भारत में क्रिकेट को एक धर्म की तरह माना जाता है। हालाँकि यह खेल सिर्फ पुरुषों तक सीमित रह गया था, लेकिन पिछले कुछ सालों में महिलाओं ने भी बढ़-चढ़कर हिस्सा लिया है। जिसके चलते अब कई अच्छी वीमेंस प्लेयर भी देखने को मिल रही हैं।
भारत में इस खेल का मतलब लोग सिर्फ बल्लेबाजी ही समझते हैं, जिसके चलते इस देश ने दुनिया के बहुत से बड़े बल्लेबाज़ों को दिया है। लेकिन अब गेंदबाज़ भी यहाँ से निकलने लगे हैं। वीमेंस क्रिकेट में भी अब अच्छे गेंदबाज़ आने लगे हैं। ऐसे ही युवा तेज़ गेंदबाज़ क्रांति गौड़ ने अपने प्रदर्शन से सभी का दिल जीत लिया है। तो चलिए जानते हैं उनके करियर और निजी जानकारियों के बारे में।
टेनिस बॉल से लेदर बॉल तक तय किया सफर

सात साल पहले, मध्य प्रदेश के छतरपुर जिले के बुंदेलखंड क्षेत्र के एक छोटे से कस्बे घुवारा में, महिलाओं के लेदर-बॉल क्रिकेट मैच में एक टीम में एक खिलाड़ी की कमी थी। तभी उन्होंने एक लड़की को मैदान में छड़ी लेकर घूमते देखा और उससे पूछा कि क्या वह खेलना चाहती है। 14 साल की यह लड़की बचपन से ही टेनिस बॉल क्रिकेट खेलती आ रही थी और उसे इसमें इतना जुनून था कि वह परीक्षा के दौरान भी, डाँट-फटकार की परवाह किए बिना, खेलती रहती थी।
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लेकिन अब तक, उसने सिर्फ़ लड़कों के साथ टेनिस बॉल से क्रिकेट खेला था। उसके पड़ोसियों और परिवार के परिचितों को यह मंजूरी नहीं थी, क्योंकि उनका मानना था कि क्रिकेट गाँव की लड़कियों के लिए नहीं है। लेकिन न तो उस लड़की को और न ही उसके परिवार को इसकी परवाह थी।
बिना कोई कसर छोड़े, उसने अपने पहले लेदर-बॉल मैच में हिस्सा लिया, बल्ले और गेंद दोनों से शानदार प्रदर्शन किया और प्लेयर ऑफ़ द मैच का पुरस्कार भी जीता। दरअसल यह खिलाड़ी कोई और नहीं, क्रांति गौड़ है। 22 वर्षीय ऑलराउंडर ने पहले वीमेंस प्रीमियर लीग और उसके बाद अब वर्ल्ड कप में अपनी शानदार गेंदबाज़ी के दम पर अपना नाम कमाया है।
क्रांति गौड़ की व्यक्तिगत जानकारी (Kranti Goud Personal Information)
पूरा नाम– क्रांति गौड़
जन्म तिथि– 11 अगस्त, 2003 (उम्र: 22)
जन्म स्थान– घुवारा, मध्य प्रदेश, (भारत)
गाँव वालों के विरोध के बावजूद भाई ने किया बचपन से सपोर्ट
क्रांति का क्रिकेट का सफर आसान नहीं रहा था। वह बचपन में टेनिस बॉल से क्रिकेट खेलती थी, लेकिन गाँव वाले हमेशा उनको और उनके परिवार वालों को कहते थे कि लड़कियों का काम क्रिकेट खेलना नहीं है। वह बताती हैं कि “गांव में लोग कहते थे कि लड़की है, इसे क्रिकेट मत खेलने दो। लेकिन मेरे भाई ने किसी की नहीं सुनी, उन्होंने मुझे पूरा समर्थन दिया। परिवार ने भी मेरा साथ दिया और इसी वजह से मैं आज यहां तक पहुंची हूं।”
इस बीच, जब 2017 में भारतीय महिला टीम वनडे विश्व कप के फाइनल में पहुंची, तो मध्य प्रदेश क्रिकेट एसोसिएशन ने अंडर-16 महिला क्रिकेट टूर्नामेंट शुरू किया। सबसे पहले जिला स्तर पर टीमों के बीच मैच आयोजित किए गए, जिनमें से प्रतिभाशाली खिलाड़ियों का चयन राज्य टीम के लिए किया गया।
सागर संभाग के क्रिकेट संचालन प्रबंधक सत्यम त्रिपाठी ने बिल्थरे की मदद से एक महिला टीम बनाने का लक्ष्य रखा। उन्होंने विभिन्न स्कूलों में जाकर जागरूकता अभियान चलाया, अभिभावकों से संपर्क किया और 40 से अधिक लड़कियों को अकादमी में लाने में सफल रहे, जिनमें से 15 का चयन सागर संभाग के लिए हुआ।
कैसे बनी तेज़ गेंदबाज़?
