फीफा वर्ल्ड कप 2026 में 18 जून (गुरुवार) को ऐसा नतीजा देखने को मिला, जिसने पूरे दुनिया भर के फुटबॉल फैंस का ध्यान अपनी ओर खींच लिया। ग्रुप K के मुकाबले में डेमोक्रेटिक रिपब्लिक कांगो (DR कांगो) ने पुर्तगाल के खिलाफ 1-1 से मैच ड्रॉ कराके इतिहास रच दिया। ह्यूस्टन के NRG स्टेडियम में खेले गए इस मुकाबले में दिग्गज क्रिस्टियानो रोनाल्डो की टीम जीत की प्रबल दावेदार मानी जा रही थी, लेकिन 52 साल बाद वर्ल्ड कप में लौटे अफ्रीकी देश ने दुनिया को दिखा दिया कि सपने सिर्फ बड़े देशों के नहीं होते।
यह मैच खत्म होने के बाद डेमोक्रेटिक रिपब्लिक कांगो फुटबॉल टीम के खिलाड़ियों के चेहरों पर जो खुशी दिखाई दी, वह सिर्फ एक ड्रॉ की खुशी नहीं थी। यह उन लाखों फुटबॉल प्रेमियों की खुशी थी, जिन्होंने आधी सदी से ज्यादा समय तक अपने देश को वर्ल्ड कप मंच पर दोबारा देखने और पहला अंक पाने का इंतजार किया था। भले ही पुर्तगाल के लिए यह दो अंक गंवाने की कहानी थी, लेकिन कांगो के लिए यह इतिहास लिखने वाली रात बन गई।
जोआओ नेवेस ने पुर्तगाल को दिलाई थी शानदार शुरुआत
इस मुकाबले की शुरुआत से ही पुर्तगाल फुटबॉल टीम ने अपना दबदबा दिखाना शुरू कर दिया था। ब्रूनो फर्नांडिस और वितिन्या मिडफील्ड में गेम को कंट्रोल कर रहे थे, जबकि बर्नार्डो सिल्वा और पेड्रो नेटो लगातार कांगो की डिफेंस लाइन पर दबाव बना रहे थे।
पुर्तगाल को छठे मिनट में इसका इनाम भी मिला। पेड्रो नेटो ने बॉक्स के अंदर शानदार गेंद डाली और 21 वर्षीय जोआओ नेवेस (Joao Neves) ने सटीक हेडर के साथ गेंद को नेट में पहुंचा दिया। यह नेवेस का पहला वर्ल्ड कप मैच भी था और इसी मुकाबले में उन्होंने अपना पहला वर्ल्ड कप गोल भी दाग दिया।
मैच की शुरुआत में ही आए इस गोल के बाद ऐसा लग रहा था कि पुर्तगाल बड़े ही आसानी से इस मुकाबले में अपनी पकड़ बना लेगा। यहाँ तक कि स्टेडियम में मौजूद हजारों फैंस और दुनिया भर में रोनाल्डो के चाहने वाले भी शायद उनकी जीत को लेकर आश्वस्त हो गए होंगे, लेकिन इसके आगे जो हुआ, उसकी शायद किसी को उम्मीद नहीं थी।
डेमोक्रेटिक रिपब्लिक कांगो ने नहीं मानी हार
आपने कई बार देखा होगा कि अक्सर बड़ी टीमों के सामने कमजोर टीमें गोल खाने के बाद लगभग पूरी तरह बिखर जाती हैं। खासकर तब, जब सामने पुर्तगाल जैसी मजबूत टीम हो तो फिर वापसी करना लगभग सपने की तरह ही लगता है, लेकिन डेमोक्रेटिक रिपब्लिक कांगो ने इस मुकाबले में अलग ही कहानी लिखने का फैसला कर लिया था।
कांगो ने पहले आर्थर मासुआकू, आरोन वान-बिसाका और कप्तान चांसेल म्बेम्बा की अगुआई में धीरे-धीरे खुद को संभाला। इसके बाद योआने विस्सा और सेड्रिक बाकाम्बू ने अटैक में दबाव बनाना शुरू किया। जैसे-जैसे समय बीतता गया, अफ्रीकी टीम का आत्मविश्वास और भी बढ़ता गया।
सबसे बड़ी बात यह थी कि कांगो के खिलाड़ी इस मुकाबले में सिर्फ डिफेंड ही नहीं कर रहे थे, बल्कि मौका मिलने पर जवाबी हमला करने की भी कोशिश कर रहे थे। यही वजह थी कि पुर्तगाल इस मुकाबले में पूरी तरह निश्चिंत होकर आगे नहीं बढ़ पा रहा था।
45+5वें मिनट में आया वह पल जिसका कांगो फैंस को था बेसब्री से इंतजार
मैच के आगे बढ़ने के साथ-साथ म्पासी का हर सेव DR कांगो के खिलाड़ियों का विश्वास और मजबूत कर रहा था। इसी बीच उनकी टीम को पहले हाफ के स्टॉपेज टाइम में कॉर्नर मिला। उस समय शायद ही किसी ने सोचा होगा कि अगले कुछ सेकंड में इतिहास बनने वाला है।
45+5वें मिनट में कॉर्नर से बॉक्स में आई गेंद पर योआने विस्सा (Yoane Wissa) ने शानदार हेडर लगाकर उसे सीधे नेट में पहुंचा दिया और स्कोर को 1-1 से बराबर कर दिया। हालांकि, यह सिर्फ बराबरी वाला गोल नहीं था, बल्कि डेमोक्रेटिक रिपब्लिक कांगो के वर्ल्ड कप इतिहास का पहला गोल भी था।
