माधव तिवारी क्रिकेट के लिए सबकुछ छोड़ देने वाला लड़का हैं।
हर खिलाड़ी की सफलता के पीछे संघर्ष की एक कहानी होती है, लेकिन दिल्ली कैपिटल्स के युवा ऑलराउंडर माधव तिवारी (Madhav Tiwari) की कहानी अलग है। एक ऐसा लड़का जिसे क्रिकेट के अलावा दुनिया में कुछ और दिखाई ही नहीं देता था। जिसने अपने पिता से MBA की जगह सिर्फ दो साल मांगे थे और जिसने अपनी इकलौती बहन की शादी तक छोड़ दी, सिर्फ इसलिए क्योंकि उसे क्रिकेट खेलना था।
आईपीएल 2026 में पंजाब किंग्स के खिलाफ धर्मशाला में खेली गई मैच विनिंग पारी और गेंदबाजी के बाद अब हर कोई माधव तिवारी के बारे में जानना चाहता है। लेकिन यहां तक पहुंचने का उनका सफर आसान नहीं था। बिना किसी घरेलू रिकॉर्ड और बिना मध्य प्रदेश की सीनियर टीम के लिए खेले भी उन्होंने IPL तक का रास्ता बनाया।
पिता से मांगे थे सिर्फ दो साल
माधव तिवारी का परिवार मूल रूप से मध्य प्रदेश के रीवा जिले के मऊगंज से है। हालांकि उनका परिवार पिछले कई सालों से इंदौर में रहता है और ट्रांसपोर्ट का बिजनेस संभालता है। पढ़ाई में माधव काफी अच्छे थे और लगातार 80 से 90 प्रतिशत अंक लाते थे। ऐसे में उनके पिता अवधेश तिवारी चाहते थे कि बेटा पढ़ाई पर ध्यान दे।
लेकिन माधव के दिमाग में सिर्फ क्रिकेट था। उन्होंने अपने पिता से कहा कि उन्हें सिर्फ एक या दो साल चाहिए। अगर वह मध्य प्रदेश टीम में जगह नहीं बना पाए तो MBA कर लेंगे। पिता ने बेटे के जुनून को समझा और उसका साथ देने का फैसला किया।
20 किलोमीटर दूर एकेडमी, सुबह 5 बजे शुरू होता था दिन
माधव को अमय खुरासिया क्रिकेट एकेडमी में दाखिला दिलाया गया। घर से अकादमी लगभग 20 किलोमीटर दूर थी। सुबह 5 बजे दिन शुरू होता था और पूरा परिवार उनके सपने के लिए मेहनत करता था।
उनके दादा भी माधव को अपनी रॉयल एनफील्ड बुलेट पर बैठाकर अकादमी ले जाया करते थे। गांव में मिठाइयां बांटते थे और लोगों से कहते थे कि उनका पोता एक दिन बड़ा क्रिकेटर बनेगा। हालांकि वह माधव की सफलता देखने से पहले ही दुनिया छोड़ गए।
बल्लेबाजी करना चाहते थे, लेकिन कोच ने बना दिया तेज गेंदबाज
पूर्व भारतीय क्रिकेटर अमय खुरासिया ने जब पहली बार माधव को देखा तो उनकी टाइमिंग और एटीट्यूड ने उन्हें प्रभावित किया। शुरुआत में माधव सिर्फ बल्लेबाजी करना चाहते थे, लेकिन अकादमी का नियम था कि हर खिलाड़ी बल्लेबाजी और गेंदबाजी दोनों करेगा।
यहीं से उनकी तेज गेंदबाजी शुरू हुई। धीरे-धीरे वह ऐसे ऑलराउंडर बन गए जो लंबे स्पेल फेंकना पसंद करता था और घंटों बल्लेबाजी भी कर सकता था। खुरासिया के मुताबिक माधव में बड़े मैच खेलने वाला स्वभाव बचपन से था।
टूटा अंगूठा, फिर भी आखिरी ओवर खुद डालकर मैच जिताया
