इंग्लैंड में स्थित लॉर्ड्स क्रिकेट ग्राउंड को क्रिकेट का मक्का कहा जाता है। इसकी स्थापना 1814 में की गई थी। यह क्रिकेट का आधिकारिक स्थल माना जाता है। इस ग्राउंड का नामकरण इसके संस्थापक थॉमस लॉर्ड के नाम पर रखा गया है। यह ग्राउंड मैरीलेबोन क्रिकेट क्लब के अधिकार में है और अगस्त 2005 तक अंतर्राष्ट्रीय क्रिकेट परिषद (आईसीसी) का मुख्यालय भी रहा।
इस स्टेडियम में अब तक तीन विश्व कप फाइनल खेले जा चुके हैं। वहीं, छोटी-बड़ी सीरीज़ों के फाइनल की बात करें तो इनकी संख्या दर्जनों में है।
‘क्रिकेट का मक्का’ किस मैदान को कहा जाता है?
1787 में लॉर्ड्स क्रिकेट ग्राउंड बनाया गया था, लेकिन बाद में इसे तोड़ दिया गया, जहाँ अब एक स्टैंड बना हुआ है। 1813 में इस ग्राउंड का पुनर्निर्माण किया गया, लेकिन वह भी ज्यादा दिन तक नहीं चला। तीसरी बार जब इस मैदान का निर्माण किया गया, तब से अब तक यहाँ मैच खेले जा रहे हैं। इसमें लगभग 30 हजार दर्शक बैठ सकते हैं।
यह ग्राउंड दुनिया के सबसे चौड़े ग्राउंड्स में से एक है। इस ग्राउंड का नामकरण इसके संस्थापक थॉमस लॉर्ड के नाम पर किया गया था। पहली बार यहाँ 21 जून 1814 को मैच खेला गया था।
लॉर्ड्स को व्यापक रूप से “क्रिकेट का घर” या “क्रिकेट का मक्का” कहा जाता है और यह दुनिया के सबसे पुराने खेल संग्रहालय का घर है। यह एमसीसी (मैरीलेबोन क्रिकेट क्लब), मिडलसेक्स काउंटी और इंग्लैंड एवं वेल्स क्रिकेट बोर्ड (ECB) का मुख्य केंद्र भी है।
क्या है लॉर्ड्स क्रिकेट ग्राउंड की की विशेषताएं
- यह विश्व का सबसे पुराना और सबसे प्रतिष्ठित क्रिकेट ग्राउंड है।
- 1814 में मैरीलेबोन क्रिकेट क्लब (MCC) द्वारा इसका निर्माण किया गया था।
- लॉर्ड्स में कई ऐतिहासिक क्रिकेट मैच खेले गए हैं, जिनमें पहला टेस्ट मैच, पहला क्रिकेट विश्व कप फाइनल और कई अन्य महत्वपूर्ण मुकाबले शामिल हैं।
- लॉर्ड्स क्रिकेट के लिए एक प्रतीकात्मक स्थान है और इसे अक्सर “क्रिकेट का घर” (Home of Cricket) कहा जाता है।
लॉर्ड्स के ग्राउंड पर शतक लगाना इतनी बड़ी बात क्यों हैं
क्रिकेट की शुरुआत सबसे पहले इंग्लैंड में हुई थी। वैसे ही भारत जैसे कुछ क्रिकेट प्रेमी देशों में क्रिकेट अब त्योहार और धर्म की तरह चर्चित हो गया है। जैसे किसी धार्मिक व्यक्ति की अपने विशेष धार्मिक स्थल पर जाने की इच्छा होती है, ठीक उसी तरह हर एक क्रिकेटर की भी यह चाह होती है कि वह लॉर्ड्स के मैदान पर बड़ी पारी खेले। जिसे मौका मिलते ही हर खिलाड़ी एक बार ज़रूर पूरा करना चाहता है।
लॉर्ड्स के ग्राउंड पर किन दो टीमों के बीच खेला गया था इंटरनेशनल मैच
21 जुलाई 1884 को लंदन के लॉर्ड्स में ऑस्ट्रेलिया और इंग्लैंड के बीच पहला अंतर्राष्ट्रीय टेस्ट मैच खेला गया था, जो 23 जुलाई को समाप्त हुआ। इस मैच में परिणाम निकला, जिसमें ऑस्ट्रेलियाई टीम को पारी और 5 रन से हार का सामना करना पड़ा। लॉर्ड हैरिस की कप्तानी में इंग्लैंड टीम ने अपना पहला टेस्ट मैच जीता था। इंग्लिश टीम की ओर से बल्लेबाज़ ऐलन स्टील ने 148 रन की शानदार पारी खेली थी, वहीं जॉर्ज उल्येट ने 7 विकेट अपने नाम किए थे।
लॉर्ड्स क्रिकेट ग्राउंड पर शतक लगाने वाले भारतीय बल्लेबाज़
- दिलीप वेंगसरकर – 3 शतक
- अजीत अगरकर – 1 शतक
- मोहम्मद अजहरुद्दीन – 1 शतक
- राहुल द्रविड़ – 1 शतक
- सौरव गांगुली – 1 शतक
- वीनू मांकड़ – 1 शतक
- अजिंक्य रहाणे – 1 शतक
- केएल राहुल – 1 शतक
- रवि शास्त्री – 1 शतक
- गुंडप्पा विश्वनाथ – 1 शतक
इस मैदान पर अच्छे रिकॉर्ड बनाने का सपना हर एक खिलाड़ी का होता है, चाहे वह किसी भी टीम से खेलता हो। इस ग्राउंड की सीमाएँ काफी दूर हैं और इस पिच पर तेज़ गेंदबाज़ों को काफी मदद मिलती है। इसलिए यहाँ शतक बनाना एक बहुत बड़ी उपलब्धि मानी जाती है।