बता दें कि, 1974 के वर्ल्ड कप में डेमोक्रेटिक रिपब्लिक कांगो फुटबॉल टीम (उस समय ज़ैरे फुटबॉल टीम) का कोई खिलाड़ी एक भी गोल नहीं कर सका था, लेकिन योआने विस्सा ने इस मुकाबले में यह सूखा भी खत्म कर दिया। इसी के साथ वह कांगो के लिए वर्ल्ड कप में गोल दागने वाले पहले खिलाड़ी भी बन गए।
दूसरे हाफ में पुर्तगाल ने लगाया जोर लेकिन नहीं मिली जीत
पहले हाफ में 1-1 की बराबरी के बाद पुर्तगाल ने दूसरे हाफ में ज्यादातर समय बॉल पजेशन अपने पास रखा और लगातार गोल की तलाश करता रहा। रोनाल्डो बॉक्स के अंदर मौके ढूंढ रहे थे, जबकि ब्रूनो फर्नांडिस और बर्नार्डो सिल्वा अटैक को गति देने की कोशिश कर रहे थे।
हालांकि, DR कांगो की डिफेंस लाइन बेहद अनुशासित रही। कप्तान चांसेल म्बेम्बा ने पीछे से शानदार नेतृत्व किया और पूरी टीम ने एक यूनिट की तरह डिफेंड किया। हालांकि, पुर्तगाल ने ज्यादा शॉट लगाए और ज्यादा मौके भी बनाए, लेकिन उन्हें उसका कोई फायदा नहीं मिला।
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जोआओ नेवेस बने प्लेयर ऑफ द मैच
पुर्तगाल के मिडफील्डर जोआओ नेवेस को इस मुकाबले का प्लेयर ऑफ द मैच चुना गया। उन्होंने इस मैच का पहला गोल किया और पूरे मुकाबले में मिडफील्ड में अच्छा प्रदर्शन भी किया। हालांकि, उनका यह गोल भले ही पुर्तगाल को जीत नहीं दिला सका, लेकिन निजी रूप से उनके लिए एक यादगार रात जरूर बन गया।
लियोनेल म्पासी रहे DR कांगो की सबसे बड़ी उम्मीद
अगर इस मैच में डेमोक्रेटिक रिपब्लिक कांगो अंत तक बना रहा तो उसकी सबसे बड़ी वजह गोलकीपर लियोनेल म्पासी थे। पुर्तगाल ने पहले हाफ में ही कई बार दूसरा गोल करने की कोशिश की, लेकिन म्पासी हर बार उनके सामने दीवार बनकर खड़े रहे।
31-वर्षीय गोलकीपर ने कई क्रॉस रोके, शॉट बचाए और बॉक्स में पूरे आत्मविश्वास के साथ अंत तक डंटे रहे। वैसे भी, जब सामने क्रिस्टियानो रोनाल्डो, ब्रूनो फर्नांडिस और बर्नार्डो सिल्वा जैसे खिलाड़ी हों, तब इस तरह का प्रदर्शन किसी भी गोलकीपर के लिए खास माना जाता है।
रोनाल्डो की वापसी रही फीकी
इस मुकाबले के दौरान दुनिया भर के फुटबॉल फैंस की नजरें क्रिस्टियानो रोनाल्डो पर टिकी हुई थीं। 40 वर्षीय दिग्गज से उनके फैंस गोल की उम्मीद कर रहे थे। रोनाल्डो ने लगातार कोशिश भी की, लेकिन कांगो की डिफेंस ने उन्हें खुलकर खेलने का मौका नहीं दिया। वह कई बार सही जगह पर पहुंचे, लेकिन उन्हें अंत तक सफलता नहीं मिल सकी।
रोनाल्डो से इस मुकाबले में गोल की उम्मीद इसलिए भी की जा रही थी, क्योंकि अर्जेंटीना के दिग्गज लियोनेल मेसी ने अपने ओपनिंग मैच में अल्जीरिया के खिलाफ शानदार हैट्रिक लगाया था। इसीलिए, उनसे भी बड़े मंच पर कम अनुभव वाली टीम कांगो के सामने कुछ ऐसे ही प्रदर्शन की उम्मीद की जा रही थी।
यह तो आप सभी बखूबी जानते होंगे कि उनकी तुलना अक्सर मेसी से की जाती है, जिन्होंने हाल ही में जर्मनी के मिरास्लेव क्लोज के फीफा वर्ल्ड कप इतिहास में सबसे ज्यादा (16) गोल के रिकॉर्ड की बराबरी कर ली। दूसरी ओर, रोनाल्डो अब तक छह वर्ल्ड कप संस्करणों में सिर्फ 8 गोल ही दाग सके हैं।
कांगो ने दुनिया को बताई अंडरडॉग टीमों की ताकत
भले ही यह मुकाबला 1-1 की बराबरी पर समाप्त हुआ, लेकिन डेमोक्रेटिक रिपब्लिक कांगो के लिए यह सिर्फ एक अंक नहीं था। यह वह रात थी, जब उन्होंने दुनिया को याद दिला दिया कि वर्ल्ड कप जैसे बड़े मंच पर सिर्फ बड़ी टीमें ही इतिहास नहीं लिखतीं, बल्कि अंडरडॉग टीमें भी वही जज्बा लेकर आती हैं।
दूसरी ओर, पुर्तगाल के लिए यह परिणाम निराशाजनक हो सकता है, लेकिन DR कांगो के लिए यह मुकाबला हमेशा यादगार रहेगा। इस मैच में योआने विस्सा का गोल, लियोनेल म्पासी की शानदार गोलकीपिंग और पूरी टीम का जज्बा, इन सबने मिलकर फीफा वर्ल्ड कप 2026 की सबसे भावुक और ऐतिहासिक कहानियों में से एक को जन्म दिया।
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