ICC Women’s World Cup 2025 का 10वां मैच भारतीय महिला टीम और दक्षिण अफ्रीका महिला टीम के बीच विशाखापट्टनम में खेला गया, जिसमें मेजबान टीम को 3 विकेट से हार झेलनी पड़ी। इस मुकाबले में भारत ने पहले बल्लेबाजी करते हुए 251 रनों का सम्मानजनक स्कोर बनाया, जिसमें ऋचा घोष की विस्फोटक 94 रनों की पारी सबसे अहम रही। भारत ने मैच में दबदबा बनाने की कोशिश की, लेकिन दक्षिण अफ्रीका की टीम ने आखिरी ओवर तक सस्पेंस बनाए रखा।
दक्षिण अफ्रीका की नादिन डी क्लर्क ने 54 गेंदों में नाबाद 84 रनों की तूफानी पारी खेलकर भारत के खिलाफ मैच को पलट दिया और टीम को तीन विकेट से जीत दिलाई। इस अद्भुत प्रदर्शन के कारण उन्हें प्लेयर ऑफ द मैच चुना गया।
ऋचा घोष ने अकेले संभाली भारत की डूबती नैया
भारत ने टॉस जीतकर पहले बल्लेबाजी का फैसला लिया और शुरुआत में टीम ने अच्छे संकेत दिए। स्मृति मंधाना और प्रतिका रावल ने संभलकर बल्लेबाजी की और पॉवरप्ले में 55 रन जोड़े। दोनों ने गेंद को अच्छी तरह से खेलते हुए साझेदारी को स्थिर बनाए रखा।
लेकिन इसके बाद भारत की पारी अचानक ढह गई। लगातार तीन विकेट गिरने से टीम का संतुलन बिगड़ गया। कप्तान हरमनप्रीत कौर महज 9 रन बनाकर आउट हुईं, जेमिमाह रॉड्रिग्स बिना खाता खोले लौटीं और दीप्ति शर्मा भी 4 रन ही जोड़ सकीं।
ऐसे मुश्किल समय में ऋचा घोष ने एक बार फिर अपनी बल्लेबाजी की काबिलियत साबित की। उन्होंने संयम और आक्रामकता का बेहतरीन संतुलन बनाते हुए मैदान के हर कोने में शॉट खेले। ऋचा ने 77 गेंदों पर 94 रनों की पारी खेली, जिसमें 11 चौके और 4 छक्के शामिल थे।
उनकी इस पारी के दौरान उन्होंने स्नेह राणा के साथ 88 रनों की साझेदारी की, जिसने भारत को वापसी का मौका दिया। स्नेह ने 24 गेंदों में 33 रन बनाए और तेज रन बनाकर स्कोर को 250 के पार पहुंचाने में अहम भूमिका निभाई।
भारत की पारी 49.5 ओवरों में 251 रन पर समाप्त हुई। आखिरी ओवरों में विकेट गिरते रहे, लेकिन ऋचा घोष की जुझारू बल्लेबाजी के दम पर टीम ने एक लड़ने लायक स्कोर खड़ा किया।
कैप और ट्रायन ने रखी दक्षिण अफ्रीका की गेंदबाजी की नींव
दक्षिण अफ्रीका की गेंदबाजों ने नई गेंद से लगातार भारतीय बल्लेबाजों पर दबाव बनाया। मरिज़ाने कैप ने अपनी लाइन और लेंथ से रन गति पर नियंत्रण रखा और तीन अहम विकेट हासिल किए। क्लोए ट्रायन ने बीच के ओवरों में शानदार स्पैल डाला और दो बल्लेबाजों को आउट किया।
नादिन डी क्लर्क ने भी गेंद से अहम भूमिका निभाई। उन्होंने बीच के ओवरों में नियंत्रण बनाए रखा और ऋचा घोष के खिलाफ अपनी रणनीति से टीम को राहत दिलाई। हालांकि, उनकी असली चमक बल्ले से देखने को मिली।
डी क्लर्क के करिश्मे ने पलट दिया मैच
लक्ष्य का पीछा करने उतरी दक्षिण अफ्रीका की शुरुआत बेहद खराब रही। ताजमिन ब्रिट्स बिना खाता खोले आउट हो गईं जबकि सुन्ने लूस भी 5 रन बनाकर लौट गईं। कप्तान लौरा वुल्फार्ट ने एक छोर संभाला और संयम से बल्लेबाजी की, लेकिन दूसरे छोर से विकेट गिरते रहे।
81 रनों पर जब दक्षिण अफ्रीका ने अपने पांच विकेट गंवा दिए, तब ऐसा लगा कि भारत यह मैच आराम से जीत लेगा। भारतीय गेंदबाज उस समय पूरे नियंत्रण में थे, लेकिन इसके बाद मैदान पर आईं क्लोए ट्रायन और नादिन डी क्लर्क ने मैच का चेहरा ही बदल दिया।
दोनों के बीच 69 रनों की साझेदारी हुई, जिसने दक्षिण अफ्रीका को मजबूती दी। ट्रायन 49 रन बनाकर आउट हुईं, लेकिन डी क्लर्क का तूफान रुकने का नाम नहीं ले रहा था। उन्होंने भारतीय गेंदबाजों पर लगातार आक्रामक शॉट लगाए और विशेष रूप से ऋचा घोष की बल्लेबाजी से प्रेरित होकर मैच को अपने नाम करने का जुनून दिखाया।
डी क्लर्क ने 54 गेंदों में नाबाद 84 रन बनाए, जिसमें 8 चौके और 5 छक्के शामिल थे। उन्होंने आखिरी ओवर में चौका लगाकर टीम को जीत दिलाई और दर्शकों में जोश भर दिया।
भारतीय गेंदबाजों की मेहनत नहीं लाई रंग
भारत की गेंदबाजों ने शुरुआती ओवरों में शानदार प्रदर्शन किया। क्रांति गौड़ ने शुरुआती विकेट लेकर मैच को अपने नियंत्रण में रखा। उनकी गति और स्विंग दोनों से बल्लेबाजों को परेशान किया, वहीं अमनजोत कौर ने लगातार सही लाइन पर गेंदबाजी की। बीच के ओवरों में श्री चरनी और स्नेह राणा ने भी अच्छी गेंदबाजी की।
हालांकि, डी क्लर्क की पारी ने उनके सभी प्रयासों को विफल कर दिया। जब मैच का दबाव बढ़ा, तब भारतीय गेंदबाजों के अनुभव की कमी साफ नजर आई। साउथ अफ्रीका की यह जीत टूर्नामेंट के अंक तालिका पर बेहद अहम साबित हुई। टीम ने अपने तीन मैचों में दो जीत हासिल कर ली हैं और सेमीफाइनल की दौड़ में मजबूती से लौट आई है। वहीं भारत की टीम भी 3 मैचों में 2 जीत हासिल करके तीसरे स्थान पर है।

