विंबलडन टेनिस चैंपियनशिप में दुनिया के सभी खिलाड़ियों की नजर होती है और उनका सपना होता है कि एक बार इस प्रतिष्ठित टेनिस टूर्नामेंट में उन्हें खेलने का मौका मिल सके। हर टेनिस प्लेयर का ख्वाब होता है कि विंबलडन टेनिस चैंपियनशिप की ट्रॉफी को अपने नाम करे। स्विटजरलैंड के रोजर फेडरर ने पुरुषों में सबसे ज्यादा बार इस ट्रॉफी को अपने नाम किया है और महिलाओं के लिहाज से अमेरिका की मार्टिना नवरातिलोवा ने विंबलडन चैंपयनशिप को सबसे ज्यादा बार अपने नाम किया है।

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दो बार हुई है स्थगित

विबंडलडन चैंपियनशिप के इतिहास में अब तक दो बार इसको स्थगित करना पड़ा है। पहली बार साल 1945 में दूसरे विश्व युद्ध के दौरान और इसके बाद कोरोना काल के वक्त साल 2020 में इसको रद्द करना पड़ा था।

1877 में हुई थी शुरुआत

विंबलडन चैंपियनशिप की शुरुआत 9 जुलाई 1877 में हुई थी। ये वो वक्त था जब केवल इसमें मेंस सिंगल्स के मैच ही खेले जाते थे और इसे द जेंटलमेंस सिंगल्स टूर्नामेंट के नाम से पुकारा जाता था।

 स्पेंसर गोरे बने पहले विंबलडन चैंपियन

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विंबलडन चैंपियनशिप की शुरुआती साल में दुनियाभर के कुल 22 खिलाड़ियों ने हिस्सा लिया था और पहले ही साल में ब्रिटेन के स्टार खिलाड़ी स्पेंसर गोरे ने ने इस शानदार ट्रॉफी को अपने नाम कर अपने देश को खुशी से झूमने पर मजबूर कर दिया। अगर बात करें इसके नाम की तो बता दें कि लंदन में विंबलडन नाम की एक जगह है और इसी जगह के नाम पर इस चैंपिनशिप का नाम रखा गया है।

विंबलडन चैंपियनशिप के शुरुआती चरण में यानी 19वीं और 20वीं शताब्दी के दौरान ब्रिटिश खिलाड़ियों ने अपना दबदबा बनाए रखा, लेकिन इसके बाद फ्रांस, अमेरिका और स्विटजरलैंड जैसे देशों नें इसमें पकड़ बना ली। इस चैंपियनशिप की सबसे खास बात जो इसे सबसे अगल बनाती है, वो ये है कि यहां पर ऑल व्हाइट का रूल है। जिसका मतलब हुआ कि इसके प्रत्येक खिलाड़ी को मैच के दौरान सफेद कपड़ों में उतरना होता है, लेकिन वो अपनी लिबाज में किसी कंपनी के ब्रांड के साइन को लगा सकता है।

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साल 2020 से स्पोर्ट्स पत्रकारिता में एक सिपाही के तौर पर कार्यरत हूं। प्रत्येक खेल में उसके सभी पहलुओं के धागे खोलकर आपके सामने रखने की कोशिश करूंगा। विराट व रोहित का बल्ला धोखा दे सकता है, लेकिन आपको यहां खबरों की विश्वसनियता पर कभी धोखा नहीं मिलेगा। बचपन से ही क्रिकेट के साथ-साथ अन्य खेलों में खास दिलचस्पी होने के कारण इसके बारे में लिखना बेहद पसंद है।

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