वह हँसते हुए कहती हैं, “यह बस हो गया। जब मैंने टेनिस बॉल से खेलना शुरू किया, तो मैंने देखा कि हर कोई दौड़ रहा था और मध्यम गति की गेंदबाज़ी कर रहा था। मुझे तो तब पता भी नहीं था कि स्पिन गेंदबाज़ भी होते हैं। टेनिस बॉल क्रिकेट में स्पिनर कहाँ होते हैं?”
“मेरे भाई ने भी कहा कि मुझे मध्यम गति की गेंदबाज़ी करनी चाहिए, तो मैंने वही किया। जब मैं (राजीव बिल्थरे की) अकादमी में आई, तो मैंने देखा कि वहाँ ज़्यादा मध्यम गति के गेंदबाज़ नहीं थे। वहाँ सिर्फ़ एक गेंदबाज़ थी – सुषमा विश्वकर्मा, जो मेरी दोस्त बन गईं। उन्होंने मुझे तेज़ गेंदबाज़ी जारी रखने के लिए प्रोत्साहित भी किया और उसके बाद मैंने कभी पीछे मुड़कर नहीं देखा।”
राजीव बिल्थरे ने पहचानी प्रतिभा
राजीव कहते हैं, “वह तेज़, फुर्तीली और बेहद एथलेटिक थी। मुझे लगा कि वह अच्छा कर सकती है, इसलिए मैंने उसके पिता से कहा कि वे उसे मेरे पास छतरपुर छोड़ दें। मैंने उनसे कहा कि मैं उनकी बेटी को एक अच्छी खिलाड़ी बनाऊँगा।”
“उसके पिता ने मुझसे कहा, ‘हम अपनी बेटी को तुम्हें सौंप रहे हैं। तुम्हें उसका भविष्य संवारना होगा।’ यह पूरी तरह से उसकी कड़ी मेहनत और प्रतिभा का ही नतीजा है कि वह आज इस मुकाम पर पहुँची है। मैंने बस वही किया जो मैं कर सकता था। उसका परिवार आर्थिक रूप से बहुत स्थिर नहीं था। इसलिए मैंने उसकी थोड़ी मदद की – किट, यूनिफॉर्म या बल्ले जैसी जो भी हो सका, मैंने किया।”
वीमेंस प्रीमियर लीग में किया था सबको प्रभावित
उसके बाद लगातार शानदार प्रदर्शन के चलते उन्हें पहले वीमेंस प्रीमियर लीग में मुंबई इंडियंस के नेट बॉलर के रूप में जगह दी गई। अगले सीज़न उन्हें यूपी वॉरियर्स ने बेस प्राइस में खरीदा था। जिसके बाद उन्होंने शानदार प्रदर्शन किया और उन्हें इसी साल श्रीलंका के खिलाफ डेब्यू का मौका दिया गया था। उसके बाद 22 वर्षीय खिलाड़ी ने इंग्लैंड के खिलाफ शानदार प्रदर्शन किया और वर्ल्ड कप में जगह बनाने में सफल हुई। पाकिस्तान के खिलाफ हुए मुकाबले में उन्होंने धारदार गेंदबाज़ी करते हुए टीम को मैच जिता दिया।
क्रांति ने इस वर्ल्ड कप में मिले मौकों का अच्छा इस्तेमाल किया और प्रदर्शन से भारतीय टीम को मैच जिताने में मदद की। वो अभी सिर्फ 22 साल की हैं और आगे इस टूर्नामेंट से काफी कुछ सीख कर और बेहतर प्रदर्शन करेंगी।
क्रांति गौड़ करियर (Kranti Goud Career)
क्रांति गौड़ ने अब तक इंटरनेशनल क्रिकेट में 9 वनडे में 19.88 की औसत से 18 विकेट लिए हैं, जबकि 1 टी20 में अब तक कोई भी विकेट नहीं मिला है।
क्रांति गौड़ इंस्टाग्राम प्रोफाइल (Kranti Goud Instagram)
आजकल क्रिकेटर्स के लिए सोशल मीडिया सबसे अच्छी और कभी-कभी सबसे चुनौतीपूर्ण चीज़ बन चुकी है। क्रांति गौड़ भी इंस्टाग्राम पर सक्रिय हैं और कभी-कभार पोस्ट करती हैं।
क्रांति गौड़ नेटवर्थ (Kranti Goud Net Worth)
क्रांति गौड़ की नेटवर्थ को लेकर पक्की जानकारी उपलब्ध नहीं है। लेकिन वीमेंस प्रीमियर लीग में उन्हें “यूपी वॉरियर्स” ने 10 लाख रुपये में खरीदा था। इसके अलावा वह घरेलू क्रिकेट और अन्य लीग्स में खेलने के साथ-साथ सोशल मीडिया से भी कमाई करती हैं। खबरों की मानें तो उनकी कुल संपत्ति लगभग 15 लाख रुपये के आसपास हो सकती है।
वीमेंस प्रीमियर लीग वेतन- 10 लाख
नेटवर्थ- 15 लाख

