Deepak Punia: एशियाई खेलों के रजत पदक विजेता दीपक पुनिया का मानना है कि जंतर-मंतर पर पहलवानों के विरोध प्रदर्शन से जो व्यवधान पैदा हुआ उससे भारत के कई खिलाड़ियों का करियर प्रभावित हुआ था। उन सभी में मैं भी शामिल हूं। क्यूंकि एक समय दीपक 86 किलोग्राम वर्ग में भारत की तरफ से लगातार अच्छा प्रदर्शन कर रहे थे। लेकिन टोक्यो ओलंपिक में कांस्य पदक से चूकने के बाद से ही वह अपनी पुरानी लय हासिल करने के लिए लगातार संघर्ष कर रहे हैं। इससे पहले उनका एकमात्र अच्छा प्रदर्शन एशियाई खेल 2023 में आया था। क्यूंकि तब उन्होंने इस प्रतियोगिता में रजत पदक जीता था।
इसके अलावा भारत के इस 26 वर्षीय खिलाड़ी ने बीते दिन सोमवार को यहां राष्ट्रीय ओपन रैंकिंग टूर्नामेंट जीता था। लेकिन फिर भी वह भारतीय कुश्ती महासंघ की वर्तमान नीति के अनुसार एशियाई खेलों के लिए 31 मई को होने वाले चयन ट्रायल में भाग लेने की योग्यता नहीं रखते हैं। तभी तो अब उनकी इस नीति में यहां चल रहे टूर्नामेंट के नतीजों पर गौर नहीं किया जाने वाला है।
पहलवानों के विरोध प्रदर्शन से मेरा करियर खराब हुआ :-
इसके अलावा अब भारतीय पहलवान दीपक पुनिया ने कहा है कि पहलवानों के विरोध प्रदर्शन के बाद भारतीय कुश्ती में अनिश्चितता के लंबे दौर ने खिलाड़ियों को अंतरराष्ट्रीय स्तर की प्रतियोगिताओं में खेलने का अवसर नहीं मिला है। इसके चलते हुए उन सभी को बड़ा नुकसान हुआ है। इसके आगे उन्होंने कहा कि, “विरोध प्रदर्शन और अन्य घटनाओं के कारण साल 2023 के बाद कई टूर्नामेंट रद्द कर दिए गए थे और हमें पहले की तरह विदेश में होने वाली प्रतियोगिताओं में भाग लेने के मौके भी नहीं मिले थे।”

इसके आगे दीपक ने कहा कि, “जब आप हर दूसरे या तीसरे महीने अंतरराष्ट्रीय स्तर पर किसी प्रतियोगिता में भाग लेते हैं तो आपको अपनी कमजोरी का पता चलता है। इसके चलते हुए आप सभी अपनी कमजोरी का पता लगाकर उसमें सुधार करते हैं। लेकिन अगर आपको साल में केवल एक विश्व चैंपियनशिप या केवल एक एशियाई चैंपियनशिप में भाग लेने का मौका मिलता है तो आपके प्रदर्शन में बहुत बड़ा अंतर आ जाता है।”

इसके अलावा भारत के प्रमुख पहलवान विनेश फोगाट, बजरंग पूनिया और साक्षी मलिक ने साल 2023 में डब्ल्यूएफआई के तत्कालीन अध्यक्ष बृज भूषण शरण सिंह के खिलाफ लंबे समय तक चले विरोध प्रदर्शन का नेतृत्व भी किया था। क्यूंकि तब उन्होंने बृज भूषण पर यौन उत्पीड़न का आरोप लगाया था। इसके बाद खेल मंत्रालय ने तब डब्ल्यूएफआई को निलंबित कर दिया था और एक तदर्थ समिति ने लंबे समय तक इसका संचालन किया था। इसके कारण ही भारत में टूर्नामेंट और कुश्ती गतिविधियों में समस्या पैदा हुई थी। लेकिन अभी यह मामला अदालत में है।
इसके अलावा जब पहलवान दीपक से पूछा गया कि वह भी विरोध प्रदर्शन स्थल पर आए थे तो उन्होंने कहा कि, “मैं अभी उन बातों पर चर्चा नहीं करना चाहता हूं। इन बातों को अब रहने दीजिए।” हरियाणा के इस पहलवान ने साल 2025 में विश्व चैंपियनशिप में अपने निराशाजनक प्रदर्शन का कारण पर्याप्त अभ्यास नहीं करना और अभ्यास के लिए साथियों की कमी को बताया था। इसके अलावा तब पदक राउंड से काफी पहले ही उनका प्रदर्शन फीका पड़ गया और वह 11वें स्थान पर रहे थे।

इसके आगे उन्होंने कहा कि, “अब मैं यह स्वीकार करता हूं कि मैंने अभ्यास में गलतियां कीं हैं। विश्व चैंपियनशिप से पहले मुझे कोई अच्छा स्पैरिंग पार्टनर (अभ्यास के लिए साथी पहलवान) नहीं मिला था। क्यूंकि स्पैरिंग पार्टनर बहुत बड़ी भूमिका निभाते हैं। इसके आगे उन्होंने कहा कि लेकिन अब उनका पूरा ध्यान अगले एशियाई खेलों में 86 किलोग्राम वर्ग में स्वर्ण पदक जीतने पर ही लगा है। इसके आगे उन्होंने कहा कि, “मेरा लक्ष्य एशियाई खेलों में अपने पदक का रंग बदलना है। मैं एशियाई खेलों में मौका पाने के लिए ही इस प्रतियोगिता में भाग ले रहा हूं। मैं महासंघ से मुझे मौका देने पर विचार करने का अनुरोध करता हूं।”
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