बीते मंगलवार को पूर्व भारतीय हरफनमौला खिलाड़ी अजीत अगरकर को भारतीय टीम का पूर्व चीफ सेलेक्टर बनाया गया। बता दें, ये पद पिछले कई समय से खाली था। इसके पीछे का कारण विवादों में रहने के कारण चेतन शर्मा का इस्तीफा देना था। इन सब के बाद अब अजीत अगरकर ने इस पद को संभाल लिया है। पहली बार ऐसा हो रहा है कि जब किसी ने चीफ सेलेक्टर का पद संभाला हो और उसके तुरंत बाद उसके उपर सवाल खड़े कर दिए गए हो। कई लोगों को लग रहा है कि इस पद की चयन प्रक्रिया गलत तरीके से हुई है और अजीत को अवैध तरीके से चीफ सेलेक्टर बनाया गया है। इसी कड़ी में आपको बताते हैं कि आखिर इस मामले की सच्चाई क्या है।
ये है सच्चाई
जैसा कि पहले बता चुके हैं भारतीय टीम में चीफ सेलेक्टर का पद पिछले कई समय से खाली था। इसके बाद पिछले महीने की 22 तारीख को यानी जून में बीसीसीआई ने इस पद के लिए आवेदन मांगे थे। इसके बाद नॉर्थ जोन की तरफ से इस पद के लिए किसी ने हाई प्रोफाइल कैंडीडेट ने इस पोस्ट के लिए अप्लाई नहीं किया था। ऐसे में भारतीय क्रिकेट बोर्ड परिषद (बीसीसीआई) के पास कोई भी विकल्प नहीं था। ऐसे स्थिति को देखते हुए पूराने नियम को बीसीसीआई ने अप्लाई किया। गौरतलब है कि आरएम लोढा कमेटी के डायरेक्टर पर बनाए गए संविधान के हिसाब से ऐसा कोई नियम नहीं था कि जोन के हिसाब से ही सेलेक्टर चुना जाए। ऐसे में ये बात तो सिद्ध हो ही गई कि अजीत अगरकर को चीफ सेलेक्टर बनाकर बीसीसीआई ने किसी भी प्रकार नियम नहीं तोड़ा है।
अजीत अगरकर की छवी काफी साफ सुथरी मानी जाती है। उनके इस पद को संभालते ही ये भी माना जा रहा है कि काफी लंबे समय के बाद किसी पूर्व दिग्गज खिलाड़ी ने इतने अहम पद को संभाला है। अजीत ने कई सालों तक भारतीय क्रिकेट का नाम विश्व स्तर में पहुंचाने में बेहद महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। इस साल भारतीय टीम को एशिया कप और वनडे विश्वकप जैसे अहम क्रिकेट के आयोजनों में हिस्सा लेना है। ऐसे में अजीत अगरकर की भूमिका काफी जिम्मादारी भरी व चुनियोतियों वाली होगी।

