BFI: भारतीय खेल प्राधिकरण और खेल मंत्रालय ने भारतीय मुक्केबाजी महासंघ की चयन प्रक्रिया और प्रशासनिक कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल उठाए हैं। क्यूंकि इस बीच अब भारत के खेल मंत्रालय ने चयन प्रक्रिया में पारदर्शिता की कमी और नियमों के उल्लंघन को लेकर बीएफआई को कारण बताओ नोटिस जारी किया है। इसके साथ ही उन्होंने खिलाड़ियों के चयन, हाई परफॉर्मेंस डायरेक्टर की नियुक्ति और कोचिंग पैनल को लेकर भी बीएफआई पर गंभीर सवाल उठाए हैं।
खेल मंत्रालय ने बीएफआई को थमाया कारण बताओ नोटिस :-

भारतीय खेल प्राधिकरण और केंद्रीय खेल मंत्रालय ने भारतीय मुक्केबाजी महासंघ की चयन प्रक्रिया और प्रशासनिक कार्यप्रणाली पर अब गंभीर सवाल उठाए हैं। इसके अलावा भारत के खेल मंत्रालय ने बीते दिन सोमवार को बीएफआई को कारण बताओ नोटिस जारी करते हुए एक सप्ताह के भीतर इसका जवाब भी मांगा है।
बीएफआई की चयन नीति पर उठे फिर से सवाल :-

इस बीच अब समाचार एजेंसी पीटीआई ने सूत्रों के हवाले से बताया है कि, “भारत के खेल मंत्रालय ने बीएफआई की चयन नीति को अस्पष्ट और पारदर्शिता से रहित बताया है। वहीं अब उनका यह नोटिस ऐसे समय में जारी हुआ है जब एक दिन पहले ही साई ने पटियाला में आयोजित होने वाले मूल्यांकन शिविर को रोकने के निर्देश दिए थे। क्यूंकि उनका यह शिविर आगामी कॉमनवेल्थ गेम्स और एशियन गेम्स के लिए मुक्केबाजों के चयन के उद्देश्य से आयोजित किया जाने वाला था।
चयन प्रक्रिया पर उठे हैं गंभीर सवाल :-
इस बीच अब भारतीय खेल मंत्रालय ने कहा है कि राष्ट्रीय शिविर में खिलाड़ियों को शामिल करने के लिए अपनाए गए “दूसरे रास्ते” यानी चीफ ऑफ आर्मी स्टाफ कप के मानदंड स्पष्ट नहीं हैं। इसके अलावा यह टूर्नामेंट अप्रैल में पुणे स्थित आर्मी स्पोर्ट्स इंस्टीट्यूट में आयोजित हुआ था। वहीं इस बीच अब यह आरोप लग रहे हैं कि इसमें कुछ ऐसे मुक्केबाजों को हिस्सा लेने से रोक दिया गया जो सशस्त्र बलों से जुड़े नहीं थे।

इसके अलावा अब सीओएएस कप के 40 पदक विजेताओं को राष्ट्रीय कैंप में मूल्यांकन के लिए बुलाया जाने वाला था। लेकिन इस पर साई ने कड़ी आपत्ति जताई है। वहीं इस समय साई का कहना है कि बंद टूर्नामेंट के खिलाड़ियों को ऐसे कोचिंग पैनल के तहत शामिल किया जा रहा था जो अनुभव और योग्यता के मानकों पर खरे नहीं उतरते हैं।
हाई परफॉर्मेंस डायरेक्टर की नियुक्ति नहीं हुई :-

इसके अलावा अब भारतीय खेल मंत्रालय ने बीएफआई पर यह भी आरोप लगाया है कि उसने कई बार याद दिलाने के बावजूद अभी तक एक हाई परफॉर्मेंस डायरेक्टर की नियुक्ति नहीं की है। इसके अलावा खेल मंत्रालय ने पिछले वर्ष सभी राष्ट्रीय खेल महासंघों के लिए इस पद हेतु 10 करोड़ रुपये अलग रखने को अनिवार्य किया था।
बीएफआई पर लगा नियमों के उल्लंघन का आरोप :-
इसके अलावा अब नोटिस में यह भी कहा गया है कि बीएफआई ने कोच और सपोर्ट स्टाफ की नियुक्ति के लिए बनाई गई चयन समिति में साई के महानिदेशक या उनके प्रतिनिधि को शामिल नहीं किया है। जबकि भारतीय खेल मंत्रालय के नियमों के तहत यह अनिवार्य है। इसके अलावा अंतरराष्ट्रीय प्रशिक्षण और प्रतियोगिताओं से संबंधित प्रस्ताव तय समयसीमा के भीतर जमा नहीं किए जा रहे हैं। इन नियमों के अनुसार प्रशिक्षण और प्रतियोगिताओं के प्रस्ताव खिलाड़ियों के नाम के बिना कम से कम 90 दिन पहले और खिलाड़ियों के नाम सहित 60 दिन पहले भेजे जाने चाहिए।

इसके अलावा अन्य सूत्रों के अनुसार साईं को कई शिकायतें मिली हैं कि मूल्यांकन शिविर के दौरान मुकाबलों के नतीजे तुरंत घोषित नहीं किए जाने थे। क्यूंकि अब आरोप यह है कि बीएफआई की तथाकथित हाई परफॉर्मेंस यूनिट और चयन समिति आपसी चर्चा के बाद खिलाड़ियों के चयन पर फैसला लेने वाली थी। इसके अलावा साई के एक सूत्र ने कहा है कि, “यह सब निष्पक्ष खेल भावना के खिलाफ है। यदि मामला अदालत तक जाता है तो साई को भी जवाब देना पड़ेगा। लेकिन इस समय बीएफआई हमारी पूछताछ का जवाब नहीं दे रहा है।” वहीं इस समय फिलहाल खेल मंत्रालय के नोटिस के बाद बीएफआई की प्रतिक्रिया का इंतजार किया जा रहा है।
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