भारत की पहली जूनियर विश्व चैंपियन वेटलिफ्टर हर्षदा गरुड़ समेत 27 सदस्यीय टीम रूस गई हुई है और अब हिंदुस्तान के इन युवा वेटलिफ्टरों को वहां पर परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। कारण इस टीम को बिना पैसे के इस दौरे के लिए भेजना है। अभी ये भारतीय दल मॉस्को स्थित चेखोव स्पोस्ट्स बेस में अपनी तैयारी कर रहा है और अब रूसी वेटलिफ्टिंग संघ ने साफ कर दिया है कि यदि आने वाले बृहस्पतिवार तक 40 हजार पांच सौ अमेरिकी डॉलर नहीं दिए गए तो उन्हें मजबूरी में भारतीय टीम का खाना बंद करना पड़ेगा। बता दें कि ये धनराशी भारतीय रुपये में करीब 33 लाख रूपये होती है।
इसके बाद अब SAI (Sports Authority of India) ने खिलाड़ियों के लिए जल्द से जल्द पैसे भेजने के लिए विदेश मंत्रालाय से मदद मांगी है। SAI के महानिदेशक संदीप प्रधान ने विदेश मंत्रालय के यूरेशिया विभाग के संयुक्त सचिव को पत्र लिखकर मास्को में भारतीय दूतावास के जरिए भारतीय वेटलिफ्टरों के लिए अमेरिकी डॉलर की व्यवस्था के लिए पत्र लिख दिया है।
जैसे ही भारतीय वेटलिफ्टरों के साथ हो रही परेशानी का मामला संज्ञान में आया तो हड़कंप मच गया। इसके बाद कोच ने फौरी तौर पर को ने SAI को इस समस्या से अवगत कराया। इसके बाद ये मामला साई के संज्ञान में आया तो इसके बाद इस बात पे बवाल मच गया कि आखिर बिना पैसे के टीम के इस दौरे के लिए कैसे भेजे गया और इसके लिए कौन जिम्मेदार है? ये ही कारण रहा कि साई के महानिदेशक संदीप प्रधान व टॉप्स सीईओ पुष्पेंद्र गर्ग ने विदेश मंत्रालय के संयुक्त सचिव ने मास्को स्थित भारतीय दूतावास से संपर्क कर भारतीय टीम को 40,500 अमेरिकी डॉलर उपलब्ध कराए जाने के लिए आवेदन किया।







