Swapnil Kusale get Inspiration from Dhoni’s life?
1 अगस्त का दिन, पूरे भारतवासियों और भारतीय निशानेबाज 28 वर्षीय स्वप्निल कुसाले (Swapni Kusale) के लिए गौरवान्वित करने वाला रहा, क्योंकि उन्होंने पेरिस ओलंपिक 2024 (Paris Olympics 2024) में पुरूषों की 50 मीटर राइफल थ्री पोजीशन इवेंट में ब्रॉन्ज मेडल जीतकर इतिहास रच दिया है। वह ओलंपिक इतिहास में इस इवेंट में मेडल जीतने वाले पहले भारतीय बन गए हैं। मेडल जीतने के बाद उन्होंने अपने जीवन को एमएस धोनी से जोड़ते हुए बताया कि वह पूर्व दिग्गज भारतीय कप्तान से किस तरह से प्रेरणा लेते हैं।

गौरतलब हो कि, कुसाले ने 50 मीटर राइफल थ्री पोजीशन के फाइनल में ब्रॉन्ज मेडल जीता और पेरिस ओलंपिक 2024 में मेडल की संख्या को बढ़ाकर 3 कर दिया। दिलचस्प बात यह है कि, भारत को इस ओलंपिक में ये तीनों मेडल शूटिंग में ही मिले हैं।
स्वप्निल कुसाले से पहले, भारतीय महिला निशानेबाज मनु भाकर ने महिलाओं की 10 मीटर एयर पिस्टल शूटिंग इवेंट में ब्रॉन्ज मेडल जीता था, जो पेरिस 2024 में भारत का पहला मेडल था। इसके बाद उन्होंने 10 मीटर एयर पिस्टल शूटिंग मिक्स्ड टीम इवेंट में सरबजीत सिंह के साथ जोड़ी बनाकर ब्रॉन्ज मेडल जीता था। ओलंपिक इतिहास में ऐसा पहली बार हुआ है, जब भारतीय निशानेबाजों ने दो या उससे अधिक मेडल जीते हैं।
पूर्व दिग्गज भारतीय कप्तान एमएस धोनी से मिलती-जुलता है स्वप्निल कुसाले का सफर
भारतीय पूर्व कप्तान और महान खिलाड़ियों में से एक एमएस धोनी की तरह ही भारतीय पुरुष निशानेबाज स्वप्निल कुसाले का सफर भी प्रेणादायक रहा है। यह तो सभी जानते हैं कि, धोनी को कैप्टन कूल भी कहा जाता है, क्योंकि वह क्रिकेट मैच के अहम पड़ावों पर शांत और धैर्यवान बने रहते थे और इसी के चलते कुछ वह ऐसे फैसले ले पाते थे, जिसके चलते वह विपक्षी टीम के पाले से मैच खींच लाते थे।

महान विकेटकीपर बल्लेबाज को खेल की गहराई तक ले जाने और फिर हार के मुंह से मैच खींचकर जीत हासिल के लिए भी जाना जाता है। टी20 वर्ल्ड कप 2007 फाइनल, वनडे वर्ल्ड कप 2011 फाइनल और चैम्पियंस ट्रॉफी 2013 के फाइनल में धोनी की करिश्माई कप्तानी को भला कौन भूल सकता है। धोनी की तरह‚ कुसाले ने भी अपने इवेंट में फाइनल मैच के दौरान पिछड़ने के बावजूद शानदार वापसी की और अपना पहला ओलंपिक मेडल जीता।
बता दें कि, एक समय कुसाले छठे स्थान पर थे‚ लेकिन उन्होंने अपना धैर्य बनाए रखा और शानदार वापसी की। इसके बाद उन्होंने 451.4 अंकों के साथ तीसरे स्थान पर रहते हुए ब्रॉन्ज मेडल जीता और भारत के झोली में एक और मेडल डालकर गौरवान्वित किया।
एमएस धोनी को उनके व्यक्तित्व के लिए पसंद करते हैं कुसाले

28 वर्षीय कुसाले ने मेडल जीतने के बाद बताया कि, वह पूर्व दिग्गज भारतीय कप्तान से इसलिए खुद को जोड़ पाते हैं, क्योंकि वह खुद एक टिकट कलेक्टर हैं। वह शूटिंग में किसी खास व्यक्ति को फॉलो नहीं करते हैं, लेकिन वह धोनी के व्यक्तित्व को पसंद करते हैं।
कुसाले ने पीटीआई के हवाले से कहा :
“मैं शूटिंग की दुनिया में किसी खास व्यक्ति को फॉलो नहीं करता। इसके अलावा, मैं धोनी को उनके व्यक्तित्व के लिए पसंद करता हूं। मेरे खेल के लिए मुझे मैदान पर उनके जैसा ही शांत और धैर्यवान होना चाहिए। मैं भी उनकी कहानी से खुद को जोड़ता हूं, क्योंकि मैं भी उनकी तरह ही टिकट कलेक्टर हूं।”
बता दें कि, एमएस धोनी शुरुआती दिनों में खड़गपुर रेलवे स्टेशन पर टीसी का काम करते थे, लेकिन बाद में उन्होंने यह नौकरी छोड़कर पूरी तरह से क्रिकेट में करियर बनाने का सोचा और आगे चलकर अपनी कड़ी मेहनत से वह दुनिया के सबसे महान कप्तानों में से एक बन गए।

ठीक इसी तरह, महाराष्ट्र के कोल्हापुर में रहने वाले स्वप्निल कुसाले भी 2015 से सेंट्रल रेलवे में टिकट कलेक्टर के पद पर तैनात हैं। उन्होंने भी धोनी की तरह ही कड़ी मेहनत की और ओलंपिक मेडल जीतकर देश को गौरवान्वित किया ।
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