Javelin: भारत के स्टार पैरा एथलीट सुमित अंतिल ने बंगलूरू में आयोजित इंडियन ओपन पैरा एथलेटिक्स चैंपियनशिप में एफ64 जैवलिन स्पर्धा में 74.82 मीटर थ्रो फेंक कर नया विश्व रिकॉर्ड बना दिया है। इसके चलते हुए अब उन्होंने अपना ही 73.29 मीटर का पुराना रिकॉर्ड तोड़ते हुए एक बार फिर विश्व स्तर पर भारत का नाम रोशन कर दिया है।
सुमित अंतिल ने फिर रचा इतिहास :-
भारत के स्टार पैरा एथलीट सुमित अंतिल ने एक बार फिर जैवलिन खेल में इतिहास रच दिया है। इसके चलते हुए अब अब दो बार के पैरालंपिक स्वर्ण पदक विजेता सुमित अंतिल ने इंडियन ओपन अंतरराष्ट्रीय पैरा एथलेटिक्स चैंपियनशिप में पुरुषों की जैवलिन थ्रो एफ64 स्पर्धा में नया विश्व रिकॉर्ड बना दिया है।

इसके अलावा हरियाणा के सोनीपत जिले के रहने वाले सुमित ने अपने भाले को 74.82 मीटर दूर फेंककर अपना ही पुराना विश्व रिकॉर्ड तोड़ दिया है। क्यूंकि इससे पहले उनका विश्व रिकॉर्ड 73.29 मीटर का था। इसको उन्होंने साल 2022 एशियन पैरा गेम्स में बनाया था।
लगातार शानदार रहा है सुमित का प्रदर्शन :-
इसके अलावा पिछले कुछ वर्षों से अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भारत के स्टार पैरा भाला फेंक खिलाड़ी सुमित अंतिल का अंतरराष्ट्रीय स्तर पर लगातार बेहतरीन प्रदर्शन रहा है। इसके चलते हुए ही उन्होंने साल 2020 के समर पैरालंपिक में स्वर्ण पदक जीता था।

इसके बाद फिर उन्होंने साल 2024 समर पैरालंपिक में भी स्वर्ण पदक जीतकर अपने नाम किया था। इसके अलावा उन्होंने साल 2023, 2024 और 2025 की विश्व पैरा एथलेटिक्स चैंपियनशिप का खिताब जीता था। इसके अलावा उन्होंने साल 2022 के एशियन पैरा गेम्स में भी स्वर्ण पदक जीता था।
सुमित का है 80 मीटर का अगला लक्ष्य :-
इस प्रतियोगिता में विश्व रिकॉर्ड बनाने के बाद अब सुमित अंतिल का अगला लक्ष्य 80 मीटर की दूरी को पार करना है। लेकिन अब उनके इस मौजूदा प्रदर्शन को देखते हुए अब सभी को यह लग रहा है कि वह आने वाले समय में और बड़े रिकॉर्ड अपने नाम कर सकते हैं।
क्या होती है एफ64 श्रेणी :-

इसके अलावा एफ64 श्रेणी उन पैरा एथलीटों के लिए होती है जिनके निचले अंगों में समस्या होती है। वहीं इस वर्ग में वो खिलाड़ी हिस्सा लेते हैं जो कृत्रिम पैर के सहारे प्रतिस्पर्धा करते हैं या जिनके पैरों की लंबाई में अंतर होता है।
हादसे के बाद बदली सुमित अंतिल की जिंदगी :-
इसके अलावा साल 2015 में एक मोटरसाइकिल दुर्घटना में सुमित अंतिल ने घुटने के नीचे अपना बायां पैर गंवा दिया था। इसके बाद उन्होंने कठिन परिस्थितियों के बावजूद हार नहीं मानी थी। इसके चलते हुए उन्होंने अपनी कठिन मेहनत के दम पर दुनिया के सर्वश्रेष्ठ पैरा जैवलिन थ्रो खिलाड़ियों में अपनी जगह बना ली है।
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