काफी रोमांचक रहा है मोटोजीपी का सफर, इतिहास और महत्वपूर्ण अंग

ऐसे में ये भारत का एकमात्र ऐसा सर्किट होगा जहां पर ये दोनों रेस हुई हो। भारत के अलावा कजाकिस्तान में भी इस साल मोटोजीपी का आयोजन होने वाला है। आइए अब इसके इतिहास पर एक नजर डालते हैं। 

MotoGP: इस महीने की 24 सितंबर से पहली बार भारत में मोटो जीपी रेस की शुरुआत होने जा रही है। ये रेस ग्रेटर नोएडा के बुद्ध इंटरनेशनल सर्किट पर आयोजित होगी। इस दौरान पूरी दुनिया के मशहूर रेसर यहां पर मौजूद रहने वाले हैं। भारत के लिहाज से इस प्रकार की रेसिंग का ये पहला अनुभव भी होने वाला है, जिसमें 990 सीसी के इंजन की बाइक सर्किट पर दौड़ने का आनंद मिलेगा। इस रेस के बाद भारत भी अपने आप में दुनिया के उन 20 देशों में शामिल हो जाएगा, जहां पर मोटो जीपी रेसिंग हुई हो। इससे पहले भारत के इकलौते बुद्ध इंटरनेशनल सर्किट पर एफवन रेस हो चुकी है और चंद दिनों बाद मोटो जीपी रेस होने वाली है। ऐसे में ये भारत का एकमात्र ऐसा सर्किट होगा जहां पर ये दोनों रेस हुई हो। भारत के अलावा कजाकिस्तान में भी इस साल मोटोजीपी का आयोजन होने वाला है। आइए अब इसके इतिहास पर एक नजर डालते हैं।

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क्या कहता है मोटोजीपी का इतिहास? 

हांलाकि भारत में इस साल पहली बार मोटोजीपी का आयोजन हो रहा है, लेकिन दुनिया के लिहाज से इसका इतिहास काफी पुराना है। मोटोजीपी की शुरुआत आज से करीब 74 साल पहले हुई थी। साल 1949 में फेडरेशन इंटरनेशनल जी मोटरसाइकिल (MFIEM) ने पहली बार इसका आयोजन मोटो जीपी यूनाइटेड किंग्डम के अधिकार श्रेत्र आइल ऑफ मेन में कराया था। इस दौरान चार वर्ग की मोटरसाइकिल ने हिस्सा लिया था। इसमें 125, 250, 300 और 500 सीसी की मोटरसाइकिल और साइडकार ने हिस्सा लिया था। गौरतलब है कि मोटोजीपी के शुरुआती दिनों में टू स्ट्रोक इंजन के साथ बाइक रेस हुआ करती थी, लेकिन साल 2002 के आते-आते इसमें फोर स्ट्रोक इंजन लगा दिया गया और इसके रेस का हिस्सा बना दिया गया। अगर बात करें वर्तमान समय में इस चैंपियनशिप के वर्ग की तो बता दें कि ये चार हिस्सों में बटी हुई है। इसमें पहली मोटोजीपी, मोटो2, मोटो 3 और मोटो ई शामिल हैं।

इसके इतर यदि मोटरसाइकिल के इतिहास की बात करें तो रिपोर्ट्स बताती हैं कि 1800 ई. के आखिरी दशक तक इसकी शुरुआत हो चुकी थी। इसके पहले दिनों में कई लोग मोटरसाइकिल की क्षमता का अंदाजा लगाने के लिए भी इसकी रेस किया करते थे। ऐसा करीब 60-70 सालों तक हुआ। इसके बाद दूसरे विश्व युद्ध के होते ही यानी 1949 में FIEM ने मोटोजीपी रेस की शुरुआत की। उन दिनों मोटरसाइकिल में साइडकार भी हुआ करती थी। जानकारी के लिए बता दें कि साइडकार मोटरसाइकिल से लगा हुआ एक हिस्सा होता है, जिसमें राइडर के अलावा एक व्यक्ति और बैठ सकता है। साल 1990 में इसे भी मोटरसाइकिल से हटा दिया गया था।

ये चार संस्थाएं हैं महत्वपूर्ण

जैसा कि इस लेख के शुरुआत में ही हम आपको बता चुके हैं कि साल 1949 में मोटोजीपी की शुरुआत हो चकी थी। इस वक्त इसके सभी आर्थिक अधिकार डोर्नो स्पोर्ट्स के पास हैं। इस साल जो भारत में मोटोजीपी की शुरुआत हो रही है। दरअसल, भारतीय कंपनियों ने इससे ही हिंदुस्तान में मोटोजीपी आयोजित कराने के लिए लाइसेंस लिया है। FIEM के पास खेल को मंजूरी देने का अधिकार है। इसके अलावा सभी टीमों का प्रतिनिधित्व इंटरनेशनल रोड रेसिंग टीम्स एसोसिएशन (IRTA) और निर्माताओं का प्रतिनिधित्व मोटरसाइकिल स्पोर्ट मैन्युफैक्चर एसोसिएशन (MSMA) करती है। इस खेल के किसी भी नियम में बदलाव या फिर कोई भी नया निर्णय ये ही चार कंपनियां लेती हैं।

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