भारतीय क्रिकेट टीम को दुनिया की सबसे ज़्यादा क्रिकेट प्रेमियों द्वारा फॉलो की जाने वाली टीम के रूप में जाना जाता है। करोड़ों प्रशंसक इस टीम और उसके खिलाड़ियों को केवल भारत ही नहीं, बल्कि पूरी दुनिया में पसंद करते हैं। यह कहना गलत नहीं होगा कि भारत के खिलाड़ी आज वैश्विक स्तर पर सबसे लोकप्रिय और सबसे ज़्यादा डिमांड वाले क्रिकेटरों में शामिल हैं।
टीम इंडिया की लोकप्रियता का सबसे बड़ा कारण उसकी लगातार मिल रही सफलताएँ, ऐतिहासिक जीतें और खिलाड़ियों का शानदार प्रदर्शन है। इस लोकप्रियता को देखते हुए आज कई बड़ी कंपनियाँ इस टीम का स्पॉन्सर बनने की इच्छा रखती हैं। ड्रीम11 के पीछे हटने के बाद से कयास लगाए जा रहे हैं कि आखिर टीम इंडिया की जर्सी पर अब किस कंपनी का नाम दिखाई देगा।
इंडियन क्रिकेट टीम के स्पोंसर्स की लिस्ट
6. ड्रीम11 (2023- अगस्त 2025)

मार्च 2023 में बायजू ने स्पॉन्सरशिप से अपना नाम वापस ले लिया, जिसके बाद भारत की सबसे बड़ी फैंटेसी कंपनी ड्रीम11 मुख्य प्रायोजक के रूप में भारतीय टीम से जुड़ी। यह समझौता 2023–2026 तक तीन साल के लिए किया गया, जिसकी कुल कीमत 158 अंतरराष्ट्रीय मैचों के लिए 358 करोड़ रूपये में तय की गई। इस कॉन्ट्रैक्ट के तहत बीसीसीआई को द्विपक्षीय मुकाबलों पर ₹3 करोड़ और आईसीसी मैचों पर 1 करोड़ रुपये की राशि मिलती थी।
हालाँकि, अगस्त 2025 में ‘ऑनलाइन गेमिंग के प्रचार और विनियमन’ अधिनियम के तहत रियल कैश वाले गेमिंग एप्स पर बैन लगा दिया गया। इसके बाद उनका यह अनुबंध समाप्त हो जाएगा।
5. बायजू ( 2019- 2023)

ओप्पो कंपनी के अनुबंध से बाहर होने के बाद, बायजू को बीसीसीआई से स्पॉन्सरशिप का अधिकार मिला। यह कॉन्ट्रैक्ट 2019 में शुरू हुआ, जिसमें बीसीसीआई को द्विपक्षीय मैचों के लिए 4.61 करोड़ रूपये और आईसीसी मैचों के लिए 1.51 करोड़ रूपये मिलते थे। यह मूल्य ओप्पो कंपनी के पिछले अनुबंध के समान ही था।
हालाँकि, यह कॉन्ट्रैक्ट मार्च 2022 में समाप्त हो गया, लेकिन बायजू ने एक और साल के लिए इसे रिन्यू करने का फैसला किया। इसके बाद यह मार्च 2023 में समाप्त हुआ।
4. ओप्पो मोबाइल्स इंडिया (2017- 2019)

अप्रैल 2017 में ओप्पो कंपनी ने भारतीय क्रिकेट टीम का मुख्य प्रायोजन का अधिकार अपने नाम किया। यह बीसीसीआई के स्पॉन्सरशिप इतिहास में सबसे बड़ी डील थी, जिसकी कुल कीमत 1,079 करोड़ रूपये थी। ओप्पो ने अपनी सहयोगी कंपनी वीवो की ₹768 करोड़ की बोली को पीछे छोड़कर यह करार हासिल किया।
इस अनुबंध के तहत बीसीसीआई को हर द्विपक्षीय मैच के लिए 4.61 करोड़ रूपये और आईसीसी मैचों के लिए 1.51 करोड़ रूपये मिलते थे। हालांकि, यह समझौता लंबे समय तक नहीं चला और दो साल बाद, 2019 में ओप्पो ने कॉन्ट्रैक्ट समाप्त कर दिया।
3. स्टार इंडिया (2014-2017)

साल 2014 में भारतीय क्रिकेट टीम के प्रायोजन अधिकारों के लिए कुल सात बड़े ब्रांडों ने टेंडर दाखिल किए। इसमें स्टार इंडिया ने सबसे बड़ी बोली लगाकर स्पॉन्सर का अधिकार अपने नाम कर लिया। इस समझौते के तहत बीसीसीआई को प्रत्येक द्विपक्षीय अंतरराष्ट्रीय मैच से 1.92 करोड़ रूपये और आईसीसी मैच से 61 लाख रूपये मिलते थे। यह अनुबंध मार्च 2017 में समाप्त हो गया।
2. सहारा इंडिया (2001-2013)

विल्स और आईटीसी लिमिटेड के हटने के बाद, भारत में कई बड़ी कंपनियों ने भारतीय क्रिकेट टीम का प्रायोजन लेने की कोशिश की। जून 2001 में सहारा इंडिया को यह स्पॉन्सरशिप मिल गई। 2010 में इस अनुबंध को फिर से बढ़ाया गया, जिसके तहत बीसीसीआई को हर अंतरराष्ट्रीय मैच के लिए 3.34 करोड़ रूपये मिलते थे। लेकिन बीसीसीआई के साथ विवाद के कारण सहारा ने 2013 में प्रायोजन समाप्त कर दिया।
1. ITC लिमिटेड (1993-2001)

भारतीय क्रिकेट टीम को प्रायोजन देने वाला पहला ब्रांड आईटीसी लिमिटेड (विल्स और आईटीसी) था। इसने भारतीय क्रिकेट टीम के साथ नौ साल का स्पॉन्सर करार हासिल किया, जो 1993 में आरंभ हुआ और 2001 में समाप्त हो गया। इस अनुबंध में बीसीसीआई को प्रति टेस्ट मैच 35 लाख रूपये और प्रति वनडे मैच 32 लाख रूपये मिलते थे।
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