अंडर-12 मैच में माधव का अंगूठा टूट गया था। विरोधी टीम को जीतने के लिए आखिरी ओवर में 6-7 रन चाहिए थे। दर्द में होने के बावजूद माधव ने कप्तान से गेंद मांगी और खुद ओवर डाला। उन्होंने मैच जिताकर ही दम लिया। यही जिद और जुनून आगे चलकर उनकी पहचान बना।
लॉकडाउन में घर की दीवारें तोड़ दीं
कोरोना लॉकडाउन के दौरान जब क्रिकेट बंद हो गया था तब माधव ने घर के अंदर ही प्रैक्टिस शुरू कर दी। उन्होंने बॉलिंग मशीन मंगवाई और घंटों अभ्यास किया। कई बार शॉट मारते हुए घर की दीवारें तक टूट गईं।
उनके पिता मजाक में कहते हैं कि क्रिकेट के अलावा माधव की दुनिया में कुछ नहीं है। पहले वह परिवार के साथ घूमने जाते थे, लेकिन अब उन्हें सिर्फ क्रिकेट चाहिए।
बहन की शादी छोड़कर खेलने चले गए मैच
माधव तिवारी के जुनून का सबसे बड़ा उदाहरण तब देखने को मिला जब उन्होंने अपनी इकलौती बहन की शादी छोड़ दी। उसी समय अहमदाबाद में एक मैच खेलना था और उन्होंने क्रिकेट को चुना।
उनके पिता बताते हैं कि एयरपोर्ट छोड़कर घर लौटते समय वह रो पड़े थे। लेकिन आज वही परिवार माधव की सफलता पर सबसे ज्यादा खुश है।
बिना घरेलू मैच खेले IPL तक पहुंचे
माधव अभी तक मध्य प्रदेश की सीनियर टीम के लिए डेब्यू नहीं कर पाए हैं। लेकिन 2024 में मध्य प्रदेश टी20 लीग में भोपाल लेपर्ड्स के लिए खेलते हुए उन्होंने शानदार प्रदर्शन किया। उनका स्ट्राइक रेट 205.71 था और वह मिडिल ऑर्डर में बल्लेबाजी करते थे।
दिल्ली कैपिटल्स की नजर उन पर पड़ी और फ्रेंचाइजी ने उन्हें 40 लाख रुपये में खरीद लिया। परिवार के लिए यह किसी फिल्मी कहानी से कम नहीं था।
जसप्रीत बुमराह ने दिया था पहला बड़ा झटका
IPL 2025 में पंजाब किंग्स के खिलाफ उनका डेब्यू मैच बॉर्डर तनाव की वजह से बीच में रुक गया था। बाद में मुंबई इंडियंस के खिलाफ उन्हें मौका मिला, जहां जसप्रीत बुमराह की स्लोअर यॉर्कर पर वह सिर्फ 3 रन बनाकर आउट हो गए।
लेकिन माधव ने हार नहीं मानी। उन्होंने लगातार मेहनत जारी रखी और MP T20 लीग में फिर अच्छा प्रदर्शन किया।
धर्मशाला में चमके और बदल गई कहानी
IPL 2026 में दिल्ली कैपिटल्स के लिए मौका मिलने का इंतजार लंबा रहा। लेकिन पंजाब किंग्स के खिलाफ धर्मशाला में उन्होंने 2 विकेट लिए और फिर 18 रन बनाकर टीम को जीत दिलाई।
यही वह मैच था जिसने माधव तिवारी को अचानक सुर्खियों में ला दिया। उनके पिता पूरी रात फोन कॉल्स में इतने व्यस्त थे कि मैच ठीक से देख भी नहीं पाए।
कोच ने कहा था, “भारत के लिए खेलेगा”
अमय खुरासिया को हमेशा भरोसा था कि माधव एक दिन बड़ा खिलाड़ी बनेगा। उन्होंने परिवार से सिर्फ इतना कहा था कि लड़के की डाइट का ध्यान रखिए, बाकी कोई उसे भारत के लिए खेलने से नहीं रोक सकता।
आज IPL में मिले मौके ने साबित कर दिया है कि माधव तिवारी सिर्फ एक और युवा खिलाड़ी नहीं हैं। वह उन क्रिकेटरों में से हैं जिनके लिए क्रिकेट सिर्फ खेल नहीं बल्कि जिंदगी है।
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