PKL 2025 Biggest Referee Training Program ‘From Kashmir to Kanyakumari’: प्रो कबड्डी लीग सीजन 12 का सफर जारी है और इसी बीच लीग से जुड़ा एक अहम पहलू चर्चा में आया है। मैदान पर खिलाड़ियों की तैयारी जितनी जरूरी होती है, उतनी ही अहमियत सही फैसले लेने वाले अधिकारियों की भी होती है। इसी को ध्यान में रखते हुए इस बार लीग ने ‘कश्मीर से कन्याकुमारी तक’ के अधिकारियों के लिए एक खास ट्रेनिंग कैंप आयोजित किया। यह 12 दिन का कैंप हैदराबाद में 15 अगस्त से 27 अगस्त तक चला और इसने कबड्डी ऑफिशिएटिंग में एक बड़ा बदलाव लाने का काम किया।
45 अधिकारियों की टीम बनी तैयार
इस ट्रेनिंग प्रोग्राम में 23 नए चेहरे शामिल हुए, जिससे अब कुल अधिकारियों की संख्या बढ़कर 45 हो गई है। इसमें नए और अनुभवी रेफरी का ऐसा संतुलन बना है, जो आने वाले सीजन को और भी बेहतर बनाने में मदद करेगा। तमिलनाडु और महाराष्ट्र से सबसे ज्यादा चार-चार रेफरी शामिल हुए। यह इस बात का सबूत है कि पूरे देशभर में कबड्डी ऑफिशियल्स की जिम्मेदारी को गंभीरता से लिया जा रहा है।
नियमों में बदलाव और नई जिम्मेदारियां
प्रो कबड्डी लीग में इस सीजन कुछ नियम और फॉर्मेट बदले गए हैं। इस वजह से अधिकारियों की ट्रेनिंग पहले से कहीं ज्यादा जरूरी हो गई थी। लीग के टेक्निकल डायरेक्टर ई. प्रसाद राव ने बताया कि नए बदलावों के चलते रेफरी की संख्या भी बढ़ाई गई है और ट्रेनिंग को ज्यादा विस्तार से तैयार किया गया है। अधिकारियों का चयन ऑनलाइन ट्रेनिंग से शुरू हुआ और फिर उन्हें आमने-सामने गहन सेशंस के लिए बुलाया गया।
नया टाईब्रेकर फॉर्मेट बना चुनौती
इस बार का सबसे बड़ा बदलाव टाईब्रेकर नियम में आया है। अब हर मैच को ‘डू ऑर डाई’ मुकाबला माना जा रहा है। अगर मैच बराबरी पर खत्म होता है तो टाईब्रेकर लागू होगा, जिसमें दोनों टीमों को पांच-पांच रेड मिलेंगी। इसमें खिलाड़ियों का आउट होना नहीं गिना जाएगा और बॉनस लाइन के तौर पर बॉक लाइन का इस्तेमाल किया जाएगा। ऐसे में रेफरी की भूमिका बेहद अहम हो गई है क्योंकि छोटी सी चूक भी मैच का नतीजा पलट सकती है।
हर पल परफेक्ट फैसले की मांग
ट्रेनिंग कैंप में सिर्फ नियम ही नहीं बल्कि पूरे प्रोसेस पर फोकस किया गया। यह देखा गया कि रेफरी कितनी तेजी से जानकारी इकट्ठा करते हैं और उसे कितनी सटीकता से लागू करते हैं। चूंकि एक ही दिन में कई मुकाबले खेले जाते हैं, ऐसे में हर अधिकारी परफेक्ट फैसले देने की जिम्मेदारी निभाता है। यही वजह है कि कैंप में टाइमिंग और मेथडॉलॉजी पर खास ध्यान दिया गया।
कबड्डी को नई ऊंचाई देने की तैयारी
यह ट्रेनिंग सिर्फ एक खेल को बेहतर बनाने के लिए नहीं, बल्कि उसे दर्शकों के लिए और भी रोमांचक बनाने की दिशा में उठाया गया कदम है। प्रो कबड्डी लीग लगातार एक ऐसा मंच बनता जा रहा है जहां खेल केवल प्रतिस्पर्धा नहीं बल्कि पेशेवर एंटरटेनमेंट के स्तर पर पहुंच चुका है। इस बदलाव में रेफरी की भूमिका पहले से कहीं ज्यादा बड़ी हो चुकी है और उनका हर निर्णय मैच का रोमांच बढ़ाने में अहम योगदान देता है।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQs)
प्रश्न 1: प्रो कबड्डी लीग 2025 का रेफरी ट्रेनिंग कैंप कब और कहां आयोजित हुआ?
उत्तर: यह ट्रेनिंग कैंप हैदराबाद में 15 अगस्त से 27 अगस्त तक आयोजित किया गया, जो कुल 12 दिन चला। इसमें पूरे देश से अधिकारियों को बुलाया गया।
प्रश्न 2: इस बार कितने नए रेफरी ट्रेनिंग कैंप में शामिल हुए?
उत्तर: इस बार 23 नए रेफरी ट्रेनिंग का हिस्सा बने, जिससे कुल संख्या बढ़कर 45 हो गई। इनमें नए और अनुभवी दोनों तरह के अधिकारी शामिल हैं।
प्रश्न 3: टाईब्रेकर फॉर्मेट में क्या नया बदलाव किया गया है?
उत्तर: टाईब्रेकर में हर टीम को पांच-पांच रेड मिलेंगी, खिलाड़ियों का आउट होना नहीं गिना जाएगा और बॉनस लाइन के लिए बॉक लाइन का इस्तेमाल किया जाएगा।
प्रश्न 4: ‘कश्मीर से कन्याकुमारी तक’ ट्रेनिंग प्रोग्राम की सबसे बड़ी खासियत क्या रही?
उत्तर: इसकी सबसे बड़ी खासियत यह रही कि इसमें केवल नियमों की जानकारी नहीं दी गई, बल्कि हर फैसले की टाइमिंग और सटीकता पर खास ध्यान दिया गया।
प्रश्न 5: तमिलनाडु और महाराष्ट्र से कितने रेफरी शामिल हुए?
उत्तर: इस बार तमिलनाडु और महाराष्ट्र से सबसे ज्यादा चार-चार रेफरी शामिल हुए, जो इन राज्यों की मजबूत प्रतिनिधित्व को दिखाता है।
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