पर आ गई है। इसी के साथ, इस आर्टिकल में हम उन्हीं कंपनियों पर एक नजर डालेंगे, जो टीम इंडिया का स्पॉन्सर बनने के बाद डूब गईं।

ये कम्पनियाँ टीम इंडिया की जर्सी का स्पॉन्सर बनने के बाद डूब गईं

1. आईटीसी (1993-2001)

वो कम्पनियाँ जो टीम इंडिया का स्पॉन्सर बनने के बाद डूब गईं

1993 में विल्स कंपनी ने पहली बार भारतीय टीम की जर्सी की स्पॉन्सरशिप हासिल की। यह साझेदारी लगभग आठ सालों तक चली। आईटीसी, जो कि विल्स का हिस्सा था, भारतीय क्रिकेट का चेहरा बने और उन्होंने दो विश्व कप सहित कई अन्य आयोजनों को स्पॉन्सर किया। लेकिन सरकार ने तंबाकू कंपनियों के ब्रांड विज्ञापनों पर प्रतिबंध लगा दिया, जिसके चलते उन्हें स्पॉन्सरशिप छोड़नी पड़ी। इस घटना से पता चला कि सख्त नियम स्पॉन्सरशिप को भी प्रभावित कर सकते हैं।

2. सहारा (2001-2013)

वो कम्पनियाँ जो टीम इंडिया का स्पॉन्सर बनने के बाद डूब गईं

सहारा सबसे लंबे समय तक भारतीय टीम की जर्सी का स्पॉन्सर रही। लगभग 12 साल तक यह ब्रांड टीम इंडिया की जर्सी पर नजर आया। सहारा ग्रुप 2007 और 2011 वर्ल्ड कप में मुख्य स्पॉन्सर के रूप में भी शामिल रहा। इस दौरान कंपनी ने अपने निवेशकों से 24,000 करोड़ रुपये जुटाए, लेकिन SEBI ने कहा कि यह पैसा गलत तरीके से लिया गया और नियमों का उल्लंघन हुआ।

इसके बाद, 2012 में सुप्रीम कोर्ट ने निर्देश दिया कि यह पैसा वापस किया जाए। नियमों का पालन न करने के आरोप में 2014 में कंपनी के CEO सुब्रत रॉय को गिरफ्तार कर लिया गया और इसके चलते सहारा कंपनी बर्बाद हो गई।

3. स्टार इंडिया (2014-2017)

वो कम्पनियाँ जो टीम इंडिया का स्पॉन्सर बनने के बाद डूब गईं

सहारा के बाद बीसीसीआई ने 2014 से 2017 तक स्टार इंडिया को अपना स्पॉन्सर बनाया। लेकिन इसी दौरान इस ब्रांड की परेशानियाँ बढ़ने लगीं। वॉल्ट डिज़्नी के स्वामित्व वाली इस कंपनी पर बाज़ार में अपने दबदबे का गलत इस्तेमाल करने के आरोप लगे। धीरे-धीरे इसकी पकड़ कमजोर पड़ गई और अंततः इसे जियो के साथ मिलना पड़ा। वर्तमान समय में इस कंपनी का प्रभाव बहुत कम रह गया है।

4. ओप्पो (2017-2019)

वो कम्पनियाँ जो टीम इंडिया का स्पॉन्सर बनने के बाद डूब गईं

ओप्पो ने बीसीसीआई के साथ एक रिकॉर्ड-तोड़ डील किया था, जिसकी कीमत 1,079 करोड़ रुपये थी और यह 3 साल तक मुख्य स्पॉन्सर पार्टनर रहा। इस दौरान नोकिया और इंटरडिजिटल के साथ पेटेंट विवादों के बाद इस कंपनी ने भारतीय टीम की स्पॉन्सरशिप से अपना नाम वापस ले लिया। इसके परिणामस्वरूप कंपनी को काफी हानि झेलनी पड़ी।

5. बायजू (2020-22)

वो कम्पनियाँ जो टीम इंडिया का स्पॉन्सर बनने के बाद डूब गईं

ओप्पो मोबाइल्स के साथ जितनी राशि का अनुबंध था, उतनी ही मूल्य पर बायजू के साथ भी स्पॉन्सरशिप का सफर शुरू हुआ। यह अनुबंध 2023 में समाप्त हो गया। स्पॉन्सरशिप मिलने के बाद कंपनी घाटे में चली गई। इसकी वैल्यू 2022 तक 22 अरब डॉलर थी, जो बाद में लगभग शून्य हो गई। कंपनी के पास बीसीसीआई को भुगतान करने के लिए पैसे नहीं थे। इस कारण बीसीसीआई ने 158 करोड़ रुपये की वसूली के लिए राष्ट्रीय कंपनी कानून अपीलीय न्यायाधिकरण (NCLAT) का दरवाजा खटखटाया।

6. ड्रीम11

वो कम्पनियाँ जो टीम इंडिया का स्पॉन्सर बनने के बाद डूब गईं

बीसीसीआई ने ड्रीम11 से 158 अंतर्राष्ट्रीय मैचों के लिए 358 करोड़ रूपये प्रतिवर्ष का करार किया था। इस करार के तहत बीसीसीआई को हर एक द्विपक्षीय मैच के लिए 3 करोड़ रूपये और प्रत्येक आईसीसी मैच के लिए 1 करोड़ रूपये मिलते थे। 2021–22 में इस स्पॉन्सर कंपनी पर 1,200 करोड़ रुपये की GST टैक्स चोरी का आरोप भी लगा। हालाँकि, नया ऑनलाइन गेमिंग बिल आने के बाद यह कंपनी भी अब घाटे में चली जाएगी।

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मैं हिंदी कंटेंट राइटर, SEO एक्सपर्ट और डिजिटल मीडिया स्पेशलिस्ट हूं। मुझे फीचर राइटिंग और सोशल मीडिया कंटेंट प्रोडक्शन में काफी दिलचस्पी है। मैंने सेंट्रल यूनिवर्सिटी ऑफ हिमाचल प्रदेश से एम.ए. इन जर्नलिज्म एंड न्यू मीडिया की पढ़ाई की है। अपने करियर की शुरुआत सिद्धिविनायक टाइम्स में जूनियर हिंदी कंटेंट राइटर के रूप में की और वर्तमान में ABC वर्ल्ड मीडिया में स्पोर्ट्स और गेमिंग कंटेंट राइटर के पद पर कार्यरत हूं।